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मोदी ने कही बड़ी बात, 22 दिसंबर को बहुत कुछ सस्ता कर देंगे

जानिए किन 20 से ज्यादा प्रोडक्ट और सेवाओं पर GST दर घटाई जा रही है.

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19 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 19 दिसंबर 2018, 04:34 PM IST)
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मोदी सरकार 2017 में वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा के साथ जीएसटी को लेकर आई. फाइल फोटो.
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चुनाव आ गए लगते हैं. किसानों के साथ मिडिल क्लास को भी लुभाने का दौर शुरू हो गया है. सरकार एसी, टीवी और वीडियो रिकॉर्डर जैसी 20-22 चीजें और सस्ती करने जा रही है. इन पर टैक्स 28 फीसदी से घटाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है. अब सिर्फ लग्जरी और सेहत के लिए नुकसदानदेह आइटम ही 28 फीसदी जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स के दायरे में आएंगे. अभी 35 प्रोडक्ट और सेवाएं 28 फीसदी टैक्स के दायरे में आती हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ वस्तुओं पर टैक्स 18 से घटाकर 12 फीसदी करने पर भी विचार हो रहा है. इसके लिए 22 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर को मुंबई में एक कार्यक्रम में इसका ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अब 99 फीसदी चीजों पर जीएसटी की दर 18 फीसदी या उससे कम होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. फाइल फोटो.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. फाइल फोटो.

ये हो सकते हैं सस्ते
सीमेंट, मार्बल, ग्रेनाइट, डिशवॉशर्स, वीडियो गेम, ऑटो पार्ट्स, टायर, मोटरसाइकिल, कार, एसी, 27 इंच से बड़े टीवी, डिजिटल कैमरा, कोल्ड ड्रिंक, मॉनीटर, प्रोजेक्टर और वीडियो रिकॉर्डर सस्ते हो सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक 300 रुपए की सीमेंट की बोरी  के दाम 25 रुपए तक कम हो सकते हैं. अभी इन सभी प्रोडक्ट और सर्विसेज पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है. अब टैक्स 18 फीसदी किया जा सकता है. टैक्स 10 फीसदी कम हो जाने से ये वस्तुएं और सेवाएं काफी सस्ती हो जाएंगी. मोटरसाइकिल और कारों पर टैक्स दरें कम करने की मांग काफी पहले से की जा रही है. मार्बल और ग्रेनाइट बनाने वाली कंपनियां भी इसको लग्जरी टैक्स के दायरे से बाहर करने की मांग करती रही हैं. उनका कहना था कि ये प्रोडक्ट विलासिता नहीं ज़रूरत की चीज हैं.
इनके सस्ते होने पर संशय
एयरलाइंस, निजी इस्तेमाल के लिए एयरक्राफ्ट, क्लब की सदस्यता, गैंबलिंग, सट्टा, रिवॉल्वर, पिस्तौल इंटर स्टेट लॉटरी, 5-स्टार होटल में रुकना (7,500 रुपए से ज्यादा किराया), एसयूवी यानी बड़ी कारें, तंबाकू, सिगरेट, शराब, पान मसाला समेत करीब 13 प्रोडक्ट अभी 28 फीसदी के टैक्स दायरे में रह सकते हैं. इसकी वजह ये है ये प्रोडक्ट या सेवाएं लग्जरी कैटेगरी में आती हैं. पान मसाला-सिगरेट, शराब आदि को सरकार प्रोत्साहित नहीं करना चाहती. लेकिन इनके उत्पादक रेट कम करने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं. पिस्तौल और रिवॉल्वर पर भी टैक्स कम करने  पर विचार हो सकता है.
सिगरेट. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.
सिगरेट. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.

अभी क्या है स्थिति?
अभी जीेएसटी की 5 दरें हैं. करीब 163 वस्तुओं या सेवाओं पर कोई टैक्स नहीं है यानी ये वस्तुएं शून्य टैक्स के दायरे में आती हैं. कोई 314 वस्तुओं या सेवाओं पर पांच फीसदी टैक्स लगता है. इसी तरह 266 प्रोडक्ट पर 12 फीसदी, 596 उत्पादों और सेवाओं पर 18 परसेंट टैक्स देना पड़ता है. 28 फीसदी टैक्स के दायरे में सिर्फ 39 वस्तुएं हैं. गुजरे डेढ़ साल में जीएसटी के सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब वाले 191 उत्पादों पर टैक्स घटाया जा  चुका है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक पहली जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतों में लगातार कमी आई है. अभी तक 27 इंच तक के टीवी सेट, फ्रिज, वाशिंग मशीन, मिक्सर, जूसर, वैक्यूम क्लीनर, घड़ी, गीजर, पंखे और कूलर जैसे घरेलू इस्तेमाल के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें 18 फीसदी टैक्स के दायरे में आ चुकी हैं. जीएसटी लागू होने से पहले इन पर 31.3 फीसदी टैक्स लगता था. मोबाइल फोन पर टैक्स की दरें 18-25 प्रतिशत से कम होकर 12 फीसदी पर आ चुकी हैं. फर्नीचर पर 25-31 फीसदी से कम होकर 18 प्रतिशत टैक्स रह गया है. लग्जरी प्रोडक्ट्स पर टैक्स दरें 31.3 फीसदी से गिरकर 28 फीसदी पर आ चुकी हैं.  100 रुपए ज्यादा वाले सिनेमा टिकटों पर टैक्स 35 से कम होकर 28 फीसदी रह गया है. 5-स्टार होटल में रुकने पर दरें 30-50 से कम होकर 28 फीसदी रह गई हैं.
क्या सब चुनाव की वजह से है?
इन प्रोडक्ट के सस्ते होने की बड़ी वजह आगामी लोकसभा चुनाव को माना जा रहा है. माना जा रहा है कि चुनाव के मद्देनजर सरकार हर एक तबके को जोड़ना और खुश करना चाह रही है. इसके अलावा जीएसटी में टैक्स कलेक्शन बढ़ने की वजह से भी लग्जरी प्रोडक्ट पर दैक्स दरें कम की जा रही हैं. जीएसटी के तहत 2017-18 के दौरान हर महीने 89,885 करोड़ रुपए का टैक्स वसूल किया गया है. ऐसी दशा में 28 फीसदी टैक्स दायरे से कुछ वस्तुएं बाहर करने का सरकार को मौका मिल गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्रालय लगातार इसी वजह से रेट घटाने के संकेत दे रहे हैं.


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