महर्षि ऋभु के ऊपर चढ़ निदाघ ने दिया 'लाइव डेमो'
सवारी देख महर्षि ने चेले से पूछा, बताओ राजा कौन और पब्लिक कौन
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फोटो - thelallantop
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पुराने दौरे में दो लोग थे. एक महर्षि ऋभु. परम ज्ञानी एकदम गूगल जैसे. दूजे निदाघ, इनको कोई भी चीज समझाने के लिए हर बार डेमो देना पड़ता था. महर्षि ऋभु एक बार ज्ञान गिराने के मकसद से निदाघ के शहर गए. वहां लगी थी भीड़. इस भीड़ और जलसे से दूर भूखे-प्यासे निदाघ उदास पोज में खड़े थे. महर्षि ऋभु ने निदाघ से पूछा, व्हाय सो सीरियस मैन? निदाघ बोले, राजा का काफिला निकल रहा है. भीड़ बहुत है, इसलिए साइड में खड़ा हूं.
महर्षि ऋभु ने परीक्षा राउंड शुरू करते हुए कहा, 'आप यहां के लोकल मालूम पड़ते हैं. तो बताइए राजा कौन है और बाकी पब्लिक कौन.' निदाघ बोले- वो जो हाथी पर चढ़ा है वो है राजा. बाकी लोग रिलेटिव्स एंड ऑल हैं. महर्षि ऋभु ने कहा, 'क्लीयरली बताइए. दोनों की विशेषताएं क्या हैं. राजा कौन और हाथी कौन.' निदाघ ने फिर वही जवाब दिया. महर्षि ऋभु ने फिर वही सवाल किया, 'नीचे ऊपर का कॉन्सेप्ट क्लीयर करो पहले'. निदाघ बौखलाकर महर्षि ऋभु के ऊपर चढ़ गए और बोले, इस वक्त मैं राजा हूं, क्योंकि मैं ऊपर हूं. और आप हाथी हैं क्योंकि आप नीचे हैं.'
लेकिन फिर निदाघ समझ गए कि यार ये हमसे खेल रहे हैं. ये पक्का कोई ज्ञानी हैं. चूंकि एक बार पहले महर्षि ऋभु निदाघ को ज्ञान दे चुके थे. तो टाइमलाइन में पीछे जाते हुए याद किया और फटाक से बोल पड़े, आप पक्का महर्षि ऋभु हैं. पैर छूने दीजिए. मैं समझ गया हूं. आप यहां मेरा उद्धार करने आए हैं. महर्षि ऋभु ने भी मुस्कियाते हुए कहा, सही पकड़े हो.
विष्णु पुराण, द्वितीय अंश. सोलहवां अध्याय

