कांवड़ यात्रा में इस 'सोने की दुकान' का क्या काम?
शिव की भक्ति में लीन इस साधु को गोल्ड पसंद है. शरीर पर साढ़े 12 किलो सोना लाद रखा है.
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फोटो - thelallantop
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कहते हैं भगवान शंकर कैलाश पर्वत पर रहते हैं. एकदम विचित्र और सादे रूप में. आभूषणों के नाम पर उन्होंने गले में सांप डाल रखे हैं. ये बड़े बड़े फुंकारते एकदम करिया वाले. उन शंकर जी के भक्त कांवड़ यात्रा करते हैं. उनके विभिन्न मंदिरों पर गंगाजल चढ़ाते हैं. सैकड़ों किलोमीटर की थका देने वाली यात्रा करते हुए. पांव में छाले, घाव लेकर ये लोग घर पहुंचते हैं. कुछ बुखार से तपता हुआ शरीर लेकर. रास्ते में मौज मस्ती, हुड़दंग जो भी किया होता है. वो आखिरी में थकान देता है. आध्यात्मिक लोगों को सुकून भी देता होगा. भोले शंकर भी प्रसन्न होते ही होंगे.
कांवड़ यात्रा इस समय चल रही है. गाजियाबाद में सारे स्कूल बंद कर दिए गए हैं इसे देखते हुए. नेशनल हाईवे 24 कांवड़ियों के नाम कर दिया जाता है. दो दिन पहले एक हादसा भी हुआ. 5 कांवड़ियों की मौत हो गई थी. आत्मा को शांति मिले. लेकिन हम च्युइंगगम की तरह बात बढ़ाते जा रहे हैं. मुद्दे की बात पर आते हैं.
बाकी सब तो ठीक है बाबा जी. लेकिन एक पाप तो अब भी हो ही रहा है भोलेनाथ की नजर में. कभी किसी की बारात में गए हो? तो पता होगा कि दूल्हे से ज्यादा सजकर नहीं जाना चाहिए. इससे दूल्हे में हीनभावना भर जाती है. सारी दुनिया दूल्हे को छोड़कर आपको ही देखेगी. आपको भले अच्छा लगे, लेकिन दूल्हा इस काम से दुखी होगा. अब सारा भक्त समाज जा रहा है शिव की भक्ति करने. आप उनसे अपनी भक्ति करा रहे हो. लोग भगवान को छोड़कर एक अदने से माटी शरीर की सेवा करने में लगे हैं. बताइये, ये अच्छा लगेगा भोले को?
शास्त्रों, पुराणों में कहा गया कि विनम्रता ही मनुष्य का आभूषण है. आपको उसकी भी जरूरत नहीं पड़ेगी. इतना सोना जो लाद रखा है. समझ में नहीं आ रहा कि आप सेवा करने निकले हैं या सेवा कराने. खैर, गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि 'नाम, रूप और यश' ये सब प्रभु की भक्ति में बाधक हैं. आपने बताया कि आपको बचपन से गोल्ड का शौक है. तो उम्र बढ़ते हुए आपका शौक भी बढ़ गया.
जा रहे हैं तो जाएं कांवड़ लेकर. लेकिन ये उम्मीद न करें कि भोले बाबा खुश होंगे. बल्कि अपने हिस्से का अटेंशन गोल्डन के हिस्से में आता देख वो तांडव न करने लगें, हमें तो ये चिंता है.
हरिद्वार पहुंची कांवड़ यात्रा में एक बाबा चले जा रहे हैं. नाम है 'गोल्डन बाबा.' गोल्डन क्योंकि शरीर सोने से ढका हुआ है. बप्पी लहरी तो इनके आगे साष्टांग हो जाएं समझो. इत्ता सोना. ऊपर से नीचे तक कुल मिलाकर साढ़े 12 किलो सोना. करीब चार करोड़ का सोना. इत्ता ही नहीं. स्पेशल डायमंड डायल वाली 27 लाख की घड़ी भी पहन रखी है. बुधवार को बाबा की यात्रा मेरठ तक पहुंच चुकी है. उनकी सुरक्षा के लिए 25 पुलिस वाले साथ चल रहे हैं घेरा बनाकर. और तकरीबन 200 चेले आगे-पीछे लगे रहते हैं. बाबा का असली नाम है सुधीर कुमार मक्कड़. पहले दिल्ली में थे. कपड़ों का बिजनेस करते थे. फिर अचानक ज्ञान चक्षु खुले. पता चला कि बहुत पाप कर डाले. बस अध्यात्म जॉइन कर लिया. पाप मिटाने के लिए परोपकार भी करते हैं. करीब 200 लड़कियों का विवाह हर साल अपने खर्चे पर करते हैं.
बाकी सब तो ठीक है बाबा जी. लेकिन एक पाप तो अब भी हो ही रहा है भोलेनाथ की नजर में. कभी किसी की बारात में गए हो? तो पता होगा कि दूल्हे से ज्यादा सजकर नहीं जाना चाहिए. इससे दूल्हे में हीनभावना भर जाती है. सारी दुनिया दूल्हे को छोड़कर आपको ही देखेगी. आपको भले अच्छा लगे, लेकिन दूल्हा इस काम से दुखी होगा. अब सारा भक्त समाज जा रहा है शिव की भक्ति करने. आप उनसे अपनी भक्ति करा रहे हो. लोग भगवान को छोड़कर एक अदने से माटी शरीर की सेवा करने में लगे हैं. बताइये, ये अच्छा लगेगा भोले को?
शास्त्रों, पुराणों में कहा गया कि विनम्रता ही मनुष्य का आभूषण है. आपको उसकी भी जरूरत नहीं पड़ेगी. इतना सोना जो लाद रखा है. समझ में नहीं आ रहा कि आप सेवा करने निकले हैं या सेवा कराने. खैर, गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि 'नाम, रूप और यश' ये सब प्रभु की भक्ति में बाधक हैं. आपने बताया कि आपको बचपन से गोल्ड का शौक है. तो उम्र बढ़ते हुए आपका शौक भी बढ़ गया.
जा रहे हैं तो जाएं कांवड़ लेकर. लेकिन ये उम्मीद न करें कि भोले बाबा खुश होंगे. बल्कि अपने हिस्से का अटेंशन गोल्डन के हिस्से में आता देख वो तांडव न करने लगें, हमें तो ये चिंता है.
