4 जनवरी 2018 को वाणी प्रकाशन से प्रकाशित विख्यात आलोचक राजनेता एवं स्तंभकार डॉ.शशि थरूर की नई पुस्तक ‘अन्धकार काल: भारत में ब्रिटिश साम्राज्य’ का लोकार्पणइंडिया सेंटर एनेक्स, सेमिनार कक्ष-1,2,3 मैक्सम्युलर मार्ग, नईदिल्ली-110003 मेंशाम 6:30 बजे आयोजित होगा. यह पुस्तक थरूर की ‘An Era of Darkness: The BritishEmpire in India’ का हिंदी अनुवाद है. लोकार्पण और परिचर्चा में शामिल समाजशास्त्रीअभय कुमार दुबे, सुप्रसिद्ध कवि, कथाकार, पत्रकार और फिल्मकार उदय प्रकाश, एनडीटीवीइंडिया की वरिष्ठ संपादक नग़मा सहर और द लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी कासान्निध्य रहेगा. साथ ही डॉ. शशि थरूर अपनी हिंदी पुस्तक पर वक्तव्य रखेंगे.--------------------------------------------------------------------------------# पुस्तकइस धमाकेदार पुस्तक में लोकप्रिय लेखक शशि थरूर ने प्रामाणिक शोध एवं अपनी चिरपटुतासे यह उजागर किया है कि भारत के लिए ब्रिटिश शासन कितना विनाशकरी था. उपनिवेशकोंद्वारा भारत के अनेक प्रकार से किए गए शोषण जिनमें भारतीय संसाधनों के ब्रिटेनपहुंचने से लेकर भारतीय कपड़ा उद्योग, इस्पात निर्माण, नौवहन उद्योग और कृषि कानकारात्मक रूपांतरण शामिल है. इन्हीं सब घटनाओं पर प्रकाश डालने के अतिरिक्त वेब्रिटिश शासन के प्रजातंत्र एवं राजनीतिक स्वतंत्रता, क़ानून व्यवस्था, साम्राज्य केपश्चिमी व भारतीय समर्थक और रेलवे के तथाकथित लाभों के तर्कों को भी निरस्त करतेहैं. अंग्रेज़ी भाषा, चाय और क्रिकेट के कुछ निर्विवादित लाभ वास्तव में कभी भीभारतीयों के लिए नहीं थे अपितु उन्हें औपनिवेशकों के हितों के लिए लाया गया था.भावपूर्ण तर्कों के साथ शानदार ढंग से वर्णित यह पुस्तक भारतीय इतिहास के एकसर्वाधिक विवादास्पद काल के संबंध में अनेक मिथ्या धारणाओं को सही करने में सहायताकरेगी. भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का प्रारंभ 1600 में रानी एलिज़ाबेथ-I के द्वारासिल्क, मसालों एवं अन्य लाभकारी भारतीय वस्तुओं के व्यापार के लिए ईस्ट इंडियाकंपनी को शामिल कर लिए जाने से हुआ. डेढ़ शती के भीतर ही कंपनी भारत में एकमहत्तवपूर्ण शक्ति बन गई. वर्ष 1757 में रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में कंपनी बलोंने बंगाल में शासन कर रहे सराजुद्दौला को प्लासी में अपेक्षाकृत बेहतर तोपों एवंतोपों से भी उच्च स्तर के छल से पराजित कर दिया. कुछ वर्ष बाद युवा एवं कमज़ोर पड़चुके शाह आलम-II को धमका कर एक फ़रमान जारी करवा लिया जिसके द्वारा उसके अपने राजस्वअधिकारियों का स्थान कंपनी के प्रतिनिधियों ने ले लिया. अगले अनेक दशक तक ईस्टइंडिया कंपनी ने ब्रिटिश सरकार के सहयोग से लगभग पूरे भारत पर अपना नियंत्रण फैलालिया और लूट-खसोट, कपट, व्यापक भ्रष्टाचार के साथ-साथ हिंसा एवं बेहतरीन बलों कीसहायता से शासन किया. यह स्थिति 1857 में तब तक जारी रही जब बड़ी संख्या में कंपनीके भारतीय सैनिकों के नेतृत्व में औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध पहला बड़ा विद्रोह हुआ.विद्रोहियों को पराजित कर देने के बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने सत्ता अपने हाथ में लेली और 1947 में भारत के स्वतंत्र होने तक देश पर दिखावटी तौर पर अधिक दयापूर्ण ढंगसे शासन किया.