यह शिकायत बहुत पुरानी है कि बैंक, ब्याज दरें बढ़ाने में तो आगे रहते हैं, लेकिनघटाने की नौबत आए तो ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ वाला हाल हो जाता है. इस मामले मेंप्राइवेट बैंक तो माशा अल्लाह ! लेकिन अब सीन बदल रहा है. RBI की ओर से जारी ताजाआंकड़े बताते हैं कि पॉलिसी दरों (Repo rate) में कटौती का लाभ ग्राहकों तकपहुंचाने में बैंकों ने तेजी दिखाई है. इससे भी अच्छी बात यह कि राहत देने मेंप्राइवेट बैंक सरकारी बैंकों से आगे निकल गए हैं. यह संभव हुआ है ‘EBLR’ से जिसकानाम-पता बाद में समझाएंगे. अभी यह जान लीजिए कि मार्च 2020 से अक्टूबर 2021 के बीचबैंकों ने ब्याज दरों में लगभग उतनी कटौती कर डाली है, जितनी होनी चाहिए थी. ऐसाइसलिए कि RBI ने इस पीरियड में 115 बेसिस पॉइंट यानी 1.15 प्रतिशत की कटौती की थीऔर बैंकों ने औसतन 100 बेसिस पॉइंट यानी 1 प्रतिशत ब्याज घटाया है. आसानी से समझनाहो तो मानिए कि RBI ने 1 रुपये 15 पैसे की राहत दी थी और बैंकों ने 1 रुपये की राहतग्राहकों तक पहुंचा दी. अब आपको इसमें 15 पैसे की कोताही नजर आ रही हो तो यह जाननाजरूरी है कि मार्च 2020 से पहले करीब दो साल के भीतर RBI ने 1 रुपये 35 पैसे कीकटौती की थी, लेकिन बैंकों ने आप तक सिर्फ 15 पैसे की राहत पहुंचाई थी. प्राइवेटबैंकों ने ज्यादा दी राहत ? RBI के आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2020 से अब तक पॉलिसीरेट में जो 1.15 प्रतिशत की कटौती हुई उसे कस्टमर्स तक पहुंचाने के मामले मेंप्राइवेट बैंक सरकारी बैंकों से आगे निकल गए हैं. 115 बेसिस पॉइंट के मुकाबलेप्राइवेट बैंको ने 109 अंकों की कटौती की है, जबकि सरकारी बैंकों ने सिर्फ 85 अंकयानी 0.85 पर्सेंट ब्याज घटाया है. किस बैंक का लोन है सस्ता? हालिया कटौती का असरयह है कि आज आप होम या ऑटो लोन लेने जाएं तो एक बार सोचने लगेंगे कि प्राइवेट बैंकसे लें या सरकारी बैंक से. हालांकि पर्सनल लोन पर ब्याज के मामले में सरकारी बैंकोंने किफायत का अंतर कायम रखा है. फिलहाल ज्यादातर बैंकों के होमलोन और पर्सनल लोन केइंटरेस्ट रेट फेस्टिव सीजन ऑफर के लेवल पर बने हुए हैं. 75 लाख रुपये तक के लोन परHDFC 6.7 से 7.50 प्रतिशत ब्याज ऑफर कर रहा है. ICICI Bank और कोटक महिंद्रा बैंकके होमलोन रेट भी 6.7 से ही शुरू हो रहे हैं. सरकारी बैंकों के रेट पर नजर डालें तोSBI, BOB, PNB के होमलोन रेट भी 6.7 से ही शुरू हो रहे हैं. हालांकि सरकारी बैंकप्रोसेसिंग फीस में छूट दे रहे हैं और रकम की कोई सीमा नहीं रखी है. दूसरी ओरपर्सनल लोन के मामले में SBI, CBI, UBI, PNB जैसे सरकारी बैंक 5 साल के लिए 5 लाखरुपये के लोन पर 8.90 से 9.15 प्रतिशत तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं. वहीं, सभी प्राइवेटबैंकों के पर्सनल लोन का ब्याज 10 प्रतिशत से ज्यादा है. हालांकि इस मायने में यहकम है कि हाल तक ये रेट 14-16 प्रतिशत तक हुआ करते थे. यहां दिए गए सभी रेट 2 नवंबरतक के बदलावों पर आधारित हैं और आपको लोन लेने से पहले संबंधित बैंक से रेट कन्फर्मकर लेना चाहिए. जादू की छड़ी भी जान लें जिस EBLR के चलते बैंकों के रेट तेजी सेघटने लगे हैं, उसका पूरा नाम है - External Benchmark Lending Rate. इसे इस तरहसमझिए कि पहले हर बैंक का अपना एक बेंचमार्क रेट हुआ करता था, जिसके आधार पर वहऑटो, होम, पर्सनल लोन के रेट तय करता था. मसलन, बैंक का बेंचमार्क रेट अगर 6प्रतिशत था तो उससे 8 प्रतिशत ऊपर पर्सनल लोन देता था, जो 14 प्रतिशत हो जाता था.इसलिए इसे इंटरनल बेंचमार्क कहते थे. अक्टूबर 2019 में RBI ने बैंकों के रेट कोबहुत हद तक REPO रेट से जोड़ दिया और एक तरह से बैंकों को विवश किया कि इसमें जितनीकटौती होगी, लोन पर रेट भी उतना ही घटाना होगा. लगे हाथ REPO को भी समझते चलिए.जैसे आप बैंक से लोन लेते हैं और वह एक तय रेट से ब्याज वसूलता है, ठीक वैसे ही येबैंक रोजमर्रा की जरूरतों के लिए RBI से लोन लेते हैं और ब्याज चुकाते हैं. जिस रेटपर वे ब्याज चुकाते हैं, उसी को REPO रेट कहते हैं. ऐसे में आम आदमी के लिए भी यहजानना आसान हो गया कि कब-कब ब्याज दरें घटी हैं और उसके बैंक ने कितनी राहत दी है.