बात है उस समय की जब इन्टरनेट नहीं था. और वो लोग जिनके आज बच्चों के भी बच्चे होचुके हैं, जवान हुआ करते थे. बात उस समय की है जब टीवी पर संडे को 'रामायण' आयाकरता था. रामानंद सागर की रामायण, अरुण गोविल वाली रामायण. अरुण रामायण से ऐसे जुड़ेकि उनको लोगों ने भगवान मान लिया. उस दौर में जो लोग 3-4 साल के रहे होंगे, आज भीमानते हैं कि जब मम्मी आंखें बंद कर के भगवान का ध्यान करने को कहतीं, तो आशीर्वाददेते हुए अरुण गोविल दिखाई पड़ते.आज ही के दिन पैदा हुए अरुण ने अपना बचपन मेरठ में गुजारा. मेरठ यूनिवर्सिटी से हीपढ़ाई की. 17 साल की उम्र में गए मुंबई बिजनेस करने पर घुस गए अभिनय में. फिल्मपहेली (1977) में बॉलीवुड में पहला ब्रेक मिला.फिल्म माशूका से एक सीनपर एक्सेलेरटर मिला टीवी शो विक्रम और बेताल से जिसमें ये बने थे विक्रमादित्य.इसके पहले इन्होंने कुछ उड़िया और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया.विक्रम-बेताल का एक सीनपर भगवान तो उन्हें भगवान बनाने पर उतारू था. 1986 में आया 'रामायण' जिसे बनायारामानंद सागर ने. दीपिका चिखालिया ने इनके साथ किया सीता का रोल. जब पहली बार अरुणने रामायण का ऑडिशन दिया, वो फेल हो गए. पर कुछ ही हफ्तों बाद उनके पास रामानंदसागर का फोन आया. उन्होंने कहा कि अरुण को शो में न लेने का फैसला उन्होंने बदलदिया है. साथ ही ये भी कहा कि राम के रोल के लिए इससे बेहतर चेहरा शायद ही उन्हेंकहीं मिले.रामानंद सागर की रामायण में रामराम का रोल करने के बाद तो अरुण की लाइफ ही बदल गयी. लोग अरुण को पब्लिक में देखतेतो उनके पांव छूने लगते और आशीर्वाद मांगते. लोग उनको उनके रोल से अलग नहीं देखपाते थे. एक समय चेन स्मोकर हुआ करने वाले अरुण को लोगों के डर से पब्लिक मेंसिगरेट पीना छोड़ना पड़ा.अरुण आज 'लक्ष्मण' सुनील लाहिरी के साथ राम-लक्ष्मण नाम की प्रोडक्शन कंपनी केमालिक हैं. 57 साल के अरुण आजकल स्वयंवर में सीता को जीतने वाले राम जैसे यंग तोनहीं लगते, पर वो राम वाली हल्की सी सिग्नेचर मुस्कान जरूर साथ रखते हैं.