आज PNB पर हायतौबा मची है, एक वक्त आज़ादी दिलाने वालों के खाते थे इसमें
जानिए लाहौर के अनारकली बाज़ार से PNB का रिश्ता क्या है.
Advertisement

लाहौर की गणपत रोड पर पीएनबी की पहली ब्रांच. (फोटोःपीएनबीएसयू; विकिपीडिया कॉमन्स)
Quick AI Highlights
Click here to view more
भारतीयों की पूंजी का इस्तेमाल अंग्रेजी बैंक चलाने में हो रहा है. उन्हें थोड़े ब्याज से ही संतुष्ट होना पड़ रहा है. भारतीयों का अपना राष्ट्रीय बैंक होना चाहिएपंजाब नेशनल बैंक. देश का पहला बैंक जिसने भारतीय पूंजी के साथ बिजनेस शुरू किया. आज विवादों में है. विवाद भी कोई छोटा नहीं. 11, 345 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा विवाद. ये भारतीय बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है. लेकिन आज हम इस घोटाले की नहीं, बल्कि पीएनबी के अतीत और वर्तमान की बात करेंगे.- लाला लाजपत राय (1894)
लाला लाजपत राय. अंग्रेज़ों के दमनकारी नियमों के खिलाफ लाठी खाकर शहीद होने वाले. लेकिन उन्होंने अपनी ज़िंदगी में भी काफी कुछ ऐसा किया जिसने उनकी मौत के बाद के भारत को गढ़ा. एक आज़ाद भारत कैसा होगा, इसके ख्वाब वो दिन-रात देखते थे. इन्हीं में से एक ख्वाब था - भारतीयों का अपना बैंक. ताकि देश का पैसा देश में रह सके.

पीएनबी शुरू करने वाले लोग. (फोटोः पीएनबीएसयू)
एक चिट्ठी से शुरुआत हुई
अपने ख्वाब को पूरा करने में लाला जी को साथ मिला आर्य समाज के राय मूल राय का. दोनों ने मिलकर एक पत्र लिखा. अपने चुनिंदा भारतीय दोस्तों को. इनमें से कई को एक विशुद्ध भारतीय बैंक का आइडिया जंचा और वो आगे आए. बैंक के लिए कागज़ी कार्यवाही शुरु की गई. अंततः 19 मई, 1894 को बैंक का जन्म हुआ.
बैंक के संस्थापक सदस्यों और पहले निदेशक मंडल में ट्रिब्यून के संस्थापक दयाल सिंह मजीठिया, पंजाब के पहले बिजनेसमैन लाला हरकिशन लाल, वकील काली प्रसन्न रॉय, पारसी बिजनेसमैन ईसी जेस्सावाला, प्रभु दयाल, जयशी राम बक्शी, लाला डोलन दास थे. इनमें से ज्यादातार लोग स्वदेशी अभियान से जुड़े हुए थे.
ये सब 23 मई, 1894 को दयाल सिंह मजीठिया के लाहौर वाले घर में बैंक की पहली बोर्ड मीटिंग हुई. इसमें तय किया कि बैंक का हेडक्वार्टर लाहौर में बनाया जाए. इन्होंने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया. ये तय किया गया कि बैंक के 14 शुरुआती शेयरहोल्डर और 7 डायरेक्टर बैंक के ज़्यादा शेयर नहीं खरीदेंगे. शेयरों की बड़ी संख्या आम लोगों के पास रहेगी और उन्हीं का बैंक पर असल नियंत्रण रहेगा.

लाहौर का अनारकली बाज़ार. (फोटोः नेटिव पाकिस्तान)
पीएनबी का लाहौर के अनारकली बाजार से रिश्ता
लाहौर के अनारकली बाजार में डाकखाना बहुत फेमस जगह हुआ करता था. ठीक उसके सामने एक किराए के मकान में पीएनबी का सफर शुरू हुआ. कागजों में इसे ही मुख्य ऑफिस के तौर पर दिखाया गया. अनारकली बाजार लाहौर का सबसे पुराना बाजार है. यह अपनी खूबसूरत इमारतों, परंपरागत खाने और कपड़ों के लिए प्रसिद्ध है. 12 अप्रैल, 1895 को इस बैंक को पब्लिक के लिए खोल दिया गया. वक्त बीता और बैंक ने अपना काम लाहौर से बाहर फैलाया.
बरस 1900 में बैंक ने लाहौर से बाहर निकल कर कराची और पेशावर में भी अपनी ब्रांच खोल दी. इसके करीब चालीस साल बाद 1940 में पीएनबी ने देहरादून के भगवान दास बैंक का विलय कर लिया माने उसे अपने में मिला लिया. बैंक का निर्माण देहरादून के सेठ भगवान दास ने किया था.

