ब्रह्मा धरती पर लाइफ जेनरेट करने की जल्दी में थे. उनके जो पहले चार बेटे हुए वेतो निकल गए तपस्या करने. अब उनके पास बचे नारद. ब्रह्मा ने उनको पुचकार कर कहा तुममेरा ये छोटा सा काम करो, शादी कल्लो. फिर ढेर सारे बच्चे पैदा करो और धरती पर फसललहलहा दो. नारद थे प्रैक्टिकल आदमी. उनको लगा कि तपस्या ज्यादा मीठा लड्डू है. बापसे कहने लगे कि बड़े भाई लोग को तो भेज दिए तपस्या करने और हमको सौंप रहे हो ये भरमजाल. हमसे न हो पाएगा. ब्रह्मा का पारा गरम. फटाक से श्राप दे मारा. कहा कि जाओबेट्टा नारद. अब तुमको जिंदगी यही काम करते बीतेगी. अक्ल तुम्हारी चली जाएगी घासचरने. उम्र भर तुम्हारे मन में इश्क का कीड़ा कुलबुलाता रहेगा और तुम वासना केवशीभूत होकर रह जाओगे. तो यह श्राप दिया था नारद को ब्रह्माजी ने. यह श्राप था किगॉड गिफ्ट, इस पर विद्वानों में मतभेद है. स्रोत: ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्मखण्ड