इराक में मोसुल के पास वज़ीरा अपने बच्चे को चुप कराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिनवो चुप नहीं हो रहा, क्योंकि वो भूख से तड़प रहा है. लेकिन वज़ीरा उसे दूध नहींपिला सकतीं क्योंकि उनके स्तनों में दूध सूख चुका है और मोसुल के कैंप में दूध इतनामहंगा है कि वो खरीदने की स्थिति में नहीं हैं.वज़ीरा बताती हैं कि बच्चा जब से पैदा हुआ है, तब से रोता रहता है. वो तभी चुप होताहै, जब रोते-रोते थक जाता है. 24 साल की ये इराकी मां अपने बच्चे को धूप से बचानेके लिए सफेद कपड़े से ढककर रखती है. खाज़िर कैम्प में एक क्लीनिक के बाहर वो लाइनमें लगी हैं.अमेरिकन मेडिकल वॉलेंटियर, मोसुल के बाहर मरीजों को देखते हुएउसी लाइन में कुछ मीटर पीछे मारवा भी अपनी बच्ची को दिखाने के लिए अपनी बारी काइंतज़ार कर रही हैं. 25 साल की मारवा करीब दो हफ्ते पहले अपने परिवार के साथपश्चिमी मोसुल से भागी थीं. उस समय उनकी बच्ची 5 महीने की थी. वो भी अपनी बच्ची कोदूध नहीं पिला पा रही थीं क्योंकि उसके स्तनों में दूध नहीं था.वो बताती हैं, ''पिछले कई महीनों से मैं काफी परेशान हो चुकी हूं. इस दौरान मैं एकजगह से दूसरी जगह भटकती रही. मैं बीमार थी और इस स्थिति में नहीं थी कि बच्ची कोदूध पिला सकूं.''उत्तरी मोसुल में इराकी आर्मी का वाहनक्लीनिक में डॉक्टर के तौर पर तैनात नेशमील डिलर बताते हैं कि वो एक दिन में लगभग80 महिलाओं को देखते हैं. इनमें से लगभग 70 फीसदी महिलाएं अपने बच्चों को दूध पिलापाने की स्थिति में नहीं हैं और इनके बच्चे हमेशा भूख से रोते ही रहते हैं.डिलर ने कहा कि इनके स्तनों में दूध इसलिए सूख गया है क्योंकि तनाव और निराशा केकारण इनके अंदर तमाम तरह के साइकोलॉजिकल और हॉर्मोनल बदलाव हो गए हैं. इन्हें न हीशारीरिक आराम मिलता है और न ही पौष्टिक खाना. इस वजह से इनके स्तनों में दूध नहींबचा. एक मेडिकल चैरिटी संस्थान "डॉक्टर विदऑउट बॉर्डर" का कहना है कि वो विस्थापितहुए बच्चों पर मां का दूध न मिलने की वजह से पड़ने वाले प्रभावों पर रिसर्च कर रहेहैं.अक्टूबर में शुरू हुए मोसुल अभियान से लेकर अभी तक लगभग 8 लाख लोग विस्थापित होचुके हैं. इस एरिया में ISIS का लगभग तीन साल से कब्ज़ा है. इस एरिया से लोग भागरहे हैं, जिस कारण से उन लोगों का भविष्य काफी अनिश्चित हो गया है.एमएसएफ मेडिकल कॉर्डिनेटर का कहना है कि महिलाओं में न्यूट्रिशन की कमीब्रेस्टफीडिंग पर उतना असर नहीं डालती, जितना तनाव.इन क्षेत्रों में जिन बच्चों की मां दूध नहीं पिला पा रही हैं, उन बच्चों मेंकुपोषण कहीं ज़्यादा है. क्योंकि मोसुल के इस अशांत क्षेत्र में डिब्बे वाला दूध एकतो बड़ी मुश्किल से आ पाता है और जो आता भी है वो काफी महंगा है.हाल ही में यूएन चिल्ड्रेन फंड ने नोटिस किया कि जो बच्चे अपने क्षेत्रों सेविस्थापित हुए हैं, उनमें कुपोषण का प्रतिशत बढ़ा है. इस वजह से इस संस्था नेकुपोषण को कम करने के लिए मूंगफली से बने सप्लीमेंट्स बच्चों को देने शुरू कर दिएहैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःराशिद लतीफ ने गालियां दीं, तो सहवाग और मनोज तिवारी ने क्या कियागुजरात में शिक्षा और न्याय विभाग की क्या जरूरत, वहां तो सब तांत्रिक संभाल लेंगे!अगर आप भी सिगरेट और चाय उधार की पीते हैं तो ये पढ़िए!जिस धुन पर जनता को इमरान हाशमी दिखता था, उसमें पाक महीने का चांद कैसे देख लें?