क्या असर होगा सिक्काबंदी का? ये जानने के लिए वैज्ञानिक टाइम मशीन बनाने में जुटेहैं. हताश होकर वे कहते हैं कि टाइम मशीन प्रैक्टिकली संभव नहीं है, जब तक कि कोईभविष्य से आकर हमें उसे बनाने की विधि न बता दे. (पैराडॉक्स – कोई भविष्य से आकरटाइम मशीन बनाने की विधि बताए, हम सीखें, एक टाइम मशीन बनाएं, और अपने आने वालीपीढ़ी को बताएं, फिर उसी पीढ़ी से कोई आए और हमें टाइम मशीन बनाना सिखाए. यानी बनाईकिसी ने नहीं और बन भी गई.) कोई नहीं जलाता, पर दीप जल रहे हैं! लेकिन फिर भी हमारेपास एक टाइम मशीन है, जो काफी हद तक कारगर है. नाम है – शब्द. और हम ‘आज’ इस टाइममशीन में बैठकर जानते हैं सिक्कों का ‘कल आज और कल’ क्या था, है और होगा. होने को‘आज’ जानने के लिए टाइम मशीन की जरूरत नहीं, ‘अख़बार’ और ‘कुमार’ काफी हैं. कुमार...रविश कुमार...--------------------------------------------------------------------------------भूतकाल का भोकाल (सिक्का चलता है)मुहावरा तो सुना होगा आपने कि – अपन का यहां सिक्का चलता है. ये मुहावरा - ‘सिक्काचलता है’ - आया कहां से ? दरअसल जब राजा लोग होते थे, या लोग राजा होते थे, तोसिक्कों में अपनी फोटो लगवाते/गुदवाते थे. नया राजा आता तो पुराने सिक्कों कोडी-मोनेटाईज़ कर देता और अपनी फोटो वाले नए सिक्के चलाता. यानी या तो आप राजा कोदेखकर ये गैस कर लेते थे कि जेब में पड़े सिक्कों में किसकी फोटो लगी है या फिर जेबमें पड़े सिक्कों को देखकर ये गैस कर लेते थे कि राजा कौन है? जो राजा उसका सिक्का.(ये बात बार्टर सिस्टम के बाद की और 9 नवंबर 2016 से पहले की है.) तो इस हिसाब से‘भाई का यहां सिक्का चलता है’ का मतलब हुआ ‘भाई यहां का राजा है’.--------------------------------------------------------------------------------वर्तमान ('नोट' कर लो)कुछ साल पहले की बात है. पच्चीस पैसे के सिक्कों को ‘आधिकारिक’ रूप से बाय-बाय बोलागया था. तब फिज़ाओं में इतना नॉस्टेल्जिया फैल गया था कि वायुमंडल में PM के बदलेPs. की बढ़ी हुई मात्रा से आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. अब है, साल दो हज़ारअठरा. यानी ‘देखो टू थाऊजेंट ज़माना आ गया’ वाले गाने को 18 साल और ‘देखो टू थाऊजेंटका नोट आ गया’ वाली बात को 1 साल हो चुका. अब राजा महाराज तो रहे नहीं, कांग्रेसलास्ट थी. राजा का करिश्मा कपूर के सॉन्ग ने तद्भव बना कर रज्जा कर दिया और सिक्कोंका सॉन्ग डाईनेस्टी ने कागज़ बना कर नोट कर दिया. न न, रुकिए! सिक्कों का सिक्का तोअब भी चलता है. तो क्या हुआ अगर भिखारियों ने अस्थाई सिक्का-बंदी कर दी हो, तो क्याहुआ अगर दस के सिक्के को लेकर लोग दस तरह की बातें कर रहे हों, तो क्या हुआ अगरलास्ट टाइम सिक्का आपने दहेज वाले लिफाफे में चिपका देखा था? लेकिन उसका अस्तित्वतो है न? मैं एक सिक्का हूं मेरा कोई वज़ूद तो है, हुआ करे जो RBI मेरी तलाश में है.जब-जब मधुबाला-किशोर के बीच के रिश्ते की बात होगी, सिक्कों की बात होगी, जब जबरिश्ते की बात होगी सिक्कों की बात होगी, और जब-जब कोई भी बात होगी सिक्कों की बातहोगी. क्या हो अगर सिक्के पूरी तरह से बंद हो जाएं? यकीन कीजिए ये मानव सभ्यता केसाथ घटने वाली दूसरी सबसे बुरी घटना होगी. पहली तो ऑफ़ कोर्स 'केआरके खान' ही है!