The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Soft Drink vs Your Health: The Bitter Truth Behind India's Summer Craze and the Rise of Sugar Tax

गर्मी में ठंडी कोल्ड ड्रिंक या धीमा ज़हर? डाइट सोडा और ज़ीरो शुगर का वो सच जो कंपनियां नहीं बतातीं

Soft Drink vs Your Health: गर्मी बढ़ते ही क्या आप भी धड़ाधड़ सॉफ्ट ड्रिंक गटक रहे हैं? सावधान. जानिए डाइट सोडा का धोखा, शुगर टैक्स की आहट और सत्तू-बेल जैसे देसी विकल्पों का असली दम.

Advertisement
pic
25 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 05:49 PM IST)
side effects of soft drinks in summer
गर्मी का 'सॉफ्ट ड्रिंक' और आपकी सेहत का 'हार्ड' सच
Quick AI Highlights
Click here to view more

मार्च का महीना अभी आधा ही बीता है और सूरज दादा ने अपनी तपिश दिखानी शुरू कर दी है. जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, बाज़ारों में फ्रिज से निकली ठंडी बोतलों की खनक बढ़ गई है. दफ्तर से थके-हारे लौटते वक्त या दोस्तों के साथ गप्पे मारते समय, हाथ में एक चिल्ड कोल्ड ड्रिंक की बोतल होना जैसे सुकून की गारंटी बन गया है. 

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बोतल को आप 'ठंडक' समझकर गटक रहे हैं, वो आपके शरीर के अंदर जाकर कौन सा ज्वालामुखी दहका रही है? आज बात इसी 'मीठे ज़हर' के गणित की पड़ताल करेंगे.

गर्मी का मौसम और सॉफ्ट ड्रिंक्स का बाजार

गर्मी शुरू होते ही सॉफ्ट ड्रिंक की सेल में अचानक उछाल आना कोई नई बात नहीं है. लेकिन इस साल का डेटा कुछ और ही कह रहा है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि भारत में सॉफ्ट ड्रिंक का मार्केट हर साल करीब 15 से 20 परसेंट की रफ्तार से बढ़ रहा है. 

कंपनियां लुभावने विज्ञापन दिखाती हैं, जिनमें पहाड़ से छलांग लगाने से लेकर तपती सड़क पर बर्फ जैसी ठंडक का अहसास कराया जाता है. पर असलियत ये है कि एक 300 मिलीलीटर की बोतल में करीब 10 से 12 चम्मच चीनी होती है. ये इतनी चीनी है, जितनी डब्ल्यूएचओ (WHO) पूरे दिन में खाने की सलाह देता है.

'ज़ीरो शुगर' सॉफ्ट ड्रिंक का मायाजाल

अब आप कहेंगे कि भाई हम तो 'डाइट सोडा' या 'ज़ीरो शुगर' वाली बोतल पीते हैं, हमें क्या खतरा? यहीं पर सबसे बड़ा खेल शुरू होता है. पिछले कुछ सालों में 'हेल्थ कॉन्शियस' युवाओं को लुभाने के लिए कंपनियों ने शुगर फ्री का लेबल चिपका दिया है. 

लेकिन ‘हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग’ की ताज़ा हेल्थ सर्वे और रिसर्च बताती हैं कि डाइट सोडा असल में साधारण सोडा से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. इसमें चीनी की जगह 'एस्पार्टेम' जैसे आर्टिफिशियल स्वीटनर डाले जाते हैं, जो आपके दिमाग को धोखा देते हैं कि आपने कुछ मीठा खाया है, जिससे आपकी भूख और ज्यादा बढ़ जाती है.

क्या कहता है साइंस

चलिए ज़रा विज्ञान की गहराई में उतरते हैं. ‘मायो क्लिनिक’ (Mayo Clinic) जब आप एक चिल्ड सॉफ्ट ड्रिंक पीते हैं, तो शरीर के अंदर क्या होता है? सबसे पहले, इसमें मौजूद फॉस्फोरिक एसिड आपकी हड्डियों से कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है. दूसरा, इतनी भारी मात्रा में शुगर सीधे लीवर पर अटैक करती है, जिससे फैटी लीवर की समस्या शुरू होती है. 

बाकी रही बात कार्बन डाइऑक्साइड की, तो वो पेट में जाकर एसिडिटी और ब्लोटिंग पैदा करती है. जिसे आप 'डकार' समझकर राहत महसूस करते हैं, वो असल में आपके शरीर का अलार्म है कि अंदर सब कुछ ठीक नहीं है.

कोल्ड ड्रिंक्स पर ‘शुगर टैक्स’?

अब बात करते हैं उस बड़े बदलाव की जिसकी सुगबुगाहट सरकारी गलियारों में है. क्या भारत में कोल्ड ड्रिंक्स पर 'शुगर टैक्स' बढ़ने वाला है? कई यूरोपीय देशों में मीठे ड्रिंक्स पर भारी टैक्स लगाया गया है ताकि लोग इन्हें कम पिएं. 

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में फिलहाल इन पर 28 परसेंट जीएसटी और 12 परसेंट सेस लगता है, यानी कुल 40 परसेंट टैक्स. लेकिन चर्चा है कि सरकार इसे 'हेल्थ टैक्स' के रूप में और बढ़ा सकती है. इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा, लेकिन मकसद ये है कि बढ़ती हुई डाइबिटीज़ और मोटापे की समस्या पर लगाम कसी जा सके.

‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’(Indian Council of Medical Research) यानी ICMR के मुताबिक शुगर टैक्स सिर्फ एक जरिया है, असली लड़ाई जागरूकता की है. अगर एक बोतल की कीमत 20 रुपये से बढ़कर 30 रुपये हो भी जाए, तो क्या लोग पीना छोड़ देंगे? शायद नहीं.

असल बदलाव तब आएगा जब हम ये समझेंगे कि ये ड्रिंक्स हमारे बच्चों के दांतों और उनके मेटाबॉलिज्म को किस कदर बर्बाद कर रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, बचपन में ही सॉफ्ट ड्रिंक की आदत लगने से 20 की उम्र पार करते-करते युवाओं में टाइप-2 डाइबिटीज़ के लक्षण दिखने लगते हैं.

सॉफ्ट ड्रिंक बनाम देसी ड्रिंक 

इसी बीच एक बहुत ही दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ कॉर्पोरेट ड्रिंक्स का दबदबा है, वहीं दूसरी तरफ 'देसी सुपरफूड्स' की वापसी हो रही है. सत्तू, आम पना और बेल का शरबत अब सिर्फ गांव की गलियों तक सीमित नहीं रहे. शहरों के बड़े-बड़े कैफे में अब 'सत्तू कूलर' और 'मिंट आम पना' मेन्यू का हिस्सा बन रहे हैं. 

इसके पीछे की वजह है इनका 'इकोनॉमिक' और 'हेल्थ' बेनेफिट. ये ड्रिंक्स न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि इनमें वो माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स हैं जो लू से बचाने और शरीर को असली ठंडक देने में कारगर हैं. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी ऐसे ड्रिंक्स के फायदों के बारे में बताता रहता है.

आइए तुलना करते हैं. एक तरफ है 50 रुपये की कोल्ड ड्रिंक की बोतल जिसमें ज़ीरो पोषण है, सिर्फ कैलोरी और केमिकल है. दूसरी तरफ है 10-15 रुपये का सत्तू का शरबत, जो प्रोटीन से भरपूर है, पेट को ठंडा रखता है और आपको लंबे समय तक एनर्जी देता है. 

बेल का शरबत पेट की बीमारियों के लिए रामबाण है, जबकि सॉफ्ट ड्रिंक पेट की परत को नुकसान पहुंचाती है. ‘नाबार्ड’ (NABARD) के मुताबिक इकोनॉमिक एंगल से देखें तो देसी ड्रिंक्स को बढ़ावा देने से स्थानीय किसानों और छोटे दुकानदारों की आय बढ़ती है, जबकि सॉफ्ट ड्रिंक का मोटा मुनाफा मल्टीनेशनल कंपनियों की जेब में जाता है.

सब मार्केटिंग का खेल है बाबू भइया

सवाल ये है कि हम इन चमकदार बोतलों की तरफ खिंचे क्यों चले जाते हैं? जवाब है मार्केटिंग का मनोविज्ञान. कंपनियां हमें 'प्यास' नहीं बेचतीं, वो हमें 'कूलनेस' और 'एडवेंचर' बेचती हैं. जब आप क्रिकेट मैच देख रहे होते हैं और हर ओवर के बाद एक चमकता हुआ विज्ञापन आता है, तो आपका सब-कॉन्शियस माइंड उसे प्यास से जोड़ देता है.

'बिटविन द लाइन' एनालिसिस करें तो ये सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल का हिस्सा बना दिया गया है, जहां पानी पीना 'बोरिंग' और सोडा पीना 'स्टाइलिश' माना जाता है.

ये भी पढ़ें: गैस का चूल्हा या बिजली वाला इंडक्शन, आपकी जेब का असली ‘दुश्मन’ कौन?

अंत में, फैसला आपको करना है. क्या आप विज्ञापन की चमक में फंसकर अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना चाहते हैं, या फिर अपनी जड़ों की तरफ लौटकर उन ड्रिंक्स को अपनाना चाहते हैं जो सदियों से हमारी ढाल बने हुए हैं? 

तो अगली बार जब आप किसी दुकान के सामने खड़े हों और फ्रिज से ठंडी हवा निकल रही हो, तो एक पल रुकिए. उस लेबल को ध्यान से पढ़िए. याद रखिए, प्यास पानी या शरबत से बुझती है. केमिकल के घोल से नहीं. सेहत आपकी है, और इस गर्मी में इसे 'सॉफ्ट' रखना है या 'हार्ड' बनाना है, ये आपके हाथ में है. 

वीडियो: सेहतः कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद शरीर में क्या होता है?

Advertisement

Advertisement

()