मोदी की पटना रैली और उसी दिन सीरियल बम ब्लास्ट, पूर्व DGP अभयानंद ने पूरी कहानी बता दी
पूर्व डीजीपी का कहना है कि उन्हें इस बात का पूरा विश्वास था कि गांधी मैदान में हुए धमाकों की रेंज से मंच सुरक्षित दूरी पर था और नरेंद्र मोदी को इन धमाकों से कोई खतरा नहीं था.

27 अक्टूबर, 2013 को पटना (Patna) के गांधी मैदान (Gandhi Maidan serial blast) में बीजेपी की हुंकार रैली थी. इस रैली में उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) शामिल हुए थे. बीजेपी की रैली के दौरान गांधी मैदान और पटना रेलवे स्टेशन पर सीरियल धमाके हुए थे जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे. एनआईए कोर्ट में ये मामला करीब 8 सालों तक चला. जिसमें 27 अक्टूबर, 2021 को 10 में से 9 आरोपियों को दोषी करार दिया और एक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया.
इसी मामले में बिहार के तत्कालीन डीजीपी अभयानंद ने लल्लनटॉप के 'गेस्ट इन द न्यूजरूम' कार्यक्रम में विस्तार से बात की. पूर्व डीजीपी अभयानंद का कहना है कि जब भी कोई VIP आता है तो पुलिस को खुफिया विभाग से सटीक जानकारियां दे दी जाती हैं. लेकिन उस समय गांधी मैदान में मोदी की रैली से जुड़ी कुछ जानकारियां उन्हें नहीं मिली थी. जिस तरह की जानकारी मिली थी, उसी के मुताबिक सुरक्षा इंतजाम कर दिए गए. पूर्व डीजीपी ने आगे बताया,
उन्होंने ने आगे बताया कि जहां एक ओर ये सब हो रहा था, वहीं दूसरी ओर मंच ओर भाषण की तैयारी हो रही थी. अभयानंद ने बताया,
अभयानंद कहते हैं,
यानी जिस मंच पर मोदी भाषण देने वाले थे, वहां से ये ब्लास्ट काफी दूर हुए थे. अभयानंद का कहना है कि उन्हें इस बात पर पूरा विश्वास था कि सुरक्षित इलाके में एक भी बम प्लांट नहीं किया गया है और ऐसा हुआ भी. अभयानंद ने बताया कि जितने भी बम लगाए गए थे, वे झोले में डालकर जमीन के ऊपर ही रख दिए गए थे, कोई भी जमीन के अंदर गाड़कर नहीं रखा गया था. उन्होंने बताया कि उस समय वे पल-पल की घटना की सूचना सीएम नीतीश और साथ ही नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात गुजरात पुलिस के अधिकारियों को भी दे रहे थे.
कैसे पकड़े गए थे आरोपी?अभयानंद का कहना है कि जो आरोपी रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया था, उससे नजदीकी थाने में पूछताछ की जा रही थी. उन्होंने आगे बताया,
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने बताया कि 7 जुलाई की शाम तक झारखंड पुलिस की मदद से हमने हटिया से विस्फोटक और आरोपियों को पकड़ना शुरू कर दिया था. और ये विस्फोटक बिल्कुल वैसे थे, जैसे बोधगया ब्लास्ट और रेलवे स्टेशन ब्लास्ट में इस्तेमाल हुए थे. इसके बाद इस मामले की जांच NIA को सौंप दी गई और बिहार पुलिस ने इसे फॉलोअप नहीं किया था.
जब पूर्व डीजीपी से ये पूछा गया कि इस ब्लास्ट को अंजाम देने वाले अपराधी किस गैंग या संगठन से जुड़े हुए थे. इसपर उन्हें बताया कि ये लोग एक स्लीपर सेल से जुड़े हुए थे और उस समय पुलिस और खुफिया विभाग के पास इनके बारे में कोई जानकारी या सूचना नहीं थी.
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