The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • GST : Goods and services tax has completed its one year of launching, know the facts of its failure

GST का वो सच, जिसे मोदी सरकार ने एक पेज के विज्ञापन में आपको नहीं बताया

GST के एक साल पूरे हो गए हैं. जानिए इससे नुकसान हुआ कि फायदा.

Advertisement
pic
27 जून 2018 (अपडेटेड: 26 जून 2018, 05:23 AM IST)
Img The Lallantop
जीएसटी लागू होने के बाद 375 से ज्यादा बदलाव हो चुके हैं, लेकिन सरकार की आय बढ़ने के बजाय घटती ही जा रही है.
Quick AI Highlights
Click here to view more
जब 1 जुलाई 2018 का दिन आएगा, तो देश में जीएसटी यानि कि गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स को लागू हुए एक साल हो जाएंगे. 1 जुलाई 2017 के दिन इस टैक्स को लागू करते हुए इसे देश की दूसरी आजादी बताया गया था. आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार बताया गया था और इसकी शान में कसीदे काढ़े गए थे. लेकिन एक साल के बाद इसकी वजह से देश के आर्थिक हालात में क्या सुधार हुए, इसका जवाब वरिष्ठ पत्रकार अंशुमान तिवारी ने इंडिया टुडे मैग़्जीन के 'अर्थात' कॉलम में दिया है. इस बार के 'अर्थात' का शीर्षक है- 'एक सुधार सौ बीमार'. इस कॉलम की शुरुआत में ही उन्होंने लिखा है कि सरकार को लोगों का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने जीएसटी के साथ एक साल गुजार लिया, जो कहने को दुनिया में सबसे नया टैक्स सुधार था. हम उनके लेख की खास-खास बातें यहां पेश कर रहे हैं.
# जुलाई 2017 से मई 2018 के बीच भारत में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को मिलाकर हर महीने औसतन 90,000 करोड़ रुपये मिले. जीएसटी लागू होने से पहले हर महीने कम से कम 107 लाख से 110 लाख करोड़ रुपये मिलते थे. यानि करीब 20 हजार करोड़ रुपये की कमी आई है.
# जीएसटी को बहुत छोटे कारोबारियों को छोड़कर सबपर लगाना था. हर महीने तीन बार रिटर्न भरना था. लेकिन गुजरात चुनाव के ठीक पहले 75 फीसदी करदाताओं को जीएसटी से बाहर कर दिया गया. पहले तीन महीने में ही वो जीएसटी खत्म कर दिया गया, जिसे देश के सबसे बड़े टैक्स सुधार के तौर पर देखा गया था.
गुजरात चुनाव से पहले जीएसटी के स्लैब में बदलावों को रणनीति माना जा रहा है.
गुजरात चुनाव से पहले जीएसटी के स्लैब में बदलाव किए गए थे.

# इसकी असफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह ये थी कि जीएसटी एक या दो टैक्स दरें लेकर आने वाला था, लेकिन आईं कुल पांच दरें और साथ में आया सेस. इसके बाद तो कारोबारियों ने बगावत कर दी. # इसके बाद फिर से बदलाव किए गए और ये बदलाव 375 से ज्यादा बार किए गए. इसके साथ ही ई वे बिल लाया गया, जिसका मकसद अंतरराज्यीय कारोबार पर नज़रर रखना था.
#पेट्रोलियम उत्पादों को अब भी जीएसटी के दायरे में नहीं ला जा सका है और इसे दायरे में लाना अभी दूर की कौड़ी समझ में आ रही है.
# टैक्स चोरी जीएसटी की सबसे बड़ी मुसीबत है. जबकि इसी मुसीबत को दूर करने के लिए जीएसटी को लागू किया गया था.
# कारोबारी दार्शनिक निकोलस नसीम तालेब ने अपनी किताब 'स्किन इन द गेम' में लिखा है कि हमारे आसपास ऐसे बहुत लोग हैं जो समझने या सुनने की बजाए समझाने की आदत के शिकार हैं. जीएसटी शायद सरकार की इसी आदत का मारा है. इसे बनाने वाले जमीन से कटे और जड़ों से उखड़े थे.
GST

# आर्थिक सुधार तमाम सतर्कताओं के बाद भी उलटे पड़ सकते हैं. दो माह पहले की ही बात है कि मलेशिया का जीएसटी, जिसे भारत के लिए आदर्श माना गया था जो हर तरह से भारत से बेहतर भी था, खुद भी डूबा और सरकार को भी ले डूबा.
# जीएसटी की विफलता ने डिजिटल इंडिया की चुगली की और इसकी ढांचागत खामियों ने सुधारों को लेकर सरकार की काबिलियत पर भरोसे की चूले हिला दी हैं.
# भारत पर फिदा विश्व बैंक जीएसटी की पहली छमाही को देखकर ही कह बैठा कि भारत का जीएसटी दुनिया में सबसे जटिल है.
# नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय बोल पड़े कि जीएसटी को स्थिर होने में दस साल लगेंगे. और सरकार की ताजा कोशिशें जीएसटी के ‘संक्रमण’ को दूर करने की हैं.


ये भी पढ़ें:
पढ़िए GST के बारे में सबकुछ, आसान भाषा में

देश को आबाद करेगा या बर्बाद करेगा GST?

तीन साल पहले GST लागू हुई, चुनाव हुए और प्रधानमंत्री चुनाव हार गया

GST: प्रेमियों के लिए भी अलग-अलग टैक्स स्लैब ज़रूरी है

जानिए, GST के नाम पर वसूले जा रहे पैसे आप कैसे बचा सकते हैं

Advertisement

Advertisement

()