वायु को उल्टा कर दें तो बन जाता है युवा. इरफान खान की हासिल पिक्चर. और नेताजी काकिरदार निभा रहे गौरी शंकर पाण्डेय यानि आशुतोष राणा का डायलॉग. वायु शब्द का उल्टायुवा. ऐसे ही थोड़ी ना कहते हैं जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है.युवा...हवा ही तो हैं. जिसे ना कोई बांध सकता है, ना कोई रोक सकता है, ना ही कोईकिसी खांचे में सीमित कर सकता है. बशर्ते युवा अपनी संगठित सोच की ताकत को पहचानले. आज से बहुत पहले एक युवा हुआ था, जिसने अपनी ताकत को बूझ लिया था. उस युवा नेकहा था - हम जो बोते हैं, वही काटते है, हम स्वयं के भाग्य निर्माता हैं. स्वामीविवेकानंद की इस बात को दिमाग में बैठा लीजिए. क्योंकि ना तो मूर्ति बनाने सेस्वामीविवेकानंद के विचार फलीभूत होंगे या नहीं जन्मजयंती पर एक ट्वीट या फेसबुकपोस्ट कर देने से. जो बोएंगे, वही काटेंगे. तो इस देश का युवा क्या बो रहा है, क्याकाटने जा रहा है और सरकारें उसे किस तरह की जमीन दे रही हैं. युवा दिवस पर यही हैलाख रुपए का सवाल. सरकार भी युवा दिवस मना रही है और युवा भी. मगर दोनों में फर्कहै, वो आगे पता भी चल जाएगा. यूं तो हिंदुस्तान बहुत पुरानी सभ्यताओं का मुल्क है,मगर उतना ही युवा भी है. जवानी और रवानी दोनों से भरपूर. आज से पूरे 159 साल पहलेसाल 1863 में तब के कलकत्ता शहर में विलक्षण प्रतिभा के धनी और आध्यात्म, संस्कृतिके ज्ञाता स्वामीविवेकानंद का जन्म हुआ . सिर्फ 39 साल इस दुनिया में रहे, मगरविचारों का ऐसा भंडार दे गए, जो सदियों तक हिंदुस्तान के लिए किसी रौशनदान की तरहखड़े रहेंगे. चुनाव और राजनीति की खबरों से इतर हमने बड़ी खबर में उस रौशनदान सेआने वाली रोशनी को आप तक पहुंचाने का फैसला किया. क्योंकि हमारे लिए देश का युवासबसे जरूरी विषय है. और सवाल ये कि दिन-दुपहरी-रात तक तक स्वामीविवेकानंद के कोट्सट्वीट कर युवा दिवस की बधाई देने वाले नेताओं को साल के बाकी दिनों में युवाओं कीयाद क्यों नहीं आती ? नेताओं से सवाल है तो कुछ युवाओं से भी है. आखिर इस देश कायुवा किस दिशा में जा रहा है, वो कहां खड़ा है, कर क्या रहा है और करना क्या चाहताहै ? सोशल मीडिया के राजनीतिक झगड़ों में फंस कर वक्त बर्बाद कर रहा है या फिर वाकईभविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है ? सवाल इसलिए क्योंकि आज की तारीख में भारत की 65फीसदी आबादी युवा है. यूरोप की औसत आयु 45 साल है जापान की 49 साल अमेरिका की 37साल चीन की 37 साल इन सबसे जवान है हमारा हिंदुस्तान, जिसकी औसत उम्र मात्र 28 सालहै यानि हिंदुस्तान चिर युवाओं का देश है. संभावनाओं का देश है. संकल्पों का देशहै. और स्वामी जी शिकागो में दिए अपने भाषण में अमेरिका वालों से कह आए थे कि ये20वीं सदी भले आपकी है, लेकिन 21वीं हमारी है. शायद युवाओं पर भरोसा था और इन्हींयुवाओं के दम पर प्रधानमंत्री मोदी भी दुनिया में देश का खम ठोंकते रहे हैं. आज भीकहा, पहले भी कई बार कह चुके हैं आज से 25 साल बाद जब आज़ादी के सौ साल होंगे और जोभी प्रधानमंत्री होगा वो जब झंडा रोहण करेंगे और अपने भाषण में जिन सिद्धियों कावर्णन करेंगे वो सिद्धि वही होगी जो आज देश संकल्प कर रहा है. प्रधानमंत्री मोदीकहते हैं कि देश के सपनों को पूरा करने से कोई बाधा रोक नहीं सकती, लेकिन हम कहतेहैं एक बाधा है जो ना सिर्फ रोक सकती है, बल्कि बड़ी परेशानी का सबब भी बन सकती है.