देवताओं-राक्षसों में इंडो-पाक मची रहती थी. एक बार भयंकर युद्ध हुआ तो दोनों साइडके लोग भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और पूछे कि प्रभु इत्ता बता दीजिए कि जीतेगाकौन? भगवान ब्रह्मा घुमा-घुमाकर कहने के आदी थे नहीं. सीधे बोल दिए कि पृथ्वी पर एकराजा है रजि नाम का. वो जिसकी तरफ से लड़ेगा, वही जीतेगा. यह सुनकर दोनों पक्ष वहांसे गोली हुए और फल-फ्रूट लेकर पहुंचे राजा रजि के यहां. रजि ने देवताओं से रखी शर्तकि अगर जीतने के बाद मुझे अपने राजा इंद्र का पद दोगे, तभी लड़ूंगा. देवताओं नेप्रपोजल एक्सेप्ट कर लिया. राजा रजि ने राक्षसों से भी यही बात कही. पर राक्षस थेबद्तमीज. बोले तुम घुइयां ले लो, हमारे राजा तो प्रह्लाद ही होंगे. तब राजा रजि नेमारे गुस्से के हथियार उठा लिया और देवताओं की तरफ से ऐसा लड़े कि सारे दानव उनकेआगे चीं बोल गए. इनमें कुछ दानव तो ऐसे थे जिन्हें मारना इंद्र के लिए भी पॉसिबलनहीं था. युद्ध खत्म होने पर इंद्र सब देवताओं को लेकर राजा रजि को थैंक्यू कहनेपहुंचे और बोले- तात आप हमारे बाप हैं और मैं आज से आपका बेटा. रजि इंद्र सेप्रसन्न हुए. बोले- तथास्तु. कहानी खतम. स्रोत: ब्रह्मपुराण, गीता प्रेस, पेज- 31