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वो डायरेक्टर, जिसने सेल्समैन की नौकरी के दूसरे महीने सैलरी से 200 गुना ज्यादा पैसे कमाए

17 साल में महज़ 5 फ़िल्में! ऐसा क्या बनाता है ये डायरेक्टर?

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7 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 14 अक्तूबर 2017, 02:38 PM IST)
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बॉलीवुड में दो तरह की फ़िल्में बनती हैं- मास और क्लास. लेकिन एक डायरेक्टर हैं, जिनकी फ़िल्में दोनों ही खांचे में फिट हो जाती हैं. उनका नाम है राकेश ओम प्रकाश मेहरा. 17 साल पहले उनकी पहली पिक्चर आई थी 'अक्स'. लेकिन आज 17 साल बाद उनके खाते में महज 5 फ़िल्में हैं. ये थोड़ा अजीब नहीं है! बेशक नहीं, क्योंकि राकेश ने पैसों के लिए क्वॉलिटी से समझौता मुनासिब नहीं समझा. लेकिन उनकी बनाई जो भी फ़िल्में हैं, वो अपने आप में कमाल हैं. चाहे वो 'रंग दे बसंती' हो, 'दिल्ली-6' हो 'भाग मिल्खा भाग' हो या फिर उनकी आखिरी फिल्म हो 'मिर्ज्या'. सभी फिल्मों में आपको उनकी मेहनत और शिद्दत साफ़ नज़र आएगी. आज के दिन उनका जन्मदिन होता है. इस मौके पर हम लाए हैं उनकी जिंदगी से जुड़े सबसे मजेदार किस्से: #1. राकेश अपने करियर की शुरुआत में एक सेल्समैन थे. वो यूरेका फोर्ब्स के लिए वैक्यूम क्लीनर बेचते थे. इसके लिए उन्हें हर महीने 418 रुपये मिलते थे और कमीशन अलग से. पहले महीने में राकेश एक भी क्लीनर नहीं बेच सके और उन्हें मात्र 418 रुपये मिले. लेकिन अगले महीने उन्होंने इतने क्लीनर बेचे कि उन्हें कमीशन के तौर पर 80 हज़ार रुपये मिले. उन्होंने खुद बताया कि उन्हें घर-घर जाकर क्लीनर बेचने में बहुत मेहनत लगती थी इसलिए उन्होंने क्लीनर्स को रेलवे और टेंटवालों को थोक भाव में बेच दिया. जिससे उनके क्लीनर्स भी बिक गए और टाइम के साथ-साथ मेहनत भी बच गई. #2. राकेश ने ये नौकरी तीन महीने के बाद छोड़ दी और एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी में काम करने लगे. यहां भी इनका काम कुछ अच्छा नहीं चल रहा था, नौबत नौकरी जाने तक पहुंच गई थी. लेकिन बॉस ने आखिरी मौका दिया और 30,000 रुपये के बजट में एक ऐड फिल्म बनाने को कहा. वो ऐड फिल्म बनकर तैयार हुई और सबकी उम्मीदों से परे वो फिल्म कंपनी के क्लाइंट को इतनी पसंद आई कि वो उसे टीवी पर दिखाना चाहते थे. इसके बाद राकेश की डिमांड बढ़ गई और उन्हें बेलटेक टेलीविज़न के लिए एक ऐड फिल्म बनाने का ऑफर मिला. यहां उन्हें पहली बार लगा कि वो भी फ़िल्में बना सकते हैं. और इसी सपने को लिए वो एक दिन सपनों की नगरी मुंबई पहुंच गए. #3. एक बार उन्हें एक ऐड फिल्म में प्रहलाद कक्कड़ को असिस्ट करना था. लेकिन दुर्भाग्यवश प्रहलाद बीमार होने की वजह से शूटिंग पर नहीं पहुंच सके. वो ऐड फिल्म राकेश मेहरा ने डायरेक्ट की. ये फिल्म प्रहलाद को इतनी पसंद आई कि उन्होंने राकेश को मुंबई आने न्योता दे दिया और ये भी कहा कि जब तक उनका कुछ हो नहीं जाता, तब तक वो उनके ऑफिस में रह सकते हैं. जब राकेश मेहरा मुंबई गए तो उन्हीं के ऑफिस में रहते थे. #4. प्रहलाद कक्कड़ के ऑफिस में ही भारती नाम की एक लड़की काम करती थी. वहां रहने के दौरान राकेश को उनसे प्यार हो गया. 2 साल तक उन्होंने भारती को कुछ भी नहीं बताया. लेकिन जब गोवा में भारती का एक्सीडेंट हो गया, तब राकेश उनसे मिले बिना नहीं रह पाए. उन्होंने गोवा में भारती से मिलने के दौरान अपने दिल की बात कही और भारती ने भी हां कर दी. राकेश की फिल्मों की एडिटिंग भारती ही करती हैं.   अपनी पत्नी के साथ राकेश मेहरा अपनी पत्नी के साथ राकेश मेहरा   #5. राकेश को शुरू से ही खेल-कूद में खास रुचि थी. वो तैराकी, क्रिकेट और क्लाइम्बिंग करते थे. स्विमिंग में तो वो 82वें एशियाई खेलों के सिलेक्शन कैंप में भी शामिल थे. लेकिन वो फाइनल राउंड तक नहीं पहुंच सके. क्लाइम्बिंग में भी उन्होंने हिमालय के तकरीबन सभी हिस्सों में चढ़ाई की है. #6. राकेश मेहरा ने अपनी पहली फिल्म में अमिताभ बच्चन को कास्ट किया था. इसके पीछे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. बच्चन साहब राकेश के साथ बीपीएल के लिए एक ऐड फिल्म में काम कर चुके थे. बावजूद इसके राकेश अमिताभ के पास जाने से कतरा रहे थे. लेकिन जब उन्होंने जाकर अपनी कहानी सुनाई, तो अमिताभ ने फिल्म के लिए फटाक से हां कर दी. ये फिल्म 'अक्स' बनी और रिलीज़ भी हुई लेकिन दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आई.


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