The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Hindu mythological stories: when lord krishna got framed for stealing a jewel stone and murder

जब कृष्ण पर लगा मणि के लिए हत्या का आरोप

बलराम ने फैला दी कृष्ण की मौत की अफवाह. कलंक धोने को रीछ से 21 दिनों तक कुश्ती करते रहे कृष्ण.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
आशुतोष चचा
31 मार्च 2016 (अपडेटेड: 31 मार्च 2016, 10:53 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
भगवान कृष्ण को एक बार एक बड़ा आरोप झेलना पड़ा था. बहुत पापड़ बेलने के बाद उन्हें उस कलंक से मुक्ति मिली. और तो और, इस दौरान उनकी मौत की अफवाह भी फैल गई थी. कहानी इस तरह है. एक था राजा सत्राजित. तपस्या से खुश होकर भगवान सूर्य ने उसे एक मणि दी थी, जिसे 'स्यमंतक मणि कहते थे.' मणि इतनी जोर की लाइट मारती थी कि सत्राजित जब उसे गले में लटकाकर नगर में घुसे तो सब लोग यों कहते हुए दौड़ने लगे कि 'देखो सूर्य जा रहे हैं.' घर पहुंचकर सत्राजित ने यह मणि अपने प्राणों से प्यारे छोटे भाई प्रसेनजित को दे दी. भगवान कृष्ण भी इस मणि पर मुग्ध थे. उन्होंने प्रसेन से वह मणि मांगी, लेकिन प्रसेन ने नहीं दी. समर्थ होने पर भी कृष्ण ने जबरदस्ती मणि नहीं छीनी. लेकिन फिर एक अनहोनी घटी. 'शो ऑफ' के नशे में चूर प्रसेनजित मणि लटकाकर शिकार खेलने गए थे. वहां एक शेर ने उनका काम तमाम कर दिया और मणि को मुंह में दबाकर दौड़ने लगा. इतने में वहां रीछों के राजा जाम्बवान आ निकले. उन्होंने शेर को मार डाला और उससे मणि लेकर अपनी गुफा में चले गए. उधर राजा प्रसेनजित की फैमिली का शक गया कृष्ण पर. उन्हें लगा कि कृष्ण ने ही मणि के लिए प्रसेनजित की हत्या की है, क्योंकि उन्होंने एक बार मणि मांगी भी थी. जाहिर है झूठा आरोप था, कृष्ण को नागवार गुजरा. उन्होंने अपने भाई बलराम और कुछ यादवों को साथ लिया और अपनी बेगुनाही साबित करने निकल पड़े. राजा के कदमों के निशान का पीछा करते हुए उन्हें घोड़े और राजा की लाश मिल गई. थोड़ी ही दूर पर शेर की लाश भी मिली. रीछ जाम्बवान भी अपने कदमों के निशान से पहचाना गया. कृष्ण जाम्बवान की गुफा के बाहर पहुंचे तो उन्हें भीतर से एक महिला की आवाज सुनाई दी जो संभवत: अपने बच्चे से कह रही थी कि यह मणि अब तेरी ही है. यह आवाज सुनकर कृष्ण ने बलराम और सैनिकों को वहीं दरवाजे पर बैठा दिया और खुद गुफा के भीतर गए. वहां उनके और महाबली जाम्बवान के बीच पूरे 21 दिनों तक कुश्ती चली. इस बीच बलराम और उनके साथी सैनिक द्वारका लौट आए और सबको कृष्ण के मारे जाने की खबर कर दी. लेकिन कृष्ण तो कृष्ण थे. उन्होंने जाम्बवान को हराया और फिर उसी के अनुरोध पर उसकी कन्या जाम्बवती को ग्रहण किया. वहां से मणि लेकर कृष्ण चल पड़े और राजा सत्राजित को मणि सौंपकर अपनी बेगुनाही साबित की. (ब्रह्म पुराण, गीताप्रेस, 44,45,46 )

Advertisement

Advertisement

()