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केजरीवाल सरकार ने ऐसा कर दिया कि दो घंटे से ज़्यादा बिजली जाएगी, तो कंपनी आपको हर्जाना देगी

दिल्ली में लागू की गई इस नई पॉलिसी को यहां समझिए डिटेल में.

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20 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 20 दिसंबर 2018, 01:47 PM IST)
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दिल्ली में बिजली कंपनियों की मनमानी काफी अरसे से चल रही थी. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार उन पर लगाम कस रहे हैं. सांकेतिक फोटो.
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साल 2011 से पहले यूपी में बिजली कटौती की हालत बहुत ज्यादा खराब थी. गांवों को छोड़ दीजिए यूपी के बड़े शहरों में भी जबरदस्त कटौती होती थी. आठ से 10 घंटे तक बिजली नहीं मिल पाती थी. लोगों को पता भी नहीं चल पाता था कि लाइट क्यों नहीं आ रही है. बिजली कंपनियां मनमानी किया करती थीं. मगर कोई सुनने वाला नहीं था. फिर यूपी इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (यूपीईआरसी) ने बिजली कंपनियों की नकेल कसनी शुरू की. फॉर्मूला अपनाया हर्जाने का. तय किया कि चार घंटे से ज्यादा बिजली कटौती होने पर कंज्यूमर्स को क्लेम दिलाया जाएगा. इसका असर ये हुआ कि आज यूपी में पावर कट काफी कम हो गया है.
अब दिल्ली भी यूपी की राह पर है. सूबे में दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) ने बिजली काटने पर हर्जाना तय कर दिया है. दिल्ली में बिना बताए बिजली काटे जाने पर बिजली कंपनियों को हर घंटे 50 रुपए का क्लेम लोगों को देना होगा. अघोषित बिजली कटौती 2 घंटे से ज्यादा होने पर 100 रुपए से प्रति घंटे के हिसाब से हर्जाना देना पड़ेगा. पूर्व घोषित होने के बाद भी12 घंटे से ज्यादा की कटौती होती है, तो भी कंपनियों को 50 रुपए घंटे के हिसाब से क्लेम भुगतना पड़ेगा. फिक्स हर्जाना न चुकाने की दशा में अगर उपभोक्ता क्लेम करेगा, तो कंपनियों पर हर्जाने की रकम 5,000 रुपए तक हो सकती है.
दिल्ली में बिजली के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को लगातार घेरता रहा है. सांकेतिक फोटो.
दिल्ली में बिजली के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को लगातार घेरता रहा है. सांकेतिक फोटो.

बिजली कटौती पर हर्जाना पाने के लिए उपभोक्ताओँ को दावा नहीं करना होगा. कंपनी बिजली के बिल में हर्जाने की रकम को एडजस्ट करेगी. कंपनियों को 90 दिनों के अंदर क्लेम के पैसे देने होंगे. मीटर जलने की स्थिति में कंपनी को 3 घंटे में बिजली सप्लाई चालू करने होगी. नहीं तो 50 रुपए घंटे के हिसाब से हर्जाना देना पड़ेगा.
क्या है हालत?
अभी दिल्ली के कई इलाकों में घंटों बिजली नहीं मिल पाती है. लोगों को बिजली न आने की वजह भी पता नहीं चल पाती है. बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां अपने हिसाब से काम करती हैं. कंज्यूमर शिकायत करते रहते हैं, मगर कोई सुनने वाला होता. इसकी वजह से विरोधी दल दिल्ली सरकार को लगातार घेरते रहे हैं. दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में धरना-प्रदर्शन भी होते रहे हैं. इस वजह से दिल्ली सरकार पर सुधार के  लिए ठोस कदम उठाने के लिए बहुत दबाव था. इसी के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने ये सुधार आगे बढ़ाए.
कहां करें शिकायत?
दिल्ली में ये पॉलिसी 18 दिसंबर से लागू की गई है. इस पॉलिसी के तहत उस एरिया में पॉवर कट की पूरी डिटेल बिल में देनी होगी. उपभोक्ता के संतुष्ट न होने की दशा में वो सीजीआरएफ में कर सकता है. बिजली कंपनियों को सिर्फ एक घंटे के भीतर पावर कट की समस्या को निपटाना होगा. उपभोक्ता इसकी शिकायत बिजली कंपनियों की वेबसाइट पर, कॉल सेंटर या एसएमएस करके कर सकते हैं. सभी उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर बिजली कंपनियों के पास रजिस्टर्ड हो चुके हैं. उसके जरिए कंपनियां उपभोक्ता की डिटेल निकाल लेंगी. जिस इलाके में बिजली कटौती होगी वहां के सभी उपभोक्ताओं को हर्जाना मिलेगा. लाइन ब्रेकडाउन, डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसफार्मर फेल होना, वोल्टेज वैरिएशन और दूसरे फॉल्ट होने की दशा में उपभोक्ता क्लेम पा सकते हैं. कई जगह डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को अपग्रेड किया जाना है. कटौती के हिसाब से हर्जाने का भुगतान होगा.


 
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