दीपिका पादुकोण शादी मटीरियल क्यों हैं?
रणवीर ने कहा वो अनुष्का का क़त्ल करेंगे. कटरीना संग हुक-अप करेंगे. और दीपिका से शादी.
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फोटो - thelallantop
तुमजोपत्नियों को अलग रखते होवेश्याओं सेऔर प्रेमिकाओं को अलग रखते होपत्नियों सेकितना आतंकित होते होजब स्त्री बेखौफ भटकती हैढूंढती हुई अपना व्यक्तित्वएक ही साथ वेश्याओं और पत्नियोंऔर प्रेमिकाओं में! - आलोकधन्वाएक सुपरहिट पिक्चर हुआ करती थी 'कुछ कुछ होता है'. देखी ही होगी. लव ट्रायंगल है. शाहरुख़ के पास अपने लिए 2 लड़कियां हैं. एक दोस्ती के लिए, अपने सारे राज शेयर करने के लिए. और एक शादी करने के लिए. जाहिर सी बात है शादी जिस लड़की से करनी है वो टॉमबॉय नहीं होगी. उसके लंबे बाल होंगे. और लड़कियों से कपड़े पहनती होगी और हर अर्थ में 'फेमिनिन' होगी. या आम भाषा में कहें तो 'मैरिज मटीरियल' होगी. फिल्म के दूसरे भाग में काजोल भी मैरिज मटीरियल बन जाती है. क्योंकि अब उसने नाखून बढ़ा लिए हैं, उनमें नेलपॉलिश लगा ली है. साड़ी पहनना सीख गई है ठीक उस तरीके से, जिसमें उसकी कमर का कर्व दिख सके. जब तक वो छोटे बालों में, बास्केट बॉल खेलती हुई, उछलती-कूदती घूमती है, वो मैरिज मटीरियल नहीं होती.
पर इसके लिए हम करण जौहर को माफ़ कर सकते हैं. आज भी टीवी पर 'कुछ कुछ होता है' आए तो मैं उसे देख लूंगी. क्योंकि वो दौर अलग था. एक टाइप की फिल्मों का दौर. एक टाइप के रोमैंस का दौर. जो पुरुष प्रधान होता था. करण जौहर आज खुद भी मानेंगे कि उनकी वो फिल्म उनके कम अनुभव का नतीजा थी.
लेकिन अगर हम कॉकटेल जैसी फिल्म देखें तो मालूम पड़ता है कि कई लोगों के सिनेमा ने इश्क के मामले में कोई तरक्की नहीं की है. फिल्म में दीपिका एक आउटगोइंग लड़की है. शराब पीती है, अपनी मर्जी से सेक्स करती है. वहीं डायना पेंटी सुबह उठकर पूजा करने वाली लड़कियों में से है. इसलिए सैफ अली खान को जब कैजुअल सेक्स करना होता है, तो दीपिका को चुनता है. और जब शादी कर के सेटल होना होता है तो डायना को. और तो और, प्लॉट ऐसा, कि सैफ अली खान के लायक बनने के लिए दीपिका भी डायना जैसी बनने की कोशिश करती है.
ये सिर्फ सिनेमा की बात नहीं है. ऐसा सिर्फ लड़कों ही नहीं, खुद लड़कियों का भी मानना होता है कि उनको शादी के पहले सारे शौक पूरे करने होंगे. शादी के बाद तो उन्हें पुरुष की इच्छा के अनुसार चलना होगा. इसलिए या तो प्यार और शादी वाली लड़कियां अलग-अलग मटीरियल होंगी. या शादी करने के लिए गर्लफ्रेंड वाली मटीरियल को खुद को बदलना पड़ेगा. ये जिद्दी, बिगड़ैल लड़कियां नहीं चलेंगी. ये दारू, सिगरेट पीने वाली लड़कियां नहीं चलेंगी. ये छोटे बालों, छोटे कपड़ों वाली लड़कियां नहीं चलेंगी. ये मनमानी करने वाली लड़की घर आ गई तो रोज मां से लड़ाई करेगी.
ये तो बस कुछ छोटी शर्तें हैं. गर्लफ्रेंड और शादी मटीरियल तय करने के लिए लोगों ने अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से लड़कियों को दो बड़े भागों में बांट रखा है.
ऐसी ही कोई शर्त होगी, जो कॉफ़ी विद करण में रणवीर सिंह ने दीपिका को 'शादी मटीरियल' कहा. उनको चॉइस दी गई कि उनके पास कटरीना, दीपिका और अनुष्का हों. और तीन ऑप्शन हों. क़त्ल, हुक-अप या शादी, तो किसको किसके लिए चुनेंगे. रणवीर ने कहा वो अनुष्का का क़त्ल कर देंगे. कटरीना के साथ हुक-अप करेंगे. और दीपिका से शादी कर लेंगे क्योंकि वो शादी मटीरियल है.
शादी मटीरियल माने घरेलू और आम भाषा में 'लड़की-लड़की टाइप्स लड़की.' जिसके ज्यादा बड़े सपने न हों. जो एडजस्टिंग हो. जो थोड़ी सीरियस सी हो. क्योंकि पत्नी को लोग 'जीवनसाथी' बनाना चाहते हैं. अपना 'पार्टनर इन क्राइम' नहीं. लोग पत्नी के साथ हाईकिंग, ट्रेकिंग, बंजी जंपिंग नहीं करना चाहते हैं. बल्कि उनके साथ लोन लेकर घर बनवाना चाहते हैं. पत्नी से सेक्स नहीं, बच्चे के लिए शादी करना चाहते हैं. सेक्स के लिए तो अलग मटीरियल मिल जाएगी न. क्लब में छोटी ड्रेस पहने कोई शराबी लड़की.
मुझे पिंक फिल्म का वो डायलॉग याद आ रहा है, जब अमिताभ बच्चन (दीपक सहगल का किरदार) राजवीर सिंह से कहता है - हम कितने कॉन्फिडेंट होते हैं कि हमारे घर की लड़कियां 'इस तरह' की नहीं होती हैं. हमारी घर की लड़कियां संस्कारी होती हैं. चरित्रहीन तो दूसरी लड़कियां होती हैं, जो क्लब जाती हैं, शराब पीती हैं, छोटे कपड़े पहनती हैं.
कहने का अर्थ ये न समझें कि रणवीर सिंह इतनी छोटी सोच के हैं कि हर छोटे कपड़े वाली लड़की को सेक्स के लिए उपलब्ध मानते होंगे. ये अलग बात है कि पिछले हफ्ते ही वो जैक एंड जोन्स के एक भद्दे सेक्सिस्ट विज्ञापन में देखे गए थे. खैर.
रणवीर जब किसी को शादी मटीरियल कहते हैं, वो भी लड़कियों को दो तरह के ग्रुप्स में बांट देते हैं. दीपिका को शादी मटीरियल कहने में जाने उनके मन में क्या अर्थ छिपा है, ये हम नहीं जानते. लेकिन जो भी अर्थ है, ये किसी औरत की तारीफ नहीं है.
लड़की को गर्लफ्रेंड और शादी मटीरियल बांटना असल में ये देखना है कि एक औरत मर्द की कसौटी पर कितनी खरी उतरती है. जैसे आदमी औरतों का रिपोर्ट कार्ड बनाने बैठे हों. उन्हें अलग-अलग ग्रेड में डालने के लिए बैठे हों. ऐसे में एक औरत से अपेक्षित होता है कि किसी मर्द से 'शादी मटीरियल' कहलाना तारीफ की तरह ले.
किसी भी लड़की को न किसी पुरुषवादी ग्रेडिंग की जरूरत थी, न है, न रहेगी.
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