--------------------------------------------------------------------------------भविष्य (तब इसको 'कॉइन' पूछेगा?)Prepare for the worst you will always get an excellent result. यानी बुरे-से-बुरेके लिए तैयार रहो, हमेशा बेहतरीन रिज़ल्ट मिलेगा. तो इसका पूरी तरह से अनुसरण करतेहुए हमने लिस्ट बनाई है मानव विकास के उन-उन विषयों की जो सिक्का-बंदी से प्रभावितहोंगी. आप लोग अपने-अपने स्तर पर प्रेपरेशन कर लीजिए. मेरा क्या है, मैंने तोमुहब्बत की है! # समाज 'सब ठाठ धरा रह जाएगा' की तर्ज़ पर 'व्यवहार लिखवाने' मेंकितने पचास, सौ, पांच सौ, हज़ार के नोट व्यवहार में आए और चले गए. मगर एक चीज़ है जोबनी हुई है – लिफाफे के ऊपर चिपका हुआ वो एक रुपए का चमचमाता सिक्का. वही हरव्यवहार को प्यार में और दोस्त को रिश्तेदार में बदलता था. वो न रहेगा तो इस पूरेसमाज का ढांचा ऐसे गिर पड़ेगा जैसे एक के ऊपर एक रखे एक-एक रूपये के सिक्के गिर पड़तेहैं. # धर्म त्रिवेणी इलाहाबाद में है और त्रेवी इटली में. दोनों के बीच सोनियागांधी के आलावा एक और चीज़ कॉमन. दोनों में से किसी भी जगह सिक्के डालो, मन चाहीमुराद पूरी होगी. और यदि मुराद पूरी नहीं हुई तो यकीनन आपके सिक्के खोटे होंगे यामन में कोई खोट होगा. ऐसे ही कोई त्रेवी फव्वारे में हर साल 120 लाख यूरो मूल्य केसिक्के निकाले जाते हैं. और भारत में - न डाले जाने का हिसाब, न निकाले जाने का.तो, निश्चित है कि जब भी सिक्का बंदी होगी तो नोटबंदी की तरह 99% धन तो वापस नहींही आएगा. हां अगर RBI अच्छे गोताखोरों को हायर कर ले तो बात कुछ और है. और धर्म केऊपर सिक्काबंदी का असर 'गंगा-आरती' तक सीमित नहीं. भिक्षुकों को दान देने से लेकर,कंजक पूजने तक में सिक्काबंदी का प्रतिकूल असर होगा. # अर्थ 2017 की इंडिया टुडेलिस्ट में भारत के पचास सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक थे सिक्का. पिछले साल अगस्त18 को जब सिक्का ने रिज़ाइन किया था तो इनफ़ोसिस के शेयर तो छोड़िये पूरा सेंसेक्स 200अंक गिर गया था. सिक्का बोले तो विशाल सिक्का. तो ये एक 'सिक्का-बंदी' तो हो हीचुकी है पिछले साल. उनकी जगह नंदन नीलेकणि हैं अब एमडी. # प्रोफेशन सिक्काबंदी सेयदि किसी को सबसे तगड़ा झटका लगेगा तो वो लगेगा 'सरकार' को! सरकार बोले तो जादूगरकम्यूनिटी. माचिस, कबूतर और ताश के पत्तों के साथ-साथ जो सबसे अधिक यूज़ किया जानेवाली प्रोप है वो है - सिक्का. और सिक्के जब गायब होते हैं, या एक के दो हो जातेहैं तो उन सिक्कों की चमक से दर्शकों की आंखें चमकती हैं. इसे ही तो जादूगरी का'ऑर्गेज्म' कहते थे वे. अब इस पूरे प्रोफेशन में सिक्केबंदी का खतरा मंडरा रहा है.# एजुकेशन आप कहेंगे कि सिक्का न हुआ तो क्या गुल्लक में हम नोट डाल लेंगे. मगर येतो वही बात हो गई कि रेनोल्ड्स के पेन से जूडा बांध लिया. मतलब गुल्लक का परपज़ हीडिसिव हो गया न फिर तो. पिगी बैंक को हिला के देखने में और 'अनुमानों' में पचाससिक्कों को सौ कर देने में जो आनंद है वो नोटों में कहां. बैकग्राउंड इफेक्ट कामहत्त्व हर फ़िल्म निर्माता जानता है, और यही वो इफेक्ट है जो गुल्लक में पड़ेसिक्कों की खनखनाहट से उत्पन्न होता है. ये पार्श्वध्वनी न होगी तो बच्चों को 'बचत'करने के लिए मिलने वाला मोटिवेशन खत्म समझो. और नैतिक शिक्षा के लिए ज़रुरी हैमोटिवेशन. नैतिक शिक्षा में घूस तो चल नहीं सकती, इसलिए एक मात्र संबल ये मोटिवेशन.यानी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएगी सिक्काबंदी. # साहित्य रॉयल्टी नामबड़ा रॉयल है लेकिन है बड़ी 'हिंदी-चोर' या 'चिंदी-चोर' टाइप चीज़. आप सबको ये सब मज़ाकलग रहा होगा लेकिन एक हिंदी लेखक से पूछिए इस सिक्केबंदी के दर्द को. इसी यानिसिक्कों और चिल्लरों वाले फॉर्मेट में ही तो उन्हें उनका पारिश्रमिक मिलता है. ये नरहा तो लेखक कहां जाएगा. हॉकी का फॉर्मेट बदला तो भारत और पाकिस्तान इस खेल सेऑलमोस्ट लुप्त हो गए. रॉयल्टी का फॉर्मेट बदलेगा तो पहले से ही 'रेड लिस्टेड' येहिंदी कम्युनिटी 'डोडो' हो जाएगी. और न रहेगा बांस न मरेगा सांप. (मुहावरा छोड़िएसेव टाइगर्स की तर्ज़ पर सेव राइटर्स मुहीम शुरू कीजिए). # खेल और फ़िल्म यदि कोईनया रामगोपाल वर्मा, शोले जैसी फिल्मों का रीमेक बनाना चाहेगा तो सिक्के के बदलेक्या नोट हवा में उछालेगा? और उधर क्रिकेट में टॉस के बदले यदि बटन का यूज़ कियाजाएगा तो पता चला भारत-ऑस्ट्रेलिया वाले क्रिकेट मैच में भाजपा जीत गई. यानी,सिक्काबंदी के बाद जय-वीरू क्या करेंगे और शोएब-वीरू क्या कहेंगे? # स्वास्थ्यदुनिया में कोई भी चीज़ ऐसी नहीं जो एक औषधि न हो. सिक्कों को वाटर प्यूरीफायर मेंडालने वालों से पूछो कि कितने लाभ हैं इसके. बाकी गंगा आज तक पवित्र और पीने योग्यबनी हुई है तो इसी सिक्के की महिमा के चलते. # म्यूजिक सिक्के नहीं होंगे तो पैसेनहीं होंगे, केवल रूपये होंगे. पैसे तो जब भी आते हैं सिक्कों के रूप में ही आतेहैं. तो तब, 'क्यूं पैसा-पैसा करती है','गोल-गोल सिक्के का पहिया चला', 'बदलेरुपैय्या के दे न चवनियां','पांच रुपैय्या, बारह आना' जैसे लाखों गानों की एकभरी-पूरी संपदा नष्ट होने की कगार पर होगी.--------------------------------------------------------------------------------उपसंहार (PS.)कॉइन-कॉइन चाहिए! होने को सरकार या किसी भी संबंधित संस्था की ऐसी कोई मंशा नहींहै. लेकिन अगर ऐसा (सिक्काबंदी जैसा कुछ) हुआ तो क्या होगा, यही पोस्ट-एपोक्लेप्सयानि क़यामत के बाद की स्थिती हमने समझने की कोशिश की है इस पोस्ट के माध्यम से.क्यूंकि दोस्तों, सिक्का, सिक्का नहीं है, एक समाज है, एक अवधारणा है, एक क्रांतिहै, एक संस्कार है. एक लंबी चौड़ी पोस्ट है, पूरे 1,436 शब्दों की!-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें: वीडियो: देखिए हिटमैन रोहित शर्मा की साउथ अफ्रीका में क्या तैयारीहै अकेली औरत के हज जाने वाले नियम पर PM मोदी सही हैं या ओवैसी? क्या 100 करोड़रुपए में बिका ‘आप’ का राज्यसभा टिकट? इंडिया में पैदा हुए वो 5 बच्चे जो आगे चलकरइंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेले