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मां से हिम्मत पाकर बर्फीला समंदर तैर गई ये लड़की

भक्ति शर्मा अंटार्कटिक महासागर पार करने वाली विश्व की सबसे कम उम्र की एशियाई महिला हैं.

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13 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 13 सितंबर 2017, 04:33 PM IST)
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भारती के बारे में मशहूर म्यूज़िक डायरेक्टर एआर रहमान ने भी ट्वीट कर सबको बताया था.
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'व्हाई शुड बॉयज हैव ऑल द फन?'

ये लाइन सुनते ही दिमाग में जो पहला ख्याल आता है, वो है हीरो स्कूटी का ऐड. हीरो प्लेज़र. बचपन में सबका सपना होता है कि उसके पास एक साइकिल हो. चलाना सीखना, कॉलोनी के बच्चों के साथ रेस लगाना, गिरना, घुटने फोड़ लेना. सब कितना अच्छा लगता है. लेकिन फिर बड़े होने लगते हैं. साइकल वाले सपने बाइक में बदल जाते हैं, लड़कियों के स्कूटी में.

हीरो प्लेज़र आए हुए 10 साल हो गए हैं. उसे सेलिब्रेट करने के लिए हीरो ने #Askwhy के साथ एक ऐड फिल्म बनाई है. जो बहुत ही अच्छी और इंस्पायरिंग है. कुछ ही ऐड ऐसे बन पाते हैं, जिनका मकसद सिर्फ अपना प्रोडक्ट बेचना नहीं, बल्कि लोगों को कुछ नया दिखाना-बताना होता है. हीरो वाला ऐड कुछ ऐसा ही है.


ये है हीरो प्लेज़र
ये है हीरो प्लेज़र

ये ऐड भारत की रिकॉर्ड बनाने वाली 'ओपन वॉटर' तैराक भक्ति शर्मा के बारे में है. भक्ति शर्मा अंटार्कटिक महासागर पार करने वाली विश्व की सबसे कम उम्र की एशियाई महिला हैं. भक्ति विश्व के सभी पांच महासागरों के अलावा आठ अन्य सागर और चैनल्स को भी तैरकर पार कर चुकी हैं.

1. अब ये 'ओपन वाटर' क्या बला है

'ओपन वाटर' मतलब वो स्विमिंग जो महज़ स्विमिंग पूल तक ही सीमित नहीं होती. इसमें नदी, तालाब, झील, सागर और महासागर सब तैरना होता है. तैराकी को खुले पानी का खेल बनाया एक अंग्रेज कवि ने. उसका नाम था बायरन. बायरन ने यूरोप से एशिया पहुंचने के लिए हेल्सपॉन्ट (हेल्सपॉन्ट एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला पानी की एक पतली सी लकीर है. माने मैप में पतली दिखती है, असल में नहीं) क्रॉस किया था. वो भी शौकिया!


मशहूर इंग्लिश पोएट लॉर्ड बैरन.
मशहूर इंग्लिश पोएट लॉर्ड बायरन

2. ऐड में ये दिखाया गया है 

भक्ति के सफ़र को जिस तरह दिखाया गया है, वो इस ऐड की सबसे ख़ास बात है. बिना कोई सनसनीखेज खबर बताए, बिना किसी ड्रामे के दिखाया गया है. बिना किसी लाग-लपेट के. सबसे अच्छी बात ये है कि इससे लोगों का ऐड देखने का एक्सपीरियंस बेहतर होगा.


भक्ति ने 1 डिग्री तापमान की कंपकंपाती ठंड में 41.14 मिनट में 2.3 किलोमीटर तक तैराकी की, जो आज तक किसी और महिला ने नहीं की है.

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इतनी ठंड में आम आदमी बेहोश होकर तुरंत कोमा में जा सकता है

3. लोगों ने अनाप-शनाप कहा

भक्ति की मां ही उनकी कोच थीं. चाहे वो स्विमिंग हो या लाइफ, उन्होंने ही भक्ति को गाइड किया. भक्ति को अपनी मां से ही इस पुरुषवादी समाज के स्टीरियोटाइप्स तोड़ने की इंस्पिरेशन और हिम्मत मिली.

भक्ति राजस्थान के उदयपुर शहर से आती हैं. उस शहर में मात्र एक स्विमिंग पूल है, वो भी एक होटल में. भक्ति अपनी मां के साथ वहीं जाकर स्विमिंग सीखती थीं, लेकिन लोगों को इससे भी समस्या थी.


भक्ति की मां लीना शर्मा.
भक्ति की मां लीना शर्मा

कहा जाता है कि स्विमिंग के लिए स्लिम बॉडी जरूरी होती है. जिस पर स्विम-सूट फबती है. ऐसा स्टीरियोटाइप बना हुआ है हमारे यहां. दिक्कत ये है कि हम लोग सिनेमा बहुत देखते हैं. बाकी तो रामाधीर सिंह ने बता ही दिया था. हमें लगता है कि एक ख़ास बॉडी स्ट्रक्चर वाली महिलाएं ही स्विम-सूट धारण कर सकती हैं.

भक्ति को भी ये फेस करना करना पड़ा, क्योंकि भक्ति उस तयशुदा फिजिकल स्ट्रक्चर वाले खांचे में फिट नहीं हो पा रही थीं. हमारे समाज में उनके जैसी लड़कियों को तो सूट-सलवार में खुद को ढंककर रखने का प्रावधान है, नहीं तो लोग देखकर क्या सोचेंगे! यही वो स्टीरियोटाइप्स हैं, जो भक्ति ने माता-पिता के दम पर तोड़ा और फिर अपने हिसाब से गढ़ लिया.


भक्ति ने तैराकी उदयपुर के होटल के स्विमिंग पूल में सीखी थी.
भक्ति ने तैराकी उदयपुर के होटल के स्विमिंग पूल में सीखी थी.

4. लड़ाई लोगों से नहीं, उनकी मानसिकता से थी

भक्ति ऐड में बताती हैं कि कोई अगर आपकी शर्ट खींचकर उसमें बर्फ़ का टुकड़ा डाल दे, तो आप कूदने लगेंगे. ऐसे में 1 डिग्री तापमान में तैराकी करने की बस कल्पना की जा सकती है. लेकिन बात भक्ति के लिए ये कल्पना नहीं, सच्चाई थी. लड़ाई कभी आसन नहीं होती. ख़ासकर महिलाओं के लिए. लेकिन जो लड़ाई आसान होती है, उसमें मज़ा भी तो नहीं आता.


तैराकी के दौरान भक्ति.
तैराकी के दौरान भक्ति.

भक्ति के अचीवमेंट्स महज़ एक लड़की नहीं, बल्कि एक खिलाड़ी की उपलब्धि थी, जो उसने इस समाज से लड़कर हासिल की थी. ये महिलाओं के लिए उन सेफ्टी वाले तर्कों के खिलाफ थी. ये वही तर्क हैं, जो महिलाओं को देर रात काम करने से, पार्टी करने से, अपनी मर्जी के कपड़े पहनने से और अपने मन की चीज़ें करने से रोकते हैं. अगर आप ये सब चीज़ें करने लगेंगी, तो आपकी तस्वीर 'बैड गर्ल' की बन जाएगी और उसके बाद आपकी छीछालेदर करने के लिए तो समाज-सुधारक बैठे ही हैं.

ये जो समाज है न, अपने लॉजिक लगाकर महिलाओं के लिए सांस लेना भी दूभर कर देता है. जो उस बर्फीले पानी में तैरने से भी ज़्यादा काटता है. इसलिए भक्ति का उस बर्फीले पानी में तैरना समाज के बनाए बकवास नियम कानूनों की तिलांजलि देते हुए गंगा में तैरने के बराबर है. भक्ति का संघर्ष उन लड़कियों और उनकी मांओं के लिए एक उदहारण की तरह है, जो अपने जीवन में कुछ करना चाहती हैं, कुछ बनना चाहती हैं. और शायद हीरो का भी मकसद उनको प्रोत्साहित करने का ही रहा होगा.


