मखाने, मयखाने कितना मिलता जुलता नाम है, लेकिन दोनों ही बहुत अलग हैं. मखाने घरआते हैं तो मयखाने में लोग जाते हैं. मयखाने का जिक्र इसलिए कर दिया, क्योंकि मैंमखाने को मयखाने कह जाता था. लेकिन बात हम यहां सिर्फ मखाने की कर रहे हैं, इसलिएमयखाने का नाम सुनके ज्यादा दिमाग न लड़ाओ. मखाने तो खूब खाए होंगे. हो सकता है खीरभी खाई हो. ड्राई फ्रूट में शुमार होता है इसका. पोपकॉर्न जैसे सफ़ेद रंग के मखानेके बारे में कभी सोचा है ये बनता कैसे है. नहीं पता तो जान लो कैसे कड़े काले बीजसफ़ेद मुलायम मखाने बन जाते हैं. एक पौधा होता है. अब पौधे का नाम सुनके ये मत सोचनेलगना ये उसपर ही आते होंगे. तो ये जो पौधा होता है वो पानी में होता है. पानी कीउपरी सतह पर इसका पत्ता फैला रहता है. पानी में उसकी जड़ें होती है. पत्ते और जड़ केबीच में होता है डंठल. डंठल समझते हो अरे वही जिसे स्टेम ये तना बोलते हैं. पूरापौधा कांटेदार होता है. इस पौधे की जड़ नारियल के जैसी दिखाई पड़ती है. लेकिन होतीबहुत सॉफ्ट है. जड़ में तक़रीबन तीस से चालीस छोटे-छोटे बीज होते हैं. ये बीज काफीसख्त होते हैं. लोग इन पौधों को पानी से जड़ समेत निकालते हैं. और उन पौधों की जड़ सेबीजों को अलग किया जाता है. अब इन बीजों को 'कोई मिल गया' के जादू की तरह धूप चाहिएहोती है. धूप मिलने के बाद ऐसे चार्ज होते हैं कि बीज कड़े होते हो जाते हैं. इसकेबाद तेज़ आंच पर बीजों को लोहे की बड़ी-बड़ी कढ़ाही में फ्राई किया जाता है. और फिर45-72 घंटों के लिए थालों में भरकर रख दिया जाता है. इसके बाद ये कड़े बीज सॉफ्ट होजाते हैं. बीजों को मखाने में बदलना भी एक कलाकारी है. जोकि एक पेशेवर मलाह ही करसकता है. कढ़ाही में फ्राईहो रहे बीजों को हाथ से उठाकर पक्की जगह पर रखकर लकड़ी सेपीटा जाता है. इस तरह गर्म बीजों का कड़क खोल तेजी से फटता है. और उसमें सेपोपकॉर्न जैसा मखाना बाहर निकल आता है. मखाने की कई तरह की रेसेपी तैयार जो होनेलगी हैं उस वजह से इसकी डिमांड भी बढ़ गई है. अब ये मत सोचना मखाना सिर्फ तू ही खातेहो. दुनियाभर में आइटम तैयार होते हैं इससे. खीर, दलिया, सेवई, मिठाई, नमकीन की तोबात ही क्या करना, इसका इस्तेमाल तो चिकन से लेकर बिरयानी तक में होता है. इसेमसाले के साथ घी में फ्राई कर लो मजा आ जाता है. यह इतना टेस्टी होता है कि मखानेका लोग स्कूली बच्चों के लिए पास्ता भी बनाते हैं. इससे अरारोट भी बनता है. अगर खीरबन जाए तो मियां बात ही क्या है. वाह! क्या लज़ीज़ जायका होता है. उम्म नम्म नम्म..दरभंगा में नेशनल रिसर्च इंस्टिट्यूट के हिसाब से देश का 80 पर्सेंट मखाना बिहार केमिथिलांचल से आता है.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी द लल्लनटॉप से जुड़े आदित्य प्रकाश ने की है