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गुरु के चक्कर में याज्ञवल्क्य पर हुआ 'इमोशनल अत्याचार'

गुरु से नाराज याज्ञवल्क्य ने मांगा वरदान, 'जो गुरु न जानते हों, वो सिखा दो प्रभु'.

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आशुतोष चचा
2 जून 2016 (अपडेटेड: 2 जून 2016, 10:45 AM IST)
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ब्रह्मारात का बेटा याज्ञवल्क्य वेदव्यास जी का परम चेला था. वही वेदव्यास, महाभारत वाले. तो याज्ञवल्क्य हमेशा गुरुजी की सेवा में लगा रहता. एजुकेशनल बैकग्राउंड यह था कि यजुर्वेद की पढ़ाई चल रही थी. तभी आया कहानी में ट्विस्ट. आश्रम के मुनियों ने नया नियम बना डाला कि जो हमारे समाज में शामिल नहीं होगा, उसे सात दिन के भीतर ब्राह्मण हत्या का पाप लगेगा. लेकिन फिर दूसरी खबर आई. वैशम्पायन ऋषि खुद ही अपने भांजे की हत्या के आरोप में घिर गए. गिल्ट महसूस हुआ तो चेलों से बोले- सुनो बालकों, बिना लोड लिए तुम सब मेरी खातिर ब्राह्मण हत्या को दूर करने वाला व्रत करो. याज्ञवल्क्य ने खुद को क्लास का मॉनीटर समझते हुए कहा, 'भगवन इन सबको परेशान मत कीजिए. ये सब निस्तेज हैं. मैं हूं न. मैं सारे व्रत पूजा एंड पाठ कर लूंगा.' वैशम्पायन ने कहा, तुम बहुत रॉकस्टार न बनो. ब्राह्मणों की बेइज्जती करने वाले, तेरा मेरा रिलेशन यहीं से खत्म. आज के बाद मैं तेरा टीचर नहीं. जो पढ़ाया सब यहीं रखकर जा. याज्ञवल्क्य बोले, अरे गुरु जी गलत कैच कर रहे हैं आप. मैं तो भक्तिवश कह रहा था. रही बात पढ़ा हुए लौटाने की, तो ये लीजिए यजुर्वेद. मामला सॉर्ट आउट होते ही याज्ञवल्क्य गुस्से में निकल पड़े और तपस्या में जुट गए. भगवान सूर्य घोड़े के रूप में सामने आए और वर मांगने को कहा. याज्ञवल्क्य बोले- बस हमको वो ज्ञान ही मांगता है जो गुरुजी भी न जानते हों. मुझे यजु: श्रुतियों का उपदेश दीजिए, जो कोई न जानता हो. स्पेशली गुरु वैशम्पायन. भगवान सू्र्य ने फाइल पर ओके भाव देते हुए कहा- तथास्तु माई चाइल्ड. (विष्णु पुराण, तृतीय अंश. पांचवां अध्याय)

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