CAA: तसलीमा नसरीन पर निर्मला सीतारमण ग़लती से मिस्टेक कर गईं !
एक्स डिफेंस मिनिस्टर का डिफेंस सिस्टम सही नहीं है. उन्हें लुढ़कती अर्थव्यवस्था पर ही फोकस रखना चाहिए.
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (बाएं) ने कह दिया कि राइटर तसलीमा नसरीन (दाएं) भारत की नागरिक हैं जबकि ये बात दुरुस्त नहीं है. फोटो: India Today
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निर्मला सीतारमण. फाइनेंस मिनिस्टर हैं. पहले डिफेंस मिनिस्टर थीं. 'डिफेंस' अभी भी करती हैं. सरकार का. ज़ाहिर है ये उनका काम है लेकिन कई बार वो गड़बड़ कर जाती हैं. जैसे कार की घटती बिक्री को उन्होंने मिलेनियल्स और ओला-उबर से जोड़ दिया था. जैसे प्याज की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने कहा कि मैं जिस परिवार से आती हूं वहां प्याज नहीं खाते.
जैसे...
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के फ़ायदे गिनाते हुए निर्मला सीतारण ने एक ग़लत उदाहरण दे दिया.
ये 'समझाने' के लिए कि हमारे देश ने पड़ोसी देशों के मुसलमानों को भी नागरिकता दी है, उन्होंने दो नाम लिए. एक पाकिस्तानी गायक अदनान सामी और दूसरा बांग्लादेशी राइटर तसलीमा नसरीन का. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के दोनों लोगों को भारत की नागरिकता दी गई है. उनका ज़ोर दोनों के 'मुसलमान' होने पर ज़्यादा था. दूसरे उदाहरण पर वो फिसल गईं. असल में तसलीमा नसरीन को भारत की नागरिकता नहीं मिली है.
इस बारे में बात करने से पहले जानते हैं उन्होंने क्या कहा?
चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारमण ने एक डेटा रखा. उन्होंने कहा,
मैडम कहां चूक गईं?
अदनान सामी का उदाहरण तो सही था. अदनान सामी को सिटिज़नशिप ऐक्ट, 1955 के तहत नागरिकता मिली है. इसके लिए 'Citizenship by Naturalisation' प्रावधान का इस्तेमाल हुआ. उन्होंने गृह मंत्रालय से मानवीय आधार पर नागरिकता की अपील की थी, जिसे मंज़ूर कर लिया गया.
लेकिन तसलीमा नसरीन को भारत की नागरिकता नहीं मिली है बल्कि वो रेज़िडेंस परमिट पर यहां रहती हैं.
इस्लामिक कट्टरपंथ, लज्जा और तसलीमा नसरीन
तसलीमा नसरीन बांग्लादेश की फेमिनिस्ट राइटर हैं. इस्लामिक कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ और महिलाओं के मुद्दों पर किताबें लिखी हैं. इस्लामिक कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ लिखने की वजह से उन्हें जान से मारने तक की धमकियां मिलती रही हैं. 1993 में उनकी किताब 'लज्जा' छपने के बाद ये धमकियां और तेज़ हो गईं. गालियां पड़ीं. बहिष्कार किया गया. इतना ज़्यादा कि 1994 में उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. तब से वो निर्वासन में जी रही हैं. प्रगतिशीलता का दावा करने वाले और कट्टरता का विरोध करने वाले खेमे में भी उनका समर्थन कम रहा. जुलाई, 2019 में उनके निर्वासन को 25 साल हो गए. इस बारे में उन्होंने ट्वीट किया था.

9 जुलाई, 2019 को तसलीमा नसरीन के निर्वासन के 25 साल हो गए.
2004 में भारत का रेज़िडेंस परमिट मिला
तसलीमा नसरीन स्वीडेन की नागरिक हैं. वो अमेरिका और यूरोप में भी रही हैं. भारत में 2004 से उन्हें रेज़िडेंस परमिट मिला. 2004 से 2007 तक वो कोलकाता में रहीं. कई इस्लामिक संगठनों ने उनसे देश छोड़ने को कहा. उनके ख़िलाफ़ फतवे जारी हुए. 2011 से वो नई दिल्ली में रह रही हैं. उनका परमिट बढ़ा दिया गया है.
तसलीमा नसरीन भारत का वीज़ा लेकर यहां रहती हैं. वो यहां की नागरिक नहीं हैं. भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान भी नहीं है. हालांकि तसलीमा नसरीन ये इच्छा ज़ाहिर करती रही हैं कि उन्हें भारत की स्थायी नागरिकता मिले. तसलीमा नसरीन राइटर होने के अलावा फिजीशियन भी हैं. वो महिलाओं के मुद्दों, मानवाधिकार, स्वतंत्रता, इस्लामिक कट्टरपंथ और पितृसत्ता को लेकर लगातार ट्विटर पर भी सक्रिय रहती हैं. ट्विटर पर ही उन्होंने CAA का समर्थन किया था लेकिन कहा था कि इसमें उन मुसलमानों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो धार्मिक रूप से प्रताड़ित हैं.
इससे एक बार फ़िर पता चला कि 'एक्स' डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण का डिफेंस सिस्टम सही नहीं है. उन्हें लुढ़कती अर्थव्यवस्था पर ही फोकस रखना चाहिए.
बजट से पहले नीति आयोग की मीटिंग में निर्मला सीतारमण क्यों नहीं आईं?
जैसे...
