जानते हैं माही गिल किस तरह मेरी स्मृति में बसी हैं? 'देव-डी' वाली मॉडर्न पारो कीतरह, जिसको अपने मॉडर्न देवदास से बड़ा प्यार था. इतना कि साइकिल के ऊपर से उसेगद्दा दिखाया था, ताकि दोनों खेतों में जाकर उसका सही इस्तेमाल कर सकें. याद इसलिएहै क्योंकि वो उन बहुत कम लड़कियों में से थी, जो फिल्म के हीरो से खुलकर कहती थी किहां, मैं कामुक हूं. शारीरिक संबंध की ओर पहला कदम वो खुद उठा रही थी. उसे इस बातकी शर्म नहीं थी. उस उम्र में मेरे लिए बड़ा अजीब था कि पुरुष से आकर्षण और उससेसेक्स की चाह लड़की भी व्यक्त कर सकती है.ध्यान पाने की आदत और न मिलने पर ध्यान खींचने की हिम्मत.और हां, जिस पुरुष को वो खेत में लेकर जाती है, अंततः बुरा निकलता है. वो उसपर शककरता है क्योंकि वो अपनी कामुकता इतने खुले तरीके से जाहिर कर सकती है. आज सोचतीहूं तो पारो को समझ सकती हूं. ध्यान पाने की आदत और न मिलने पर ध्यान खींचने कीहिम्मत, फिर भले ही उसके लिए कोई उसे कुलटा कह दे.इसे अच्छी बात कहें या बुरी, पारो की शादी उस व्यक्ति से नहीं होती. किसी और लड़केके शादी कर लेना उसके लिए जल्दी में लिया गया फैसला था. उसे पता था कि प्यार-व्यारसब ठीक है, मगर आत्मसम्मान भी कोई चीज़ होती है. फिर चाहे अगला व्यक्ति आपके बारेमें कुछ भी सोचे, उसे कुलक्षिणी घोषित कर दे.माही का असल नाम रिंपी कौर गिल है. गुलाल में छोटे से रोल के साथ डेब्यू किया था.फिर पारो. बस बाक़ी इतिहास है.बात 'साहिब, बीवी और गैंगस्टर' की. माही ने माधवी देवी का किरदार किया. सेक्स,ड्रग्स और पागलपन से अलग माधवी एक औरत थी जिसे अपने पति का अटेंशन चाहिए था. प्रेमीका ध्यान चाहिए था. ये 'साहिब, बीवी और गुलाम' का मॉडर्न वर्जन था मगर दोनोंफ़िल्में अलग थीं. माही गिल मीना कुमारी से अलग थीं.माधवी खतरनाक औरत थी. क्योंकि वो अटेंशन पाने के लिए कुछ भी कर सकती थी. ड्राइवर केसाथ अफेयर भी. और इसलिए भी क्योंकि वो बहुत महत्वाकांक्षी थी.उसपर मन खीज उठता था कि वो इतनी चालाक कैसे हो सकती थी. माधवी की यही खूबसूरती थी.ध्यान के साथ-साथ उसके लिए पैसा भी ज़रूरी था. वो चोटिल थी, कामुक और भूखी थी. उससेनफरत होती थी, प्रेम होता था, उसपर दया आती थी. उसपर मन खीज उठता था कि वो इतनीचालाक कैसे हो सकती थी. माधवी की यही खूबसूरती थी.पारो हो या माधवी, माही के किरदार जानते थे, उन्हें क्या चाहिए. वो गलतियां करती,रोती, मगर कभी शर्मिंदा नहीं होती. शराब पीती, गाली देती. मगर उसका दिल- हाय! प्रेमकरती तो यूं टूटकर कि अगले पुरुष की मौत अपने सर ले ले. वो पुरुष के साये सी शुरुआतकरती, फिर उससे बड़ी हो जाती.उसका दिल- हाय! प्रेम करती तो यूं टूटकर कि अगले पुरुष की मौत अपने सर ले ले.माही ने बताया कि संभोग में सुख है. रिझाना एक कला है और 'गंदी बातों' में औरतों कोमजा आता है.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें:अपनी आजादी तो भइय्या लौंडिया के तिल में है