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बॉस से डांट खाने के बाद इस आदमी ने अपनी डायरी लिखी है

"पहले बॉस का कॉल आने पर वो अपनी सीट पर एकदम सीधा बैठ जाता था लेकिन वो आज लेटे-लेटे ही बॉस को निपटा रहा था."

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21 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 21 सितंबर 2017, 02:13 PM IST)
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उसको एक दिन न जाने क्या लगा कि वो दोपहर में ही ऑफिस छोड़कर घर आ गया. रास्ते में बॉस का एक फोन आया. वो उनकी बात बड़े ध्यान से सुन रहा था. जैसे ही उनकी बात खत्म हुई तो उसकी आंख के किनारे एक आंसू टपक कर हथेली पर गिर गया. ऑफिस से निकलने के बीस मिनट पहले ही उसके बॉस ने उसे इतना हड़काया कि वो कुछ कह ही नहीं सका. बस "यस सर!" "यस सर!" कह कर फोन पर कही गई बातें सुनता रहा. अपने फ्लैट में घुसते ही उसने जूते उतारे. कपड़े बदले. केवल बनियान और हाफ पैंट पहन लिया. वो रोज केप्री या फुल पजामा पहनता था लेकिन आज हाफ़ पहन कर बैठा था. वो रोज बढ़िया प्रिंटेड टीशर्ट या जॉकी की स्पोर्ट्स वाली बनियान पहनता था. लेकिन आज उसने पुराने कपड़ों में से अपनी सफेद वाली सैंडो बनियान निकाली. जो वो नौकरी लगने से पहले पहना करता था. मुंह हाथ धोने के बाद वो रसोई में गया. फ्रिज में से छाछ निकाला. उसमें मसाला वाला तड़का लगाया. उसने दो प्याज काटे. कल रात की बासी रोटी को चूरकर छाछ में डाल दिया. प्लेट लेकर वो रोज की तरह टेबल पर खाने की जगह आज जमीन पर बैठ कर हाथ से खाने लगा. उंगली चाट-चाट कर खा रहा था. वो आज हर उस एक चीज का अहसास कर लेना चाहता था जो उसकी मां उसके लिये बचपन में हर दोपहर करती थी. मां के साथ उसे सुरक्षा का जो अहसास होता था वो उसे फिर से पा लेना चाहता था. वो हर एक चीज एकदम वैसी ही रीक्रियेट करना चाह रहा था जैसा तब हुआ करता था. खाना खाने के बाद वो उठकर प्लेट रसोई में रख आया और वापसी में एक चटाई ले आया. उसने चटाई वहीं ड्राईंग रूम में बिछा दी. उसकी मां ऐसे ही उसके लिये दोपहर में ज़मीन पर चटाई बिछा दिया करती थी. वो ऐसे ही सो जाया करता था. चटाई के साथ वो दो तकिया भी ले आया. एक खुद के लिये, एक अपनी मां के लिये. आज वो अपनी मां के साथ जीने की कोशिश कर रहा था. मां खाना निपटा कर वहीं उस के साथ चटाई पर आकर सो जाया करती थी. आज वो साथ में हिंदी का अखबार भी ले आया. उसकी मां अक्सर अखबार पढ़ते पढ़ते सो जाया करती थीं. वो धीरे-धीरे मां के पल्लू से अपने आप को ढंकने की कोशिश करता था. ऐसा करते हुए वो अपने आप को दुनिया का सबसे सुरक्षित महसूस करता था. ऐसे में उसे ये अहसास हो जाता था कि दुनिया में उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

अभी वो एक पतली सी चादर में लिपटा लेटा हुआ सब कुछ वैसा ही सोच रहा है जैसा उस समय सोचा करता था. ऊपर पंखा उसी तरह चल रहा था जैसे तब चलता था. बगल में अखबार बिखर कर इधर-उधर उड़ रहा था. अब सब वैसा ही था जैसा तब था जब वो अपनी मां के पास चटाई पर सोता था. उसने इससे ज्यादा सुरक्षित कभी महसूस नहीं किया. पास ही रखा उसका फोन बार-बार वाईब्रेट कर रहा था. वो उस पर आज कोई ध्यान नहीं दे रहा था. फोन आ रहे थे, अपने आप बंद हो जा रहे थे. अब उसके बॉस का कॉल आ रहा है. एक बार को उसने फोन न उठाने की सोची, लेकिन फिर उसने फ़ोन उठा लिया.


फोन उठाते ही बॉस ने अपनी फायरिंग शुरू कर दी. वो "यस सर!" कहते-कहते अब मन ही मन मुस्कुराने लगा. उसे अचानक से किसी बात का कोई फर्क पड़ना बंद हो गया. बॉस दूसरी तरफ कोई असर न पड़ता देख अपनी आवाज और कड़क और तेज कर बोलने लगा. उसने पीठ पीछे टिकाई और एकदम तल्लीनता से सुनना शुरू कर दिया. वो एकदम चुपचाप सुन रहा था. उसे अब ये अहसास हो गया था कि आज दुनिया को कोई भी शक्ति उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती थी. फोन रखते-रखते उसकी मुस्कुराहट और बड़ी हो गयी. ऑफिस में बॉस का कॉल आने पर वो अपनी सीट पर एक दम सीधा बैठ जाता था लेकिन वो आज लेटे-लेटे ही बॉस को निपटा रहा था. बॉस के फोन के बाद फिर से एक आंसू आंखों के किनारे से निकल कर उसके लेटे होने के कारण उसके कान तक पहुंच रहा था. ये आंसू डर की वजह से नहीं थे बल्कि दुनिया में सबसे ज्यादा सुरक्षित होने के अहसास की खुशी के थे या आज अपनी मां के साथ बिताये गये दिन की वजह के थे. वो अब सो रहा है. हवा में अखबार अभी भी वैसे ही उड़ रहा है. फोन वाईब्रेट कर रहा है. अबकि बार उसके बॉस के बॉस का कॉल है. बज बज कर कट गया. वो इन सबसे बेखबर अपनी मां के साथ सो रहा है. उसके बॉस को क्या पता कि वो आज ऐसी जगह है जहां उसे हरा नहीं सकता. वो जीता हुआ है. वो अपनी मां के साथ है. वो दूसरी तकिया पर हाथ रखके सो रहा था. शायद वो मां के मुंह में जाते हुए उनके बाल हटा रहा था. वो ऐसा अक्सर करता था. जब उसकी मां गहरी नींद में होती थी और बाल मुंह में अटक सा जाया करता था. उसके हाथ अभी भी वैसे ही तकिया पर थे. दुनिया का सबसे सुरक्षित आदमी गहरी नींद में सो चुका था.
hirdesh 2इसे लिखने वाले हैं लल्लन टॉप के दोस्त हिरदेश कुमार गोस्वामी. UPPCL में काम करते हैं. बिजली सप्लाई करते हैं. नई-नई गाड़ी चलानी सीखी है तो कहीं भी कभी भी पेट्रोल भरा के निकल पड़ते हैं. क्रिकेट के बहुब्बड़े शौकीन हैं और टाइम निकाल के इधर-उधर फ़ेसबुक वगैरह पर लिख भी देते हैं.
 

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