और वो है बेरोजगारी. बेरोजगार युवा ना तो राष्ट्र का निर्माण कर सकता है और ना हीव्यक्तित्व का. क्योंकि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर जब युवाओं की बात होती हैतो वो ना केवल सुखी, समृद्ध और शक्तिशाली भारत की बात करते, बल्कि एक स्वाभिमानीराष्ट्र का स्वप्न देखते थे. और कोई भी राष्ट्र स्वाभिमानी तभी होगा जब हर हाथ मेंकाम हो और हर काम को हाथ. मगर हो क्या रहा है ? हो ये रहा है कि युवाओं की कतार भीदो तरह की हो चली है एक तरफ राजनीतिक पार्टियों के युवा हैं, दूसरी तरफ बेरोजगारोंकी फौज. हर पार्टी का अपना यूथ विंग है. भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा यूथकांग्रेस समाजवादी यूथ ब्रिगेड तृणमूल युवा कांग्रेस युवा राजद और इन्हीं के समकक्षखड़ा है अखिल भारतीय बेरोजगार संघ युवा हल्ला बोल राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघभारतीय बेरोजगार संघ बेरोजगार युवा संघ दोनों तरफ युवा खड़े हैं. एक तरफ राजनीति केरास्ते सत्ता में पहुंचने के लिए लालायित युवा तो दूसरी तरफ नेताओं के रोजगार केवादों पर जानिसार होकर उन्हें सत्ता में पहुंचाने वाले युवा. राजनीतिक पार्टियों सेजुड़े युवाओं को कभी ना कभी सत्ता मिल ही जाती है, सत्ता ना मिली तो कोई बड़ीमहत्ता वाली पोस्ट मिल जाती है. मगर सत्ता तक पहुंचाने वाले युवा सालों एड़ियांघिसने के बाद भी बेरोजगार रह जाते हैं. इधर और उधर के युवाओं में बड़े बेसिक फर्कहैं. राजनीति में 50-55 साल के नेता खुद को युवा कहते हैं और लाखों बेरोजार युवा,कोरोना काल में 2 साल बर्बाद होने पर, परीक्षा पात्रता के लिए कब ओवरएज हो गए, यानियुवा नहीं रहे, वो युवा नेताओं वाली सरकारों को पता पता ही नहीं चला. 11 जनवरी केही एपीसोड में हमने आपको बताया था कि देश में पिछले 5 सालों में बेरोजगारों की इतनीबड़ी फौज तैयार हो गई कि पूछिए मत. आंकड़ों ने सारी कहानी कह दी थी. और स्थिति येहै कि अगर देश के सारे बेरोजगार मिलकर अपनी पार्टी बना लें तो यकीं मानिए वो देशसबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और ये भी बड़ी बात नहीं कि वो जिसे चाहें प्रधानमंत्रीबना दें. मगर सबसे बड़ा सच तो ये है कि युवा....चुनाव में युवा कहां रहता है. वो तोअगल-अलग खांचों में, कभी जाति में, कभी धर्म में बंट जाता है. इस पर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष कहते हैं अगर बेरोजगार युवा एक हो जाए तो नेताओंको बेरोजगार कर दे उपेन यादव ने कहा आज युवा दिवस है लेकिन युवाओं के सामने सबसेबड़ी समस्या बेरोज़गारी है. आज के नेता युवाओं के नाम पर वोट मांगते हैं. सत्ता मेंभी आ जाते हैं लेकिन बेरोज़गारी को लेकर कोई इलाज नहीं निकालते. और जिस दिन युवा इसतरीके से वोट करने लगा. युवाओं की ताकत नेताओं को पता चल जाएगी और ताकत सही दिशामें लग भी जाएगी. मगर अब तक ऐसा हो नहीं पाया है. बेरोजगारों के साथ बेगारों कीकतार लंबी हो चली है. मगर नेताओं का हाल...कसमें वादे, प्यार वफा के, वादे हैंवादों का क्या...