नया वित्त वर्ष हर साल की तरह कुछ नए बदलाव और जिम्मेदारियां लेकर आता है. 1 अप्रैल2022 से भी ऐसे कई बदलाव हो रहे हैं, जो हमारी जेब से लेकर बचत और कमाई पर असरडालेंगे. इनमें से कई बदलाव ऐसे भी हैं, जिनके बारे में हम आपको लगातार बताते रहेहैं और उम्मीद है कि उनसे निपटने की तैयारियां आपने समय रहते कर ली होंगी. बहरहाल 1अप्रैल से इनकम टैक्स, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, बैंकिंग, पोस्टऑफिस, पीएफ औरपेंशन तक के नियमों में कोई न कोई बदलाव हो रहा है. साथ ही कई ऐसे बदलाव भी हैं,जिनके मद्देनजर आप नए वित्त वर्ष में अपनी टैक्स और सेविंग प्लानिंग कर सकते हैं.आइए सरसरी नजर डालें इन बदलावों पर: इनकम टैक्स में होने वाले बदलाव 1. बजट और नएफाइनेंस बिल को अमली जामा पहनाते हुए नया वित्त वर्ष आपके लिए कई वित्तीय बोझ औरसहूलियतें लेकर आ रहा है. चूंकि हर नौकरीपेशा और कारोबारी अप्रैल के पहले दिन से हीनए वित्त वर्ष की टैक्स प्लानिंग में जुट जाता है, ऐसे में सबसे जरूरी है कि निवेशसंबंधी कदम शुरू से ही उठाए जाएं. नए वित्त वर्ष में टैक्स पेयर्स के लिए रिटर्नसुधारने की विशेष सुविधा दी गई है. यदि आप किसी गड़बड़ी या गलती को सुधारकर फिर सेITR भरना चाहते हैं तो असेसमेंट ईयर के भीतर एक अपडेटड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.हालांकि इसके अपने कुछ चार्जेज भी हैं. 2. राज्य सरकार के कर्मचारी अब अपनी बेसिकसैलरी और महंगाई भत्ते के 14 पर्सेंट तक नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) योगदान के लिएसेक्शन 80CCD (2) के तहत आयकर कटौती का दावा कर सकेंगे. इससे उन्हें वह सुविधाहासिल होगी, जिसका फायदा अब तक केवल केंद्र सरकार के कर्मचारी उठाते थे. 3. पहलीअप्रैल से क्रिप्टोकरंसी से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत इनकम टैक्स लागू हो जाएगा.इतना ही नहीं, इस पर 1 फीसदी टीडीएस (TDS) भी लगेगा. लेकिन टीडीएस का प्रावधानतुरंत न लागू होकर 1 जुलाई 2022 से प्रभावी होगा. क्रिप्टो में निवेश करने वालों केलिए एक और कड़ा प्रावधान इंतजार कर रहा है. बजट प्रावधानों में थोड़ा और संशोधनकरते हुए सरकार ने व्यवस्था की है कि एक क्रिप्टो एसेट में हुए नुकसान को दूसरेएसेट में लाभ के अगेंस्ट सेटऑफ नहीं किया जा सकता. मसलन आप बिटकॉइन में एक लाखरुपये गेन करते हैं और किसी दूसरी क्रिप्टो करंसी, जैसे लकी ब्लॉक या सोलाना, मेंएक लाख गंवा बैठते हैं तो इनकम टैक्स भरते समय एक गेन को दूसरे लॉस में एडजस्ट नहींकर पाएंगे. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स में बदलाव 1 अप्रैल से 20 करोड़ रुपये सेज्यादा टर्नओवर वाले दुकानदारों, कंपनियों या सर्विस प्रोवाइडर्स के लिएई-इनवॉइसिंग (E-Invoicing) अनिवार्य हो रही है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्टटैक्सेस (CBIC) के आदेश के मुताबिक 20 करोड़ रुपये सालाना से ऊपर टर्नओवर वालेकारोबारी सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक बिल जारी करेंगे. ई-इनवॉइसिंग के तहत बिलिंग ऑनलाइन औररियल टाइम में होती है. यानी बिलिंग में दर्ज आंकड़े जीएसटी पोर्टल पर भी दर्ज होतेजाते हैं. इससे बोगस ट्रेडिंग या फेक बिलिंग की संभावना कम होगी और टैक्स चोरी परलगाम कसेगी. इसके अलावा जीएसटी में रजिस्टर्ड करीब 1.4 करोड़ कारोबारियों कीअलग-अलग कैटेगरीज में कुछ नए नियम भी हर साल की तरह पहली अप्रैल से लागू होंगे.