18 अप्रैल को लाहौर में ऐसा क्या हुआ कि #LahoreBurning ट्रेंड होने लगा?
कई पुलिसकर्मी भी अगवा कर लिए गए थे.
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तहरीक-ए-तब्बैक के समर्थकों ने लाहौर में 18 अप्रैल को खूब हिंसा की है. (तस्वीर: एपी)
18 अप्रैल 2021. जगह- लाहौर, पाकिस्तान. यहां की एक धार्मिक पार्टी है- तहरीक-ए-लब्बैक (TLP). इस पार्टी से जुड़े लोगों और इसके समर्थकों ने जमकर प्रदर्शन किया. इसी दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई. TLP के लोगों ने कई पुलिसकर्मियों को अगवा भी कर लिया गया. पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स मुताबिक़ उन्हें अब रिहा कर दिया गया है. पूरा मामला क्या है, आइए विस्तार से जानते हैं?TLP ने फ़्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से हटाने को लेकर 20 अप्रैल तक का वक्त दिया था. सरकार ने TLP के सबसे बड़े नेता साद हुसैन रिज़वी को हाल ही में गिरफ़्तार कर लिया था. इसके बाद पाकिस्तान में कई जगहों पर साद के सपोर्ट में लोग विरोध-प्रदर्शन करने लगे और धरने पर बैठ गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन प्रदर्शनों में कम से कम 4 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और हज़ारों लोग गिरफ़्तार किए गए. कई रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 12 तक बताई गई. इस हिंसा के बाद इमरान खान सरकार ने TLP पर बैन लगा दिया.

TLP की मांग है कि फ़्रांस के राजदूत को देश से निकाल दिया जाए. (तस्वीर: एपी)
पूरे मामले को लेकर पीएम इमरान खान ने ट्वीट कर लिखा-
मैं यहां के लोगों और विदेशों में रहने वाले लोगों को एक चीज़ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ. हमारी सरकार ने TLP के खिलाफ़ आतंक-विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की, जब उन्होंने राज्य को चुनौती दी और सड़कों पर हिंसा की. सरकारी अधिकारियों पर हमला किया. कोई भी कानून और संविधान से ऊपर नहीं हो सकता है.
इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों से कहा कि हम 130 करोड़ मुसलमानों के पैगंबर हमारे दिल में रहते हैं. उनके प्रति हम किसी तरह के अनादर और दुर्वव्यहार को बर्दाश्त नहीं कर सकते. पश्चिम के कुछ अतिदक्षिणपंथी राजनेता जानबूझकर ऐसा करते हैं. हम इन अतिवादियों से माफ़ी की मांग करते हैं.Let me make clear to people here & abroad: Our govt only took action against TLP under our anti-terrorist law when they challenged the writ of the state and used street violence & attacking the public & law enforcers. No one can be above the law and the Constitution.
— Imran Khan (@ImranKhanPTI) April 17, 2021

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान. (तस्वीर: एपी)
लाहौर पुलिस के प्रवक्ता आरिफ राणा ने 18 अप्रैल को हुई हिंसा को लेकर न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कहा कि 6 पुलिसकर्मी TLP के सपोर्टर्स द्वारा बंधक बनाए गए थे. इसमें से एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और दो पैरामिलिट्री के जवान शामिल थे.
आरिफ ने आगे बताया कि TLP कार्यकर्ताओं के पास हज़ारों लीटर पेट्रोल वाले दो फ्यूल टैंकर थे. वे सुरक्षा अधिकारियों पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे थे जिसके कारण 11 अधिकारी घायल हुए हैं.

