जाको राखे साइयां, मार सके ना CIA
कहा जाता है सीआईए ने 638 बार मारने की कोशिश की.

हमारी 12वीं कक्षा की NCERT की किताबों में पढ़ाया जाता है – अमेरिका इस दुनिया का दादा है. लेकिन इस दादा की ठीक नाक के नीचे फिदेल कास्त्रो ने 11 अमेरिकी राष्ट्रपतियों को 'देखा'. आप फिदेल कास्त्रो की विचारधारा से सहमत या असहमत हो सकते हैं. आपमें से कुछ के लिए फिदेल कास्त्रो हीरो तो कुछ के लिए हत्यारा हो सकते हैं. लेकिन फिदेल का दुश्मन रहा अमेरिकी हुक्काम अपने जिस दुश्मन को चाह ले उसको ढूंढ निकालता है, मार डालता है. सीआईए ने फिदेल कास्त्रो को 638 बार मारने की कोशिश की. लेकिन फिदेल कास्त्रो हर बार बचकर आखिरकार 90 साल की उम्र में कुदरती मौत ही मरे.
सीआईए की कोशिशों पर एक बार फिदेल कास्त्रो ने कहा था, ‘अगर जान से मारने की कोशिशों से बचने का कोई ओलंपिक खेल होता तो गोल्ड मेडल मुझे ही मिलता.’ ये 638 कोशिशें सिर्फ उस समय तक की हैं जब फिदेल क्यूबा के राष्ट्रपति थे.
सीआईए वालों ने सिगार के शौक़ीन फिदेल के मुंह तक बारूद से भरा सिगार पहुंचाया, फिदेल की प्रेमिका से खाने में ज़हर मिलवाया और जेम्स बॉन्ड की फिल्मों से लेकर सावधान इंडिया तक के सारे तरीके आज़माए लेकिन आश्चर्यजनक तौर पर फिदेल हर बार बचते रहे.
1985 में आखिरकार फिदेल ने यह कहते हुए सिगार छोड़ दिया कि सिगार के साथ सबसे अच्छी चीज़ यही कर सकते हैं कि इन्हें अपने दुश्मनों को दे दो. बारूद भरा सिगार पकड़ाने का आइडिया न्यूयॉर्क पुलिस के एक अफसर का था. प्लान के मुताबिक सिगार पीते ही कास्त्रो का सिर उड़ जाता, लेकिन कास्त्रो को इस योजना का पता चल गया. एक बार सिगार में बोटुलिन नाम का ज़हर भी भर कर दिया गया था.
सिगार छोड़ने के बाद सीआईए ने कास्त्रो के अगले शौक़ तैराकी से मारने की कोशिश की. कास्त्रो की तैराकी करने की पसंदीदा जगह पर शंख जैसे आकार का