The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • In Conversation with film writer, director anurag kashyap before Sahitya Aaj Tak

मैं कॉपी के पन्ने फाड़ कॉमिक्स बना बेच देता था : अनुराग कश्यप

पहली कविता मसाला दोसा पर लिखी और घर वालों को लगा, पगला गया है. और कुछ जानना है तो चले आएं साहित्य आज तक.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
सौरभ द्विवेदी
10 नवंबर 2016 (Updated: 9 नवंबर 2016, 04:56 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
12-13 नवंबर को दिल्ली में हो रहा है साहित्य आज तक. इस इवेंट में एंट्री फ्री है. बस रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. उसका लिंक इस आर्टिकल के आखिरी में मिलेगा. ये आर्टिकल है अनुराग कश्यप के बारे में. फिल्म डायरेक्टर हैं. किताबें विताबें खूब पढ़ते हैं. हमने पूछा. हमें भी बताओ. अपने हिस्से के साहित्य के बारे में. तो ये सब बोले.anurag kashyap

1. पहली किताब जो पढ़ी

फैजाबाद में रहते थे हम. 11 साल का था. तब क्राइम एंड पनिशमेंट पढ़ी थी. हिंदी में. उस दौर में रशियन लिटरेचर हिंदी में ट्रांसलेट होकर खूब आता था. फिर उस टाइम अन्ना कैरेनिना पढ़ा था. उसके बाद महाभारत. ये तो घर में ही रखी थीं. पूरा वॉल्यूम नहीं था, मगर बहुत छोटा भी नहीं था. रामायण भी पढ़ डाली. हिंदी की बात करूं तो जो पहली चीज पढ़ी वो था शरद जोशी का व्यंग्य, जीप में सवार इल्लियां. प्रेमचंद की कहानियों का संकलन मानसरोवर भी पूरा घोंट गया था.

2. सबसे पहले जो लिखा

मसाला दोसा पर पोएम लिखी थी. मम्मी पापा को सुनाई. वो मेरी शकल देख रहे थे कि इसे क्या हो गया है. ये सब काम 9-10 की उम्र में ही किए. फिर देहरादून के हिलग्रींस बोर्डिंग स्कूल में एक कॉमिक बुक ड्रॉ किया था. मुझे आज भी उसका टाइटल याद है- किम ह्यूज हो गए फ्यूज. एक वंडरमैन करके कैरेक्टर भी बनाया था. चार पन्ने की कॉमिक्स बनाकर बेचता था. नोटबुक की सेंटर पेज से पन्ने उखाड़ लेता था. कॉमिक्स के बदले बच्चे मुझे चॉकलेट देते थे. मजे की बात ये है कि मेरी भतीजी (दबंद के डाइरेक्टर अभिनव कश्यप की बेटी) भी यही करती है. कॉमिक्स बनाती है. प्रत्यांगिरा नाम है उसका. अभी कुछ ही दिन पहले उसने एथलेटिक्स में नेशनल जीता. 200 मीटर में.

3. साहित्य आज तक में क्या खास रहेगा

मुझे कुछ नहीं मालूम. सच में. जो मुझसे पूछा जाएगा, बक दूंगा. ऐसे ही तो करता आया हूं. पंगे तो बाद में पड़ते हैं.
साहित्य आज तक के कॉम्प्लिमेंट्री पास पाने के लिए यहां रजिस्टर करें. https://www.youtube.com/watch?v=EAYe4uX1p5g

ये भी पढ़ें

लल्लनटॉप कहानी लिखो और 1 लाख रुपए जीतो

दुनिया जिसे पढ़कर भूल जाती है, मैं उसे पहली बार पढ़ता हूं: रवीश कुमार

'आज जो भी लिखता हूं, नौजवानों के लिए लिखता हूं'

'लब पे आती है दुआ...' नज़्म ने इस शख्स को शायरी की सीढ़ियां चढ़ा दिया

Advertisement

Advertisement

()