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गुंडा हीरोइन की इज्जत कैसे लूटता है. बच्चे ने ऐसे जाना

फिल्म चल रही है. रंजीत हीरोइन पर चढ़ जाता है. अगले सीन में रेप पूरा हो चुका है. बच्चा भाई से पूछता है. इज्जत कैसे जाती है. भाई गर्दन का रहस्य समझाता है.

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3 मई 2016 (अपडेटेड: 3 मई 2016, 01:00 PM IST)
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हम छोटे थे. और हां. ऐसा हुआ था. इसी युग में. इसी लोक पर. तो हम छोटे थे. और हमसे बड़ा था हमारा बड़ा भाई. हम सिब्बू. वो दीपू. दीपू सिब्बू से दो बरस बड़ा. और किस्सा जब हुआ. तब सिब्बू 8 बरस का. तो दीपू हुए 10 के. सामने फिल्म चल रही थी. हीरोइन थी. सुंदर सी. चाची सी दिखती. हीरो नहीं था. विलेन था. दीपू दद्दा बोले. रंजीत है. रंजीत ने हीरोइन की इज्जत लूट ली. हमें नहीं पता था. हीरोइन ने बताया. लुटने के बाद अपने पापा से बोली. बाबूजी उस कमीने ने मेरी इज्जत लूट ली. हीरो सुन रहा था. गुस्से में घुन रहा था. पर हम सोच रहे थे. गुंडे ने हीरोइन की इज्जत कैसे लूटी. इज्जत कैसे लुटती है. अगर मैं किसी की इज्जत लूटना चाहूं तो क्या करूं. हमेशा की तरह गूगल देव के पुरातन वर्जन बड़े भाई के पास पहुंचा. दीपू दद्दा ने समझाया. देखो पहला सीन क्या था. हमने जवाब दिया. गुंडा आता है. हीरोइन के कपड़े कहीं कहीं से छीना झपटी कर फाड़ता है. फिर जबरदस्ती उसके ऊपर आता है. पुच्ची (पढ़ें किस) लेने की कोशिश करता है. हीरोइन को बदबू आती है. पक्का साला शराब पीकर आया होगा. बुरुस भी नहीं किया होगा उसके बाद. तो वो गर्दन हिलाती रहती है. नहीं नहीं भी बोलती है. मगर फिर गुंडा खूब ताकत लगाकर उसकी गर्दन में मुंह डाल देता है. और उसके बाद दिखाते हैं कि इज्जत लुट गई. अब बारी दीपू दद्दा की थी. वो बोले. देखो. लड़की लोग जो होती हैं. उनकी गर्दन में एक नस होती है. इज्जत नाम की. तो कोई उसे अगर जोर से काट लेता है. तो खून आने लगता है. बस इज्जत चली जाती है. दद्दा ने कहा. और हमने मान लिया. कुछ बरसों के लिए. जब तक उमेश जी आचार्य जी ने प्रजनन नहीं पढ़ा दिया. दद्दा ने ये भी कहा. इज्जत न लूटना किसी की. मम्मी बरोठे वाले कमरे मैं बैंड़कर मारेंगी. और फिर पापा को भी बताएंगी. पापा का नाम सुनकर हमारी पेशाब रुक जाती थी. जब पेशाब सधी तो अकल आ चुकी थी. कि लड़की से जबरदस्ती नहीं की जाती. किसी से भी नहीं की जाती. प्यार किया जाता है. जिसमें दोनों गुइंया बज्जू बराबर के होते हैं. कि इज्जत विज्जत जो जाती है, तो उस घोंचले की. जो ये बुरे काम करता है. लड़की या लड़के की नहीं. जो किसी के वहशीपने का शिकार हुआ है.   Cinema Banner अन्नू की आशिकी और डिंपी भाभी की प्रेग्नेंसी के किस्से सिनेमा हॉल में नहीं बाहर साइकिल पर असली फिल्म चल रही थी नर्गिस की जवानी का किस्सा, मंटो की जुबानी जब बच्चे की नजर में अमिताभ बच्चन मर गए

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