जैसा ही रह गया. खैर ! दूसरी बात ये कि नौकरी पाने की लालसा सेइतर अगर युवा इनोवेशन की दिशा में सोचने लगा तो हिंदुस्तान की तस्वीर और ताबीरदोनों बदल सकती है. और यही वो हिंदुस्तान है, जहां के युवाओं ने IT सेक्टर कीदुनिया में अपना लोहा मनवाया है. मल्टीनेशनल कंपनियों के CEO और बड़े स्टार्टअपखड़े करने वाले बिलेनियर्स भी हैं. मगर यहां भी स्वामीविवेकानंद की बात को याद करतेहुए चलना होगा. वो कहते थे - पवित्रता, धैर्य व दृढ़ता, सफलता के लिए ये तीनोंजरूरी हैं, लेकिन प्रेम इन सबके ऊपर है. और यहीं से प्रेम,सौहार्द और सही सोच केसाथ आगे बढ़ने वाले युवाओं और सोशल मीडिया के जरिए, नेताओं के बहवाके में और भड़काऊशो के फेर में फंसने वाले युवाओं के बीच का फर्क भी पता चलता है. हमारे पास युवाओंकी दो लिस्ट हैं. नोट कीजिएगा नाम - नीतिन कामथ (Zerodha) दिव्यांग तुरखिया(media.net) अमोद मालवीय (uddan) रिजो रविंद्रन (BYJU’S) सचिन बंसल (flipkart)रितेश अग्रवाल (Oravel Stays) कार्तिक गग्गर (Rajsthan studio) सानिया जेसवानी(Prekant teck) जैसे कामयाब और काबिल स्टार्टअप शुरू किए, सफलता के नए आयाम गढ़ेफिर हमारे सामने एक दूसरी लिस्ट आती है - मयंक रावत (buli bai) नीरज बिश्नोई (bulibai) विशाल कुमार झा (buli bai) श्वेता सिंह (Buli bai) ओमाकरेश्वर ठाकुर (SuliDeals) ये लोग भी टेक की दुनिया के नाम हैं. लेकिन इन्होंने अपनी ऊर्जा बुल्ली बाईऔर सुल्ली डील्स जैसे एप्स से नफरत और अश्लीलता का प्रचार करने में लगाई. पहली तरफकी कतार के युवाओं का रास्ता बुलंदी की ओर जाता है और दूसरी तरफ वालों का रास्ताजेल में. एक तरफ सही सोच वाले वो युवा हैं जिन्होंने ऐसे स्टार्टअप खड़े जो देश कीशान बन गए. आज करोड़ो-अरबों की पूंजी बना चुके हैं. दूसरी तरफ वो हैं जिनके दिमागमें जहालत और दुराव भरा है. दिमाग दोनों तरफ से ही लगाया गया, मगर एक सही दिशा मेंलगा, दूसरा गलत दिशा में. जिसके नतीजा सबके सामने है. इसलिए पढ़ाई लिखाई के साथज़रूरी है सही दिशा की भी. और इसके लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी हमारी सरकारों की है,जो युवाओं को सही प्लेटफॉर्म और सोच के माध्यम से आगे बढ़ाए और घृणा बढ़ाने वालीबातों और नफरती सोच पर लगाम लगाए. हिंदुस्तान में एक बहुत बड़ी वर्कफोर्स का देशहै. अगर सरकारों की नीतियां इस वर्कफोर्स के सही इस्तेमाल के लिए बनने लग जाएं तोवो दिन दूर नहीं, जब हम भी दुनिया के बाकी विकसित देशों के साथ खड़े हो जाएं. औरयुवाओं को भी ये समझना होगा कि सोशल मीडिया और टेक्नॉलजी वरदान भी है और अभिशाप भी.सही सोच के साथ इस्तेमाल करेंगे तो खेल. गलत किया तो जेल. सोशल मीडिया पर निठल्लाफकीरी से बेहतर है कि युवा अपनी उस उर्जा और समय को जरूरी चीजों में लगाएं. वैसे भीस्वामी विवेकानंद कहते थे..खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है तो खुद को कमजोरकभी मत समझिएगा. अपने हक-हुकूक की आवाज बुलंद करते रहिए. अपने अधिकारों के लिएलड़ते रहिए, लल्लटॉप आपकी आवाज उठाता रहेगा. क्योंकि बात इतनी सी है कि किस्मत परभरोसा करने वालों को उतना ही मिलता है, जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते हैं. अबगौर कीजिए सुर्खियों पर पहली सुर्खी में बात प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक मामलेकी. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने केलिए कहा था. आज कोर्ट ने कमेटी के सदस्यों के नाम भी बता दिए हैं. 1. कमेटी की अध्यक्षता करेंगी - सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस - इंदु मल्होत्रा. 2. उनके अलावा कमेटी में NIA के डायरेक्टर जनरल या उनके द्वारा नामित एक अधिकारी जो कि इंस्पेक्टर जनरल रैंक से नीचे का नहीं होगा, 3. चंडीगढ़ के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस यानी डीजीपी 4. पंजाब पुलिस ADGP (सुरक्षा) और 5. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार होंगे.इन नामों का ऐलान करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीचआरोप-प्रत्यारोप चल रहा है कि दोषी कौन है. ये कोई हल नहीं है. ऐसी स्थितियों सेमुकाबले के लिए एक मजबूत मेकेनिज़्म की जरूरत है. कोर्ट ने ये भी माना कि आगेभविष्य में इस तरह की चूक ना हो, इसके व्यवस्था बेहतर करने की जरूरत है. कोर्ट कीये टिप्पणियां हमें कानूनी मामलों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट लाइव लॉ से मिलीहैं. 5 जनवरी को जब प्रधानमंत्री पंजाब में एक रैली को संबोधित करने गए थे तबहुसैनीवाला इलाके में एक फ्लाईओवर के पास उनका काफिला प्रदर्शनकारियों की वजह सेरोकना पड़ा था. सुप्रीम कोर्ट में ये मामला 6 जनवरी को पहुंचा था, जब लॉयर्स वॉइसनाम के एनजीओ ने याचिका दायर कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.उसी याचिका पर चीफ जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस हिमा कोहली कीबेंच ने जांच कमेटी बनाई है. जो अब सुरक्षा चूक के पूरे मामले की जांच करेगी.सुरक्षा चूक मामले पर सियासत भी जारी है. जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना. केंद्र- राज्य और दोनों जगहों पर सत्ताधारी पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी कर रहीहैं. इस बीच एक स्टिंग ऑपरेशन भी चर्चा में है. इंडिया टुडे की एक स्पेशलइन्वेस्टीगेशन टीम ने फिरोज़पुर जाकर इस मामले की पड़ताल की और सुरक्षा के लिएजिम्मेदार अधिकारियों से बात की. CID के डीएसपी बोले- अफसरों को पूरी जानकारी दीथी, प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर जमीनी हकीकत जुटाने की जिम्मेदारी पंजाब केखुफिया विभाग यानी सीआईडी में डीएसपी सुखदेव सिंह की थी. इंडिया टुडे ने सुखदेवसिंह से पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री की प्रस्तावित रैली से पहले खुफिया विभाग कैसेचूक गया? क्या डीएसपी और उनके विभाग ने प्रधानमंत्री की रैली से पहले जमीनी हकीकतका आकलन नहीं किया था? इस पर सुखदेव सिंह के जवाब चौंकाने वाले थे. डीएसपी सुखदेवसिंह ने बताया कि संवेदनशील इलाके में प्रधानमंत्री की रैली से पहले उन्होंने एक-एकपल की जमीनी हकीकत अपने आला-अधिकारियों को वक्त रहते बताई थी. 2 जनवरी को उन्होंनेसाफ कर दिया था कि किसान यूनियन के नेता और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री मोदी का विरोधकरने के लिए सड़कों पर उतरेंगे. डीएसपी के अनुसार, उनकी टीम ने न सिर्फ पीएम केदौरे से पहले हर दिन की रिपोर्ट अपने आला-अधिकारियों को दी थी, बल्कि अफसरों कोसंभावित खतरे के बारे में भी कई बार चेताया था. तो अगर स्टिंग में कही बात के हिसाबसे तो प्रदर्शनकारियों की जानकारी पहले से पुलिस को पता थी. उसके बावजूद इतनी बड़ीचूक होना कई सवाल उठाता है. खैर, सारे सवालों का जवाब अब मिलेंगे सुप्रीम कोर्ट कीजांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही. बढ़ते हैं अगली सुर्खी की तरफ. दूसरी सुर्खीभी सुप्रीम कोर्ट से ही है. हरिद्वार की धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के मामलेमें आज सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस दिए हैं. इस मामले को भी वही बेंचदेख रही है जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक मामले में सुनवाई कर रही है. यानीचीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच. पत्रकारक़ुर्बान अली और पटना हाई कोर्ट से रिटायर्ड जज अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट मेंयाचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भड़ाकाऊ भाषण देने के मामले में दोएफआईआर हुई हैं लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई. इसलिए पूरे मामले की जांच के लिएनिष्पक्ष जांच कमेटी बनाई जाए. आज याचिकाकर्ता की तरफ से वकील कपिल सिब्बल ने कोर्टको बताया कि लगातार धर्म संसदों का आयोजन हो रहा है. 24 जनवरी को अलीगढ़ में धर्मसंसद है. उसके पहले कोर्ट सुनवाई करे. कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार को नोटिस भेजरहे हैं. और उसके बाद मामले को देखेंगे. कोर्ट ने 10 दिन में मामले की सुनवाई करनेके लिए कहा है. इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ये इजाज़त भी दे दी है कि वोअलीगढ़ में होने वाली धर्म संसद को रुकवाने के लिए स्थानीय प्रशासन के पास जा सकतेहैं. तीसरी सुर्खी में बात चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में चल रही सियासी जोड़तोड़की. योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और चारबीजेपी विधायकों के इस्तीफे के बाद अब राज्य के वन, पर्यावरण एवं जन्तु-उद्यानमंत्री दारा सिंह चौहान ने भी इस्तीफा दे दिया है. इस तरह के इस्तीफों में लिखने केलिए जो वजह लिखी जाती है, उसमें मोर्या ने कहा था कि पिछड़ों और दलितों के आरक्षणके साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे आहत होकर मैं उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल सेइस्तीफा देता हूं. मौर्य के बाद चार विधायकों- रोशनलाल वर्मा, बृजेश प्रजापति,भगवती सागर और विनय शाक्य ने भी इस्तीफा दे दिया था. अब दारा सिंह चौहान के इस्तीफेका नफा नुकसान समझिए. पूर्वांचल में चौहानों को नोनिया जाति के नाम से भी जानाजाता है. साल 2014 के बाद बड़ी तादाद में यह जाति बीजेपी के साथ जुड़ी थी और 2017में अमित शाह के ऑपरेशन ओबीसी के तहत दारा सिंह चौहान भी बसपा से बीजेपी में आए थे.लेकिन अब माना जा रहा है कि दारा सिंह चौहान भी स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ ही सपाका रुख कर सकते हैं. वैसे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा है कि दारा सिंहचौहान सपा में शामिल हो गए हैं. एक और बीजेपी विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी केइस्तीफे की खबर आई थी. लेकिन बाद में विधायक जी ट्विटर पर आकर कह दिया कि विपक्षीपार्टियों के दलाल किस्म के लोग लेटर पैड को स्कैन करके कूट रचित तरीके से गलतअफवाह फैला रहे हैं. माने, विधायक जी ने बता दिया कि वो अभी बीजेपी के साथ ही हैं.इन इस्तीफों से योगी आदित्यनाथ की मोर्चेबंदी टूटती दिख रही है. कैबिनेट मंत्री केपद से इस्तीफा देने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होगया है. एमपी एमएलए कोर्ट ने ये वारंट जारी कर 24 जनवरी तक पेश होने को कहा है.करीब सात साल पहले, जब मौर्या बीएसपी में थे, तब सुल्तानपुर में एक भाषण को लेकर उनपर केस दर्ज हुआ था. भाषण में मोर्या पर हिंदू देवी देवताओं के अपमान का आरोप लगाथा. अब उस मामले की गंभीरता को लेकर मौर्या को कोर्ट ने बुला लिया है.