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के फ़ायदे गिनाते हुए निर्मला सीतारण ने एक ग़लत उदाहरण दे दिया.
ये 'समझाने' के लिए कि हमारे देश ने पड़ोसी देशों के मुसलमानों को भी नागरिकता दी है, उन्होंने दो नाम लिए. एक पाकिस्तानी गायक अदनान सामी और दूसरा बांग्लादेशी राइटर तसलीमा नसरीन का. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के दोनों लोगों को भारत की नागरिकता दी गई है. उनका ज़ोर दोनों के 'मुसलमान' होने पर ज़्यादा था. दूसरे उदाहरण पर वो फिसल गईं. असल में तसलीमा नसरीन को भारत की नागरिकता नहीं मिली है.
इस बारे में बात करने से पहले जानते हैं उन्होंने क्या कहा?
चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारमण ने एक डेटा रखा. उन्होंने कहा,
पिछले 6 सालों में 2838 पाकिस्तानी, 914 अफगानिस्तानी, 172 बांग्लादेशी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी गई, जिनमें मुसलमान भी शामिल हैं. 1964 से 2008 तक चार लाख श्रीलंका के तमिलों को नागरिकता दी गई. पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के 566 मुसलमानों को 2014 तक नागरिकता दी गई.उन्होंने आगे कहा,
2016 से 2018 के बीच 391 अफगानिस्तान मुसलमानों, 1595 पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता दी गई. 2016 के दौरान ही अदनान सामी को नागरिकता दी गई. ये एक उदाहरण है. तसलीमा नसरीन एक और उदाहरण हैं. इससे हमारे ख़िलाफ़ लगने वाले सभी आरोप ख़ारिज होते हैं.
FM in Chennai: 391 Afghanistani Muslims & 1595 Pakistani migrants were given citizenship from '16 to '18. It was during this period in '16, that Adnan Sami was given citizenship, it's an example. Taslima Nasreen is another example. This proves all allegations against us are wrong https://t.co/e2YkAmlsTo
— ANI (@ANI) January 19, 2020
मैडम कहां चूक गईं?
अदनान सामी का उदाहरण तो सही था. अदनान सामी को सिटिज़नशिप ऐक्ट, 1955 के तहत नागरिकता मिली है. इसके लिए 'Citizenship by Naturalisation' प्रावधान का इस्तेमाल हुआ. उन्होंने गृह मंत्रालय से मानवीय आधार पर नागरिकता की अपील की थी, जिसे मंज़ूर कर लिया गया.
लेकिन तसलीमा नसरीन को भारत की नागरिकता नहीं मिली है बल्कि वो रेज़िडेंस परमिट पर यहां रहती हैं.
इस्लामिक कट्टरपंथ, लज्जा और तसलीमा नसरीन
तसलीमा नसरीन बांग्लादेश की फेमिनिस्ट राइटर हैं. इस्लामिक कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ और महिलाओं के मुद्दों पर किताबें लिखी हैं. इस्लामिक कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ लिखने की वजह से उन्हें जान से मारने तक की धमकियां मिलती रही हैं. 1993 में उनकी किताब 'लज्जा' छपने के बाद ये धमकियां और तेज़ हो गईं. गालियां पड़ीं. बहिष्कार किया गया. इतना ज़्यादा कि 1994 में उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा. तब से वो निर्वासन में जी रही हैं. प्रगतिशीलता का दावा करने वाले और कट्टरता का विरोध करने वाले खेमे में भी उनका समर्थन कम रहा. जुलाई, 2019 में उनके निर्वासन को 25 साल हो गए. इस बारे में उन्होंने ट्वीट किया था.

9 जुलाई, 2019 को तसलीमा नसरीन के निर्वासन के 25 साल हो गए.
2004 में भारत का रेज़िडेंस परमिट मिला
तसलीमा नसरीन स्वीडेन की नागरिक हैं. वो अमेरिका और यूरोप में भी रही हैं. भारत में 2004 से उन्हें रेज़िडेंस परमिट मिला. 2004 से 2007 तक वो कोलकाता में रहीं. कई इस्लामिक संगठनों ने उनसे देश छोड़ने को कहा. उनके ख़िलाफ़ फतवे जारी हुए. 2011 से वो नई दिल्ली में रह रही हैं. उनका परमिट बढ़ा दिया गया है.
तसलीमा नसरीन भारत का वीज़ा लेकर यहां रहती हैं. वो यहां की नागरिक नहीं हैं. भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान भी नहीं है. हालांकि तसलीमा नसरीन ये इच्छा ज़ाहिर करती रही हैं कि उन्हें भारत की स्थायी नागरिकता मिले. तसलीमा नसरीन राइटर होने के अलावा फिजीशियन भी हैं. वो महिलाओं के मुद्दों, मानवाधिकार, स्वतंत्रता, इस्लामिक कट्टरपंथ और पितृसत्ता को लेकर लगातार ट्विटर पर भी सक्रिय रहती हैं. ट्विटर पर ही उन्होंने CAA का समर्थन किया था लेकिन कहा था कि इसमें उन मुसलमानों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो धार्मिक रूप से प्रताड़ित हैं.
इससे एक बार फ़िर पता चला कि 'एक्स' डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण का डिफेंस सिस्टम सही नहीं है. उन्हें लुढ़कती अर्थव्यवस्था पर ही फोकस रखना चाहिए.
बजट से पहले नीति आयोग की मीटिंग में निर्मला सीतारमण क्यों नहीं आईं?