--------------------------------------------------------------------------------# शशि थरूरशशि थरूर विख्यात आलोचक एवं स्तंभकार होने के साथ-साथ 15 कथा-साहित्य एवं अन्यपुस्तकों के लोकप्रिय लेखक हैं. आपकी पुस्तकों में महत्तवपूर्ण व्यंग्य पुस्तक ‘दग्रेट इण्डियन नॉवेल 1989, इंडिया : फ्रॉम मिडनाइट टू द मिलेनियम (1997) और हाल हीमें इंडिया शास्त्रः रिफलैक्शन्स ऑन द नेशन इन आवर टाइम 2015 शामिल हैं. वे संयुक्तराष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और भारत सरकार के पूर्व मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री और विदेशी मामलों के पूर्व राज्य मंत्री रहे हैं. वे तिरुवनंतपुरम से दो बारलोकसभा सदस्य रहे हैं और संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं. उन्हेंकॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज़ सहित अनेक साहित्यिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं औरएनडीटीवी द्वारा उन्हें न्यू एज पॉलिटिशियन ऑफ़ द इयर2010 से सम्मानित किया गया.उन्हें विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत के सर्वोच्च सम्मान प्रवासीभारतीय सम्मान से भी सम्मानित किया गया.--------------------------------------------------------------------------------# अभय कुमार दुबेसमाज शास्त्री अभय कुमार दुबे विकासशील समाज अध्ययन पीठ में फेलो और सीएसडीएसभारतीय भाषा कार्यक्रम के निदेशक हैं. पिछले दस साल से हिंदी-रचनाशीलता और आधुनिकविचारों की अन्योन्यक्रिया का अध्ययन कर रहे हैं. उन्होंने साहित्यिक रचनाओं कोसमाजवैज्ञानिक दृष्टि से परखने का प्रयास किया है. वे समाज-विज्ञान को हिंदी औरअन्य भारतीय भाषाओं में लाने की परियोजना के तहत पन्द्रह ग्रन्थों का संपादन औरप्रस्तुति कर चुके हैं. अभय कुमार दुबे ने कई विख्यात विद्वानों की रचनाओं केअनुवाद भी किया है. वे समाज-विज्ञान और मानविकी की पूर्व-समीक्षित पत्रिका प्रतिमानसमय समाज संस्कृति के संपादक हैं. पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन और टीवी चैनलोंपर होने वाली चर्चाओं में उनकी नियमित भागीदारी रहती आई है.--------------------------------------------------------------------------------# उदय प्रकाशमध्य प्रदेश के सीतापुर गांव में जन्मे उदय प्रकाश ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालयके मणिपुर केंद्र में चार वर्ष तक अध्यापन करने के बाद दो वर्ष तक मध्य प्रदेश केसंस्कृति विभाग में काम किया और ‘पूर्वग्रह’ पत्रिका में संपादन सहयोग किया. नौवर्षों तक ‘दिनमान’ के संपादकीय विभाग में, कुछ समय तक टेलीविजन में पटकथा लेखन और‘संडे मेल’ में वरिष्ठ सहायक संपादक के रूप में काम करने के बाद मीडिया से जुड़ेरहे और स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं. उनकी कई कृतियों के अंग्रेज़ी, जर्मन, जापानी एवंअन्य अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं, कई कहानियों के नाट्य रूपांतरण औरसफल मंचन भी हुए हैं. ‘उपरान्त’ और ‘मोहनदास’ कहानियों पर बनी फ़ीचर फिल्मों कोअंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं. कहानी, कविता तथा अन्य विधाओं में उनकी लगभग20 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं. मोहनदास, तिरिछ, पीली छतरी वाली लड़की, पाल गोमराका स्कूटर और दत्तात्रेय के दुख उनकी प्रमुख कृतियां हैं. मोहनदास के लिए उन्हेंवर्ष 2010 का साहित्य अकादेमी सम्मान मिल चुका है. इसके अलावा उन्हें भारत भूषणअग्रवाल पुरस्कार, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान, श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार,मुक्तिबोध सम्मान, रामकृष्ण जयदयाल सद्भावना सम्मान, पहल सम्मान, कथाक्रम सम्मान औरद्विजदेव सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं.--------------------------------------------------------------------------------# नग़मा सहरएनडीटीवी इंडिया की वरिष्ठ संपादक नग़मा सहर ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (दिल्लीविश्वविद्यालय) से भूगोल में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की. जब नग़मा अपनी पीएच.डी.डिग्री पूर्ण करने की दिशा में कार्यरत थीं, उसी दौरान उन्हें ग्रामीण विकास के लिएजूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) से सम्मानित किया गया. इसी दौरान नग़मा ने एक माह केलिए आज तक न्यूज़ चैनल के साथ एक शोधकर्ता के रूप में कार्य किया. यही उनकी ज़िन्दगीका टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ और उनके दिल में मीडिया के क्षेत्र में कॅरियर बनानेकी दृढ़ इच्छा जाग्रत हुई. नग़मा ने अपने करियर की शुरुआत एशियन एज से एक प्रिंटपत्रकार के रूप में की. यहां उनका कार्यकाल संक्षिप्त समय के लिए रहा. 1999 मेंनग़मा आज तक से जुड़ गईं और प्रात: नाश्ते के समय प्रसारित होने वाले कार्यक्रम‘सुबह आज तक’ में को-एंकर की भूमिका अदा की. नग़मा ने सन् 2003 में एनडीटीवी इंडियाको ज्वॉइन किया. आजकल वह एनडीटीवी पर ‘इण्टर नेशनल एजेंडा’ नामक शो को होस्ट करतीहैं, जोकि अंतर्राष्ट्रीय समाचारों व दुनिया के देशों के प्रति भारत की रक्षानीतियों पर एक टॉक शो है. पटना, बिहार में जन्मी और पली-बढ़ी, नग़मा सहर को टीवीन्यूज़ इण्डस्ट्री में एक समर्पित और सशक्त पत्रकार के रूप में देखा जाता है. स्वभावसे शर्मीली नग़मा ने कई यादगार मौकों पर अपनी क़ाबिलियत का उम्दा प्रदर्शन किया है,फिर चाहे बात मुम्बई सीरियल ट्रेन विस्फोटों की हो या कश्मीर विधानसभा चुनाव की,आगरा शिखर सम्मेलन की हो या सन् 2000 कुम्भ मेले की, दिल्ली-लाहौर बस यात्रा काउद्घाटन समारोह की हो या उरी, कश्मीर में आए विनाशकारी भूकंप की, या फिर फ़िल्मस्टार अक्षय खन्ना के साथ ‘जय जवान’ शो की प्रस्तुति की. नग़मा द्वारा होस्ट कियागया प्रोग्राम ‘सलाम ज़िन्दगी’ दर्शकों द्वारा काफ़ी पसंद किया गया. इस प्रोग्राम मेंनग़मा ने समाज के ज्वलंत मुद्दों जैसे ‘ट्रांसजेंडर’, मादक पदार्थों के सेवन आदि कोबड़े सहज रूप में प्रस्तुत किया. नग़मा को ग्रामीण विकास के लिए यूजीसी छात्रवृत्तिसे सम्मानित किया गया है. नग़मा ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या परिषद् और सामाजिकअनुसंधान केंद्र के साथ कार्य किया है, जो कि महिलाओं के विभिन्न मुद्दों पर प्रकाशडालती है.--------------------------------------------------------------------------------# सौरभ द्विवेदीसौरभ द्विवेदी द लल्लनटॉप के संपादक हैं. दुनिया में तीन शहर हैं - मुम्बई, दुबई औरउरई. ये दुबे उरई से हैं- भकुआया हुआ सा आदमी जो फ़िल्म देखता है तो ख़ुद हीरो बनजाता है. खुरदुरेपन का आशिक़. भाषा और सभ्यता के लिहाफ़ और हर तरह की चिकनाहट सेपरहेज़ बड़े होकर किसान बनेगा क़िस्से बोयेगा. फिलहाल उखाड़ रहा है, सियासत, सिनेमाऔर समाज के कहे-पढ़े क़िस्से, 'सौरभ से सवाल' कॉलम का कर्ता-धर्ता छकड़ी (ताश कागेम) और गाने वाली कविता के लिए पूरी रात जाग सकता है. लूडो में बेमंटी बर्दाश्तनहीं. डिंपल पड़ते हैं भाई साब के.