सुबह सोकर उठी, फ़ोन देखा, एक म्यूजिक ऐप का नोटिफिकेशन पड़ा था. सुनिए लेटेस्ट हिटगाने. खोलने पर जिस गाने का लिंक आ रहा था, वो ये था:https://www.youtube.com/watch?v=kw4tT7SCmaY कोक स्टूडियो सीजन 9 का गीत 'आफरीन'.राहत और मोमीना की आवाज में. इसका ओरिजिनल नुसरत ने गाया है. नुसरत और राहत, दोनोंही पाकिस्तानी हैं. पिछले महीने की बात कर रही हूं. फेसबुक खोलने पर हर तीसरे बंदेने आफरीं-आफरीं का लिंक शेयर किया हुआ था. लोग मोमीना की मुस्कान और आवाज के पीछेपागल हो रहे थे. लोग इस गीत को डाउनलोड कर अपनी प्लेलिस्ट में लूप पर लगाने के पहलेये नहीं सोच रहे थे कि क्या वो अपने देश के साथ गद्दारी कर रहे हैं. ये गीत जावेदअख्तर ने लिखा है. वही जावेद अख्तर जिनसे किसी पाकिस्तानी पत्रकार ने उनकी देशभक्तिसे जुड़ा सवाल पूछा था, तो उन्होंने उसे ऑन-एयर तमाचा जड़ दिया था. वही जावेद अख्तरजिन्होंने स्वदेस के गीत लिखे. जिन्होंने राम भजन लिखा. जिन्होंने लगान के गीतलिखे. दोनों फिल्मों में गीतों में देशभक्ति पर्याप्त है. पर जावेद का ये एल्बमनुसरत से साथ आया था, जिसका नाम था 'संगम'. जावेद ने ये एल्बम एक पाकिस्तानी सिंगरके साथ क्यों किया, इसका जवाब करण जौहर के पास है. 'उस समय परिस्थितियां अलग थीं.'बीते दिनों करण जौहर का वीडियो आया. जिसमें वो देशवासियों के या यूं कहें किमहाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के सामने गिड़गिड़ा रहे थे. और परोक्ष तरीके से फिल्म मेंफवाद खान को लेने के लिए माफ़ी मांग रहे थे. हालांकि पूरे वीडियो में करण ने कहींपाकिस्तान को पाकिस्तान नहीं बोला. हर जगह पड़ोसी देश कहा है. पर हम सब जानते हैं किफवाद खान कहां से आते हैं. कुछ साथियों ने सोशल मीडिया पर कहा, ऐसा लगता है जैसेकिसी ने युद्ध के बंदियों या फिरौती के लिए किडनैप किए गए व्यक्ति का वीडियो रिलीजकिया है. हम इससे सहमत हुए. इस पर हंसे. कुछ इसलिए हंसे कि चलो MNS करण जौहर कोउनकी औकात याद दिला दी. कुछ इसलिए हंसे कि हथियार डालने वालों की फेहरिस्त में अबकरण जौहर का भी नाम जुड़ गया. कुछ इसलिए हंसे क्योंकि वो करण जौहर को देखकर बेवजहहंस पड़ते हैं. लेकिन इस हंसी को जन्म देने वाला ये वीडियो खतरनाक है. इसलिए नहीं किकरण जौहर देशभक्ति की हवा में देशभक्त हो गए. बल्कि इसलिए कि अपने किए के साथ खड़े नरह सके. अपने किए की माफ़ी मांगने वाले कमजोर नहीं होते. लेकिन जो अपने किए के साथखड़े नहीं रह सकते, वो कमजोर होते हैं. मैं वीडियो के बारे में ज्यादा नहीं कहूंगी.कहने वाले कह चुके हैं. लेकिन ये जरूर कहूंगी कि करण जौहर को अपनी देशभक्ति काप्रमाण देने की जरूरत नहीं थी. क्योंकि इसी देशभक्ति की वो खा रहे हैं. जी. इनकीसुपरहिट फ़िल्में देखिए. चाहे 'कभी ख़ुशी कभी ग़म हो' या 'कल हो न हो', लंदन से लेकरकैनेडा तक इन्होंने तिरंगा लहराया है. फॉरेन लोकेशन में बसे NRI, जो इनकी फिल्मोंका केंद्र रहे हैं, हमेशा देशभक्ति की बातें करते दिखे हैं. फॉरेन लड़कियों कोइन्होंने भरत नाट्यम नचाया है. फॉरेन