प्रोविडेंट फंड के दो खाते जैसा कि हम जानते हैं कि पीएफ पर ब्याज टैक्स फ्री होताहै. लेकिन अब ऐसा एक सीमित दायरे में ही होगा. यानी कर्मचारी की ओर से सालाना 2.5लाख रुपये तक योगदान की रकम पर ब्याज ही करमुक्त होगा, उससे ज्यादा योगदान के ब्याजपर टैक्स लगेगा. कितनी रकम का ब्याज टैक्सेबल होगा, इसे सरल करने के लिए 1 अप्रैलसे पीएफ खाते को दो भाग में बांटने का प्रावधान किया गया है. यानी जिनके खाते में2.5 लाख रुपये से ज्यादा का योगदान होता है, उनके लिए दूसरा खाता भी खुलेगा, जोटैक्सेबल होगा. ध्यान रखें कि 2.5 लाख की सीमा केवल कर्मचारी की ओर से होने वालेयोगदान की है, न कि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान मिलाकर. यानी कर्मचारी केमद में अगर 3 लाख का योगदान होता है तो पहले खाते में 2.5 लाख और दूसरे यानीटैक्सेबल खाते में 50,000 रुपये जमा होंगे. सरकारी कर्मचारियों के जीपीएफ मेंयोगदान पर करमुक्त सीमा 5 लाख रुपये सालाना है. एक बार फिर ध्यान दिला दें कि टैक्सजमा होने वाली रकम पर नहीं, बल्कि उसके ब्याज पर लगना है. बैंकिंग रूल्स में भीबदलाव एक अप्रैल से जहां कई बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरीकरने जा रहे हैं, वहीं कुछ बैंकों ने सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की सीमा बढ़ादी है. 1 अप्रैल से एक्सिस बैंक के सैलरी या सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस कीसीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दी जाएगी. बैंक ने फ्री कैशट्रांजैक्शन की सीमा भी बदली है. अब इसे चार फ्री ट्रांजैक्शन या 1.5 लाख रुपये करदिया गया है. वहीं पंजाब नेशनल बैंक ने 10 लाख और उससे अधिक के चेक के लिएवेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक (ICICIbank), बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) सहित कई बैंकोंने कोविड राहत के तहत स्पेशल एफडी योजना शुरू की थी. इसके तहत सीनियर सिटीजंस कोएफडी पर ज्यादा ब्याज मिल रहा था. कई बैंकों ने इसे बंद करने की बात कही है. डाकघरस्कीमों में कैश बंद डाकघर की बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए 1 अप्रैल सेजरूरी होगा कि उन्हें मिलने वाला ब्याज सिर्फ बैंक खाते में ही आए. यानी ब्याज काभुगतान कैश में नहीं होगा. पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS), सीनियर सिटीजन्ससेविंग्स स्कीम (SCSS) और टर्म डिपॉजिट काउंट्स पर ब्याज या तो इंडिया पोस्ट बैंकके खाते में मिलेगा या किसी भी अन्य बैंक के खाते में, बशर्ते कि वह उस स्कीम सेलिंक्ड हो. म्युचुअल फंड में नो-चेक 1 अप्रैल से म्यूचुअल फंडों में निवेश के लिएभुगतान भी सिर्फ नेट बैंकिंग या यूपीआई पेमेंट के जरिए हो सकेगा. कैश, चेक, बैंकड्राफ्ट या किसी अन्य फिजिकल जरिए से भुगतान नहीं हो सकेगा. फिजिकल पेमेंट के दायरेमें चेक और ड्राफ्ट के अलावा ट्रांसफर लेटर्स, बैंकर्स चेक, पे ऑर्डर भी आएंगे.यानी इनके माध्यम से फंड में पैसा जमा नहीं हो सकेगा. होमबायर्स को अतिरिक्त छूटनहीं पहली बार घर खरीदने वालों को इनकम टैक्स के सेक्शन 80EEA के तहत टैक्स छूट काफायदा 1 अप्रैल 2022 से बंद हो जाएगा. साल 2019-20 के बजट में, केंद्र सरकार ने 45लाख रुपये तक की कीमत का घर खरीदने वालों के लिए होम लोन पर अतिरिक्त 1.50 लाखरुपये डिडक्शन की घोषणा की थी. बाद में इसे अगले दो साल के लिए बढ़ा दिया गया.लेकिन 1 फरवरी 2022 को पेश हुए बजट में इसे एक्सटेंड नहीं किया गया है. यानी ऐसे घरखरीदारों को वित्त वर्ष 2022-23 से इनकम टैक्स में यह एक्स्ट्रा डिडक्शन हासिल नहींहोगा.