--------------------------------------------------------------------------------# वाणी प्रकाशनवाणी प्रकाशन 55 वर्षों से 32 विधाओं से भी अधिक में, बेहतरीन हिंदी साहित्य काप्रकाशन कर रहा है. इसने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिकपुस्तकें प्रकाशित की हैं. वाणी प्रकाशन ने देश के 3,00,000 से भी अधिक गांव, 2,800कस्बे, 54 मुख्य नगर और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाईहै. वाणी प्रकाशन भारत की प्रमुख पुस्तकालय प्रणालियों, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका,ब्रिटेन और मध्य पूर्व, से भी जुड़ा हुआ है. वाणी प्रकाशन की सूची में, साहित्यअकादेमी से पुरस्कृत 32 पुस्तकें और लेखक, हिंदी में अनूदित 9 नोबेल पुरस्कारविजेता और 24 अन्य प्रमुख पुरस्कृत लेखक और पुस्तकें शामिल हैं. संस्था कोक्रमानुसार नेशनल लाइब्रेरी, स्वीडन, इंडोनेशियन लिटरेरी क्लब और रशियन सेंटर ऑफ़आर्ट कल्चर तथा पोलिश सरकार द्वारा इंडो-स्वीडिश, रशियन और पोलिश लिटरेरीसांस्कृतिक विनिमय विकसित करने का गौरव प्राप्त है. वाणी प्रकाशन ने 2008 मेंभारतीय प्रकाशकों के संघ द्वारा प्रतिष्ठित ‘गण्यमान्य प्रकाशक पुरस्कार’ भीप्राप्त किया है. लंदन में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा 25 मार्च 2017 को वातायनसम्मान तथा 28 मार्च 2017 को वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक व वाणी फॉउण्डेशन केचेयरमैन अरुण माहेश्वरी को ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में एक्सीलेंस अवार्डसे नवाज़ा गया. प्रकाशन की दुनिया में पहली बार हिंदी प्रकाशन को इन दो पुरस्कारोंसे सम्मानित किया गया है. हिंदी प्रकाशन के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना मानी जारही है. 3 मई 2017 को नई दिल्ली के ‘विज्ञान भवन’ में 64वें राष्ट्रीय फ़िल्मपुरस्कार समारोह में भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के कर-कमलोंद्वारा ‘स्वर्ण-कमल- 2016’ पुरस्कार ‘लता:सुर-गाथा’ पुस्तक बतौर प्रकाशक वाणीप्रकाशन को प्रदान किया गया. भारतीय परिदृश्य में प्रकाशन जगत की बदलती हुई जरूरतोंको ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने राजधानी के श्रेष्ठ पुस्तक केंद्र ऑक्सफोर्डबुकस्टोर के साथ मिलकर कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम-शृंखला की शुरुआत की है जिनमें‘हिंदी महोत्सव ’ उल्लेखनीय है.--------------------------------------------------------------------------------कार्यक्रम से सम्बन्धित विस्तृत जानकारी के लिए आप यहां पर ई-मेल करें :marketing@vaniprakashan.inया, वाणी प्रकाशन के इस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें : 09643331304--------------------------------------------------------------------------------'एक कहानी रोज़' में कहानियां यहां पढ़ें:याद एक अमरबेल है!'तुम किसको दीप जलाकर पथ दिखलाना चाहती हो'उसकी आवाज गूंजती है, जैसे लोहे की सांकल बजती है, जैसे ईमान बजता है!'उसके चेहरे पर पालक की कोमलता, हरी मिर्चों की खुशबू पुती थी'क्या हुआ जब मुसलमानों ने बकरीद को दीवाली की तरह मनाने का फैसला किया?'यही तुम अंग्रेजी की एम.ए. हो?'एक कहानी रोज़: 'मुगलों ने सल्तनत बख्श दी'--------------------------------------------------------------------------------Video देखें: केदारनाथ सिंह की 'बनारस':