मार्तंड ने देखा एक नजर और भसम हो गए राक्षस
इंद्र ने दैत्यों को युद्ध के लिए गोहराया. दोनों पक्षों में भयंकर युद्ध हुआ. फिर वही हुआ जो होता है. देवता हारने लगे. और मौके पर यही काम आए
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कश्मीर में भगवान मार्तंड मंदिर के अवशेष
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एक थीं प्रजापति दक्ष की बेटी अदिति. उनके बेटों में देवता प्रधान थे. दानव उनसे जलते थे. उन्होंने देवताओं से उनका राज्य और यज्ञभाग छीन लिया. अदिति ने सूर्य की तपस्या की. सूर्य ने वरदान दिया कि वे अपने हजारवें अंश से अदिति का बालक बनकर प्रकट होंगे और उनके बेटों के दुश्मनों का नाश करेंगे.
इसके बाद अदिति पवित्रता के फैक्टर को ध्यान में रखकर कुछ कठोर व्रतों का पालन करने लगीं. तब उनके पति कश्यप जी ने कहा- 'तू रोज उपवास करके गर्भ के बच्चे को क्यों मार डालती है.' इस पर अदिति बोलीं, 'देखिए ये रहा गर्भ का बच्चा. मैंने इसे नहीं मारा है, यही अपने शत्रुओं को मारने वाला होगा.'
उसी समय अदिति ने गर्भ का प्रसव किया. कश्यपजी ने वैदिक वाणी से स्तुति की और गर्भ से बालक पैदा हो गया. तभी आकाशवाणी हुई, 'मुने! तुमने अदिति से कहा था- 'त्वया मारितम् अण्डम.' (तूने गर्भ के बच्चे को मार डाला), इसलिए तुम्हारा बेटा 'मार्तंड' के नाम से जाना जाएगा.'
इस आकाशवाणी से देवताओं का मन सनन हो गया और दानवों की लौका ले गई. फिर इंद्र ने दैत्यों को युद्ध के लिए गोहराया. दोनों पक्षों में भयंकर युद्ध हुआ. इस दौरान भगवान मार्तंड ने दानवों की ओर देखा भर था, कि वे उनके तेज को सह नहीं पाए और सब के सब जलकर भस्म हो गए.

