"दिखा दिया न अपना असली रंग?" कोई विरला ही शख्स होगा जिसने अपनी ज़िंदगी में ये बातकभी न कभी, किसी न किसी को न कही हो. किसी की बेईमानी हो, वादाखिलाफी हो याषड़यंत्र. जब-जब किसी ने उम्मीद के खिलाफ कोई हरकत की है उसके संदर्भ में ये बातज़रूर कही गई है. लेकिन इसका मतलब क्या है? क्या धोखा देने के बाद आदमी का रंग बदलजाता है? काले/गोरे से नीला-पीला हो जाता है? नहीं. असल बात कुछ और है. आइए बतातेहैं.ये उस ज़माने की बात है जब दुनिया भर में कहीं न कहीं युद्ध होता ही रहता था. हवाईजहाज़ का अविष्कार नहीं हुआ था लेकिन पानी के जहाज़ अवतरित हो चुके थे. सो लड़ाई सिर्फदो जगहों पर ही मुमकिन थी. ज़मीन पर और पानी में. ये कहावत पानी से ही आई है.जंगी जहाज़ों को दूर से पहचानना उनके रंगों से ही मुमकिन होता था.समंदर में होने वाले तमाम युद्धों में बड़े-बड़े जंगी जहाज़ इस्तेमाल होते थे. हर जहाज़का अपना एक झंडा, उस झंडे की एक थीम हुआ करती थी. उस झंडे के कलर से उस पार्टी कीपहचान हुआ करती थी. जिन्होंने हाहाकारी सीरियल 'गेम ऑफ़ थ्रोन्स' देखा होगा, वो इसबात को समझ पा रहे होंगे. 'GOT' में हर हाउस का एक सिजिल हुआ करता है. जिसके झंडेपर कोई विशिष्ट आकृति होती है. झंडे का विशिष्ट रंग होता है. जो उनकी पहचान होताहै. ऐसे ही नौसेना के जहाज़ों का भी मामला था. उन पर फहराने वाले झंडे का रंग उनकीपहचान हुआ करती थी. इस रंग से ही झोल कर लेते थे लोग.गेम ऑफ़ थ्रोन्स के हाउसेस के झंडे.दुश्मन की रणनीति को नेस्तनाबूत करने के लिए उस वक़्त एक अनोखी युक्ति लड़ाई जाती थी.अपने झंडे का रंग छिपाकर सामने वाली पार्टी के रंग का झंडा लिया जाता. इससे होता येकि अगली पार्टी के जहाज़ के काफी करीब तक बेरोकटोक जाने का मौक़ा मिलता. अगले वालेलोग समझते कि ये उन्हीं की पार्टी का जहाज़ है. मामला तो तब खुलता जब आने वाले हमलाबोल देते. तब जा के समझ आता कि धोखा हुआ है. लेकिन तब तक देर हो चुकी होती.यहीं से ये कहने की शुरुआत हुई कि अपना असली रंग दिखा दिया. यानी जब धोखा दे दियातब जा के पता चला कि उनका असली रंग क्या था. झूठा रंग ओढ़कर धोखा देना और फिर असलीकिरदार में आना ही है 'असली रंग दिखाना'.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़े:ये होटल, मोटल और रेस्टोरेंट में फर्क क्या होता है?क्रिसमस के बाद वाले दिन को 'बॉक्सिंग डे' क्यों कहते हैं?'शैतान का नाम लो, शैतान हाज़िर', ये कहावत कहां से आई?रेलवे स्टेशनों में ये जंक्शन, टर्मिनस और सेंट्रल क्या होता है?वीडियो: समझिए रैंकिग पर्सेंटेज और पर्संटाइल का फर्क होता क्या है?