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जब पृथ्वी ने ब्रह्मा से कहा- 'प्लीज हेल्प'

पुराण कहते हैं कि पानी पर तैर रही है पृथ्वी.

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26 मई 2016 (अपडेटेड: 26 मई 2016, 10:19 AM IST)
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सृष्टि की रचना प्रोसेस में थी. हर तरफ पानी ही पानी था. भगवान ब्रह्मा दुनिया रचने के असाइनमेंट को पूरा करने जैसे ही अंडर वाटर गए, वहां पहले से मौजूद वंसुधरा उर्फ पृथ्वी ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया. पृथ्वी ब्रह्मा जी से बोलीं, प्लीज मेरा भी कुछ कीजिए. अतीत में भी आपने ही मेरा उद्धार किया था. इस बार भी आप ही हेल्प कीजिए. ब्रह्मा जी का दिल पसीज गया. उन्होंने अपनी पृथ्वी को उठाकर दाढ़ पर रख लिया और पानी से निकल आए. बाहर ऋषि मुनि लोगों ने देखा तो मोटिवेट करने के लिए 'जय हो जय हो' जैसे नारे लगाए और फूल बरसाए. ब्रह्माजी ने तत्काल जल के ऊपर पृथ्वी को स्थापित कर दिया. तो इस तरह पुराणों के मुताबिक, पृथ्वी एक बड़े जलसमूह पर एक नाव की तरह सेट है. ब्रह्मा जी ने बाद में पृथ्वी को समतल और पर्वतों को विभाजित करके स्थापित कर दिया. (विष्णु पुराण, तीसरा और चौथा अध्याय)

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