भक्ति को किसी समाज से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.
भक्ति को किसी समाज से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.

5. हमेशा हमारे पास दो ऑप्शंस होते हैं

पहला, लोग जो कह रहे हैं वो सुनें और निराश हो जाएं. दूसरा, उनकी सुनें और अपनी करते रहें. जो बकवास करते हैं, अपने काम से उन्हें चुप कराएं. भक्ति ने दूसरा वाला ऑप्शन चुना होगा. किसी भी माता-पिता के लिए आसन नहीं होगा कि अपनी बेटी को ये सब सहने के लिए छोड़ दें. आखिर हम भी उसी सोसाइटी के अंग हैं. हम लोगों से मिलते हैं, बातें करते हैं, पार्टियां-त्योहार एक साथ मनाते हैं.

लेकिन जब वही सोसाइटी आपके पर कतरने की कोशिश करने लगती है, तो उसके खिलाफ खड़ा होना मुश्किल होता है. उन थपेड़ों को बर्दाश्त करना कठिन हो जाता है. इसलिए हम भी भेड़ों के उस झुंड में शामिल हो जाना चाहते हैं, जो एक डांट के बाद अपना रास्ता बदल देता है. लेकिन भक्ति के माता-पिता ने मुश्किल वाली राह चुनी और अपनी बेटी साथ खड़े रहे. चट्टान बनकर. उन्होंने अपनी बेटी को वो करने करने दिया, जो वो चाहती थी.

*

'क्यों'

जब भक्ति पूछती हैं 'क्यों', वो इस ऐड का सबसे अच्छा पार्ट है. वो एक बहुत ही जरूरी सवाल पूछती है 'लड़कियां वो काम क्यों नहीं कर सकती, जो करने में उसे ख़ुशी मिलती है?' कभी-कभी वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना लोगों का एम्बीशन बन जाता है, जो अपने-आप में आपको कहीं पहुंचाने के लिए काफी है.


हीरो के ऐड में भक्ति शर्मा.
हीरो के ऐड में भक्ति शर्मा.

बहुत सारे लोग मानते हैं कि वो काम बेकार है, जिससे पैसे नहीं आते. लेकिन भक्ति ने इसे भी चैलेंज किया. क्यों स्विमिंग प्रोफेशन नहीं हो सकता या क्यों उसकी पढ़ाई को स्विमिंग से ऊंचा दर्ज़ा मिला हुआ है. और उसके बाद शादी तो है ही.

भक्ति को 2010 में तेंजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. 2015 में अंटार्टिका लांघने के बाद भक्ति के इरादे और भी मजबूत हो गए. अब वो इन महासागरों के साथ लोगों की घिसी-पिटी मानसिकताओं को भी तैरकर पार कर चुकी हैं. उन्हें बहुत आगे जाना है. सबसे आगे.

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी से सम्मान प्राप्त करती तैराक भक्ति शर्मा.

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी से सम्मान प्राप्त करती तैराक भक्ति शर्मा.


 

-THIS IS A PUBLIC APOLOGY-

This article was shared on Facebook on 13th September with a factually incorrect caption that had the potential to malign the image of Bhakti Sharma and her respected mother. The Lallantop is a fiercely feminist platform and the sole purpose of the story was to salute Ms. Bhakti Sharma for her amazing feat. The content of the story can testify that.
The Lallantop apologizes to Ms Bhakti Sharma and her respected mother. It was a pure mistake, with no aim at all to present either of the two women in bad light.
The Lallantop stands corrected.


 
 

ये स्टोरी टीना दास ने की है, जिसे श्वेतांक शेखर ने ट्रांसलेट किया है.



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