TLP के लोगों ने कई पुलिसकर्मियों को अगवा भी कर लिया गया था जिन्हें अब रिहा कर दिया गया है. (तस्वीर: एपी)
पाकिस्तान में फ़्रांस विरोधी गतिविधियों को देखते हुए पिछले हफ्ते फ़्रांस ने अपने नागरिकों को सुरक्षा के मद्देनज़र अस्थायी रूप से पाकिस्तान छोड़ने की सलाह दी थी.
पैगंबर मुहम्मद के कैरिकेचर के शुरू हुआ सब
फ़्रांस में पैगंबर मुहम्मद के कैरिकेचर को लेकर हुई हत्याओं के बाद फ्रांसीसी सरकार ने कट्टर इस्लाम के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था. ज़हर उगलने वाले नेताओं और उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई. कई मस्जिदों पर ताला लगा दिया गया. इस बीच फ़्रांस में आतंकी हमले होते रहे. जैसे-जैसे हमलों की संख्या बढ़ी, फ़्रांस ने कट्टर इस्लाम के ख़िलाफ़ चल रही कार्रवाई को और तेज़ कर दिया.
इसका असर ये हुआ कि मुस्लिम देश बेहद गुस्सा हुए. उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों पर ‘इस्लामोफ़ोबिक’ होने का आरोप लगाया. कई मुस्लिम देशों में फ़्रेंच प्रोडक्ट्स का बहिष्कार होने लगा. सोशल मीडिया पर मैक्रों के ख़िलाफ़ कैंपेन चलने लगे. नाराज़ तुर्की ने फ़्रांस से अपना राजदूत वापस बुला लिया. गुस्सा तो पाकिस्तान में भी था. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मैक्रों के बयान को ‘इस्लाम पर हमला’ बता दिया. पाकिस्तान में मैक्रों के पुतले जलाए जाने लगे और फ़्रेंच एम्बैसडर को देश से निकालने की मांग उठने लगी.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों. (तस्वीर: एपी)
जब पाकिस्तान ने करवाई किरिकिरी
पाकिस्तान ने भी राजदूत को निकाला. लेकिन फ़्रांस के नहीं, बल्कि फ्रांस से. अपने राजदूत को. पाकिस्तान की नेशनल असेंब्ली ने एक प्रस्ताव पास कर अपने राजदूत को वापस बुलाने की मांग की. इस जल्दबाजी में वे यह बात भूल गए कि पिछले तीन महीने से फ़्रांस में उनका कोई राजदूत था ही नहीं. इस बात को लेकर पाकिस्तान सरकार की ख़ूब किरकिरी भी हुई.
TLP को जगह बनाने का बढ़िया मौका दिखा
नवंबर 2020 आते-आते फ़्रांस के खिलाफ़ विरोध काफी बढ़ गया था. TLP की आइडियोलॉजी है - कट्टर इस्लाम. उनका एक ही मकसद है, जो ईशनिंदा यानी पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताख़ी करे, उसे मौत की सज़ा दो. स्थापना के कुछ बरस के भीतर ही उन्हें अच्छा-खासा समर्थन मिलने लगा था. इनकी मांग थी कि फ्रांस के राजदूत को देश से निकाल दिया जाए.
मामला बढ़ता देख पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने एक हाई-प्रोफ़ाइल कमिटी बनाई थी. 16 नवंबर 2020 को इस कमिटी ने TLP की टॉप लीडरशिप से मुलाक़ात की. इसके बाद तय हुआ कि फ़्रांस के राजदूत को बाहर निकाला जाएगा. सरकार इस संबंध में संसद में प्रस्ताव पेश करेगी. अगले तीन महीनों के भीतर.

TLP के फाउंडर खादिम हुसैन रिज़वी और मौजूदा मुखिया साद हुसैन रिज़वी. (तस्वीर: एपी)
डील होते ही प्रदर्शन खत्म हुआ. और इस समझौते के तीन दिन बाद ही TLP के खादिम हुसैन रिज़वी की मौत हो गई. इसके बाद आए उनके बेटे साद हुसैन रिज़वी. साद, पिता की विरासत बढ़ाने में लग गए. जनवरी 2021 की शुरुआत में साद ने सरकार से कहा-
‘अगर आप अपना वादा भूल गए हैं, तो हमारा इतिहास याद कर लीजिये. फ़्रेंच राजदूत को बाहर निकालने के लिए आपके पास 17 फ़रवरी तक का समय है.’मामला बढ़ा. सरकार ने फिर से TLP से बात की. नई डेट मिली 20 अप्रैल. लेकिन डेडलाइन से ठीक पहले TLP के मुखिया साद हुसैन रिज़वी को पुलिस ने लाहौर में गिरफ़्तार कर लिया था. साद रिज़वी एक जनाज़ा पढ़वा कर वापस लौट रहे थे. तभी उनकी कार को एलीट फ़ोर्स की एक यूनिट ने रोक दिया. फिर साद को अपनी गाड़ी में बिठाकर ले गये. जैसे ही गिरफ़्तारी का वीडियो सोशल मीडिया पर आया, हर तरफ हंगामा खड़ा हो गया. इसके बाद TLP के नेताओं और कई धार्मिक पार्टियों ने अपने समर्थकों को बाहर आने के लिए कहा और हिंसा भड़कती चली गई.

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