जून 2015 में फेसबुक ने प्रोफाइल पिक्चर पर लगाने के लिए इंद्रधनुष जैसा फिल्टरदिया था. ये फिल्टर LGBT समुदाय के प्रति अपना सपोर्ट दिखाने के लिए था. LGBT यानीगे, लेस्बियन, बायसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर. कई लोगों ने इन्द्रधनुष वाली फोटोलगाईं. कई लोगों को तो मतलब भी नहीं मालूम था. बस इसलिए लगा ली थी क्योंकि सुंदरदिख रहा था.6 रंग वाला 'फ्रीडम फ्लैग' (रेनबो वाला झंडा) गिल्बर्ट बेकर ने बनाया था. 65 साल केगिल्बर्ट की 31 मार्च 2017 को नींद में मौत हो गई. दुनिया भर में LGBT समुदाय औरमूवमेंट से जुड़े लोग शोक में है. आइए जानते हैं क्यों खास है LGBT का ये झंडा औरकौन थे इसे बनाने वाले गिल्बर्ट बेकर.क्यों खास है ये झंडाLGBT की पहचान बन चुके इस झंडे में अब 6 रंग हैं. इसे बनाए जाते समय इसमें 8 रंगथे. इन सभी रंगों का खास मतलब है और इनमें से जो रंग हटाए गए हैं उनके पीछे भी रोचककहानी है.शुरुआत में इसमें ये आठ रंग थे और इनका मतलब था- गुलाबी - सेक्सुअलटीलाल - ज़िंदगीनारंगी - देख-भालपीला- धूपहरा - प्रकृतिफिरोज़ी - कलानीला- भाईचाराबैंगनी - मानवता गुलाबी रंग को झंडे से इसलिए हटाना पड़ा क्योंकी उस दौर में हॉटपिंक कलर का कपड़ा बहुत महंगा पड़ता था. और बड़े स्तर पर झंडे के प्रोडक्शन मेंइससे दिक्कत आ रही थी. इसके बाद झंडे में सात रंग रह गए थे. जिससे झंडे को बीच सेदो हिस्सों में बांटना संभव नहीं था. इसके चलते फ्लैग को कई डिज़ाइन्स में इस्तेमालनहीं किया जा सकता था. इसके बाद झंडे से फिरोज़ी रंग भी हटा दिया गया और नीले रंगको भी बदल कर गहरा कर दिया गया. फाइनली 6 रंगों के साथ इस्तेमाल होने वाला ये झंडादुनिया भर में पॉपुलर हुआ. फ्रीडम फ्लैग अब दुनिया के सबसे ज़्यादा प्रसिद्धसिंबल्स में से एक है.फौज से रिटायरमेंट, झंडा बनाना और दोस्त की हत्यागिलबर्ट ने दो साल अमेरिकन आर्मी में नौकरी की. इसके बाद डिस्चार्ज लेकरसैनफ्रांसिस्को में रहने लगे. 70 के दशक में सैनफ्रांसिस्को में युद्ध विरोधी और गेप्राइड मूवमेंट शुरू हुआ था. गिलबर्ट के दोस्त हार्वे मिल्क इस आंदोलन के नेताओंमें से एक थे. गिलबर्ट हार्वे के साथ आंदोलन में शामिल हो गए.फौज छोड़ने के बाद गिलबर्ट ने टेलरिंग सीखी थी. हार्वे मिल्क को इस आंदोलन के लिएएक प्रतीक चाहिए था. गिल्बर्ट ने अपनी टेलरिंग के हुनर का इस्तेमाल करते हुए उनकेलिए कई बैनर और 8 रंगों वाला ये रेनबो झंडा बनाया. शुरू में हार्वे ने इस डिज़ाइनको रिजेक्ट कर दिया. गुलाबी त्रिकोण, नाज़ी बैंड से मिलता जुलता गे बैंड और ग्रीकसिंबल लैम्डा का भी आइडिया दिया गया था. मगर अंत में ये झंडा ही फाइनल हुआ. इसीआंदोलन के चलते बेकर के दोस्त हार्वे मिल्क 'ऑफिस ऑफ कैलीफोर्निया' में चुने गएपहले गे व्यक्ति बन गए. कुछ ही समय बाद 1978 में हार्वै मिल्क की हत्या हो गई. मगरये झंडा आंदोलन के प्रतीक के तौर पर पॉपुलर हो गया.दुनिया भर में लोकप्रियता और रोचक बातेंदुनिया भर में जहां भी LGBT समुदाय की बात होती है, ये रेनबो इस्तेमाल होता है.इसके अलावा वाइट हाउस, आइफिल टॉवर, एम्पायर स्टेट और ओपेरा हाउस जैसी दुनिया कीतमाम बड़ी इमारतों को रेनबो लाइट्स में रौशन किया जा चुका है. इस झंडे के साथ कई औररोचक बातें भी जुड़ी हैं.# पेरू के शहर कुस्को का झंडा भी फ्रीडम फ्लैग जैसा ही है.# हिंदुस्तान के मेहर बाबा के झंडे को देख कर भी फ्रीडम फ्लैग का धोखा होता है.मेहर बाबा का झंडा# अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विवादास्पद बयानों का विरोध करने के लिए झंडे की एकपट्टी को काला कर दिया गया था.ट्रंप के विरोध में फ्रीडम फ्लैग.# पाकिस्तान के गे ऐक्टिविस्ट्स के पास एक अलग झंडा भी है.पाकिस्तानी गे फ्लैग.गे राइट्स के लिए खुद भी काफी एक्टिव थे बेकरगिल्बर्ट बेकर गे राइट्स मूवमेंट को लेकर काफी सक्रिय रहे. वो खुद भी ड्रैग क्वीनके नाम से प्राइड परेड में हिस्सा लेते रहे. फ्रांस, वेनेजुएला और फिलीपीन्स जैसेदेशों के राष्ट्रपतियों के लिए भी उन्होंने रेनबो की डिज़ाइन्स बनाई. 2002 मेंन्यूयॉर्क के मेयर के साथ ये बेकर हैं.2002 में बेकर न्यूयॉर्क के मेयर के साथ. फोटो- रॉयटर्सबेकर व्हाइट हाउस में ओबामा के साथ. फोटो- न्यू सिविल राइट मूवमेंटये स्टोरी अनिमेष ने की थी।-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढें :इन हिंदी तस्वीरों से समझ लो 'गे' और 'लेस्बियन' कौन होते हैंLGBTQ 8: LGBT फैशन शो से महोत्सव की 'मर्यादा' तार-तार हुई?LGBTQ 7: 'मैं एक भारतीय गे मुसलमान हूं, यही मेरी पहचान है'LGBTQ 5: दुनिया के दस मशहूर ट्रांसजेंडर चेहरेLGBTQ 1: अब दोस्त को 'गांडू' नहीं कहताये प्राइड है, यहां लड़कों का लिपस्टिक लगाना 'शर्मनाक' नहीं होता