पंजाब नेशनल बैंक का एक पुराना चेक.
बंटवारा हुआ तो बैंक भी विस्थापित हो गया
देश आजाद हुआ तो इस बैंक को भी लाहौर से निकलना पड़ा. 1947 में बैंक को अपना लाहौर का पता खोना पड़ा. क्योंकि हिंदुस्तान से कटकर पाकिस्तान बन चुका था. इसके लिए काफी कागज़ी कार्यवाही की ज़रूरत पड़ी. 31 मार्च, 1947 के दिन लाहौर हाईकोर्ट ने बैंक को अपना हेड ऑफिस लाहौर से दिल्ली में रजिस्टर करने की अनुमति दी.
गांधी से लेकर नेहरु तक सबके खाते थे पीएनबी में
पंजाब नेशनल बैंक में एक वक्त महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के खाते थे. 13, अप्रैल 1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ. जनरल डायर ने दिन-दहाड़े 400 से ज़्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया. अंग्रेज सरकार ने जांच के लिए हंटर कमिटी बनाई. लेकिन सब जानते थे कि ये कमिटी सरकार के खिलाफ जाने वाली रिपोर्ट कभी नहीं देगी. तो कांग्रेस ने नरसंहार की जांच के लिए अपनी एक कमिटी बनाई. इस कमिटी का खाता भी पीएनबी में ही था.

इंदिरा गांधी ने बैंकिंग को सरकारी हाथों में लिया. इन्हीं के आदेश से पीएऩबी निजी से सरकारी हुआ था.
एक रात में निजी से सरकारी हो गया पीएनबी
पीएनबी ने लंबे समय तक एक निजी बैंक के तौर पर काम किया. लेकिन जब इंदिरा गांधी आईं तो इसके दिन फिर गए. उस समय बैंक देश के विकास का बड़ा माध्यम थे और बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा करने के भी. इसलिए इंदिरा का मानना था कि देश में बैंकिंग का नियंत्रण सरकार के हाथों में होना चाहिए. इंदिरा इस काम में कानून बनाने और लागू करने जितना वक्त लगाना नहीं चाहती थीं. तो वो ' बैंकिंग कंपनीज़ ऑर्डिनेंस ले आईं. इसके तहत 19 जून, 1969 की आधी रात से देश के 14 बड़े बैंक सरकारी हो गए. इनमें पीएनबी भी था.
आज ऐसी है पीएनबी की स्थिति
#1. पीएनबी देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है. पहला है स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई. पीएनबी के 10 करोड़ से ज्यादा कस्टमर हैं. बैंक अब तक 4.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांट चुका है. #2. पंजाब नेशनल बैंक की लगभग 7 हजार शाखाएं हैं. ये 764 शहरों में स्थित शाखाओं के जरिए काम करता है. सिर्फ भारत में ही नहीं, विदेश में भी. मसलन, हॉन्गकॉन्ग और काबुल. हॉन्गकॉन्ग में ही नीरव मोदी और उनके पार्टनर्स पीएनबी को चुंगी लगाते थे. #3. पीएनबी में 70 हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं. #4. नीरव मोदी कांड के बाद से पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आ गई है. दो दिन में बैंक की मॉर्केट वैल्यू आठ हजार करोड़ रुपए घट गई है.
पीएनबी घोटाले से जुड़ी खबरें यहां पढ़ें
कौन हैं वो, जिसकी बातें PMO मान लेता तो दो साल पहले ही पकड़ लिया जाता नीरव मोदी
कैसे हुआ 11,345 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला
PNB में 11,345 करोड़ रुपए का घोटाला करने वाले नीरव मोदी की पूरी कहानी ये है
मोदी सरकार के आखिरी बजट से क्या निकला!

