ट्रैफिक हवलदार कल्लन चच्चा की शायरी
प्रॉब्लम ये है जिस आदमी को जहां नहीं होना चाहिए, वो वहीं खूंटा गाड़ कर बैठा है. अगर आदमी को अपने इंट्रेस्ट से बाहर काम मिलता है तो कुछ यूं होता है.
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फोटो - thelallantop
हिंदुस्तान में अपने शौक को पेशा बना पाना निहायत मुश्किल काम है. आदमी वो छोड़ के सब कुछ बन जाता है जो वो बनना चाहता है. लल्लन प्रदेश के एक चचा हैं कल्लन. बचपन से क्रिएटिव थे मन में साध थी कलमतोड़ शायर बनने की. लेकिन हालात और घर वालों के दबाव ने पुलिस का नौकर बना दिया.
इन दिनों वह ट्रैफिक डिपार्टमेंट में हैं लेकिन शायरी का शौक ज्यों का त्यों है. एक दिन बीस मिनट उनके साथ खड़े हो जाओ तो बाकी शायरों को भूल जाओगे. एक दिन मैंने उनको चौराहे पर बाइक वालों की धरपकड़ करते देखा. वे डंडा फटकार रहे थे और शायरी के लहजे में यूं कहते जाते थे:

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