कार्बनकाल में मोहब्बत धुआं हो गई
बाहर मुंडी निकालकर देखो. ये स्मॉग जिंदगी से ज्यादा प्यार के लिए घातक है.
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फोटो - thelallantop
देखो मेरा क्वेस्चन वो नहीं है जो वायरल हो रहा है. बागों में बहार है? न, बिल्कुल नहीं. ये सवाल मैं पूछ लूं तो कान उखाड़ के धूप में सुखा लेना. फिर बरनी में भरकर अचार डाल लेना. मेरा सवाल दूसरा है. तुमको किसी से प्यार है? तो कैसे करोगे? बाहर निकले? मौसम देखा? इस माहौल में प्यार कैसे परवान चढ़ेगा? धुंध देख रहे हो?
संडे की रिपोर्ट में डॉक्टर लोग और हवा खराब कर दिए हैं. बाहर की नहीं, हमारे अंदर की. सेक्शुअल लाइफ टोटली झंड हो जाएगी इस पॉल्यूशन से. अब बताओ. क्या होगा मोहब्बत का. "मेरा प्यार मन का है जानू. मैं तुम्हें उस नजर से नहीं देखता." ये झुट्ठई की चाशनी में डूबा डायलॉग मारने वालों के तो अच्छे दिन आ जाएंगे. क्योंकि अगला मन वाला प्यार करने लायक ही रह जाएगा.
मोहब्बत में फ्लेवर का फैशन भी है आजकल. एडल्ट लोग ये बात पकड़ लिए होंगे. तो वक्त आ गया है. नए नए फ्लेवर में मुंह के मास्क मार्केट में आएंगे. तुम पतंजली का आयुर्वेदिक मास्क पहनकर जाओ. पुदीना फ्लेवर वाला. क्योंकि तुमको मेक इन इंडिया आगे ले जाना है. लेकिन प्रेमिका फैशन कॉन्शस है. उसे पुदीना फ्लेवर सूंघकर उबकाई आने लगती है. तो प्यार में चोट और कान पर कंटाप एक साथ खाओगे. पहले उसका फ्लेवर पूछ के जाना.
प्यार में बौराए जोड़े क्या चाहते हैं? साथ बिताने को ढेर सारा वक्त और ऐसी जगह जहां कोई पहचाने न. पार्क में जाना बेकार है. क्योंकि वहां प्यार नहीं स्मॉग की मार होगी. पिच्चर देखने जाएगा जोड़ा. लेकिन ये धुंध पूरी पिच्चर पर करण जौहर फेर देगी. ये 20 फिट दूरी से ऐ दिल है मुश्किल देखेंगे, परदे पर शिवाय दिखाई देगी.
ये बात तो तुम भी मानोगे गंगा में उतरकर. कि प्यार न सलीम अनारकली के जमाने में मुश्किल था. न हीर रांझा के जमाने में. खुदा का लाख लाख शुक्र है कि मजनू के ऊपर पत्थर पड़े थे. स्मॉग पड़ता तो बेचारा खांस खांसकर मर जाता. बाहर मौसम ऐसा हो रहा है कि शोले आज बनती तो वीरू बसंती के प्यार का दुश्मन गब्बर नहीं, स्मॉग होता.
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