बैकग्राउंड डांसर्स को लेकर इन्होंने ऋतिकरौशन के साथ 'वंदे मातरम्' पर थिरकवाया है.https://www.youtube.com/watch?v=eDBrF3yfZHE करण जौहर की फिल्म के सब्जेक्ट, एक यादो से ज्यादा बार देश और परदेस के बीच के स्ट्रगल के बीच फंसे दिखते हैं. करणविदेशों में इंडियन औरतों को करवाचौथ का व्रत करते दिखा चुके हैं. करण जौहर अपनेदेश से प्यार करते हैं, इसके प्रमाण की किसी को जरूरत हो न हो, कम से कम उन्हें खुदतो नहीं थी. उन्होंने 'ऐ दिल है मुश्किल' बनाई. उसमें फवाद खान को लिया. इसलिए नहींकि वो पड़ोसी देश से मित्रता बढ़ा रहे थे (जैसा कि वो कह रहे हैं कि जिन परिस्थितियोंमें फिल्म बनी, हमारा देश पड़ोसी देश से मित्रता बढ़ा रहा था). बल्कि इसलिए लियाक्योंकि फवाद खान इंडिया में पॉपुलर थे. अब भी पॉपुलर हैं. कोई भी सफल फ़िल्मकार अगरकिसी सफल एक्टर को लेकर फिल्म बनाना चाह रहा है, तो ये कोई बड़ा काम नहीं है. एकनैचुरल सा फैसला है. फवाद के पॉपुलर शो 'जिंदगी गुलज़ार है' को जितना पाकिस्तान मेंदेखा गया, उतना ही इंडिया में देखा गया. ये इंडिया वालों की गलती नहीं, चॉइस थी.फवाद को लेकर फिल्म बनाना करण की गलती नहीं, चॉइस थी. और इस चॉइस के साथ वो खड़ेहैं, खड़े रहेंगे, इसके लिए रोनी शक्ल बनाकर देशभक्ति का सर्टिफिकेट जारी करने कीजरूरत नहीं थी. फिल्म बनाना, एक्टिंग करना, कलाएं हैं. और जहां तक एक विकसित दिमागकी सोच जाती है, कलाओं की सीमा नहीं होती. राहत, मोमीना, आतिफ या शफ़क़त अच्छा गातेहैं. उनके गीत हमें पसंद हैं. हम उन्हें रोज सुनते हैं. एक-दो बार नहीं, लूप पर,बार-बार. ये गुनाह नहीं, चॉइस है. और किसी को पसंद करने के लिए किसी की इजाजत लेनेकी जरूरत नहीं होती. MNS की धमकी के बाद आप डर गए. या हो सकता है आप न डरे हों. आपआगे पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम करें, न करें, ये आपका फैसला है. लेकिन जब आपअपनी फिल्म में एक इंडियन एक्टर को न चुनकर दूसरे को चुनते हैं, क्या आप उसकावीडियो जारी करते हैं? नहीं करते. क्योंकि वो आपकी मर्जी होती है. जब आप वीडियो मेंदिखते हैं, आपके चेहरे पर मुझे अपराधबोध का भाव दिखता है.https://www.youtube.com/watch?v=CmvwguUw2Js आपकी देशभक्ति से मुझे तकलीफ़ नहीं है.हम अपनी पॉलिटिक्स खुद चुनते हैं. आपने भी चुनी है. लेकिन ये दलील न दें कि इसमें300 और लोगों की मेहनत लगी है. क्योंकि अगर आपको परवाह 300 लोगों की थी, तो कैमरेके सामने पूरी चौड़ में खड़े होकर कहते, ये फिल्म सिर्फ मेरी नहीं, 300 लोगों की है.और उन 300 लोगों के हक के लिए हम लड़ेंगे. क्योंकि हक की लड़ाई लड़ी जाती है. उसकी भीखनहीं मांगी जाती. करण जौहर ने मुझे निराश किया है. उनके ऐटीट्यूड ने मुझे निराशकिया है. क्योंकि मेरी नजर में उन्होंने अपनी कला के साथ अन्याय किया है. और उसपाकिस्तानी एक्टर के साथ अन्याय किया है, जिसने पूरी मेहनत और लगन से फिल्म मेंअपना किरदार किया होगा. मैं 'ऐ दिल है मुश्किल' की टिकट नहीं खरीदूंगी. फिल्म कोअपने ढाई घंटे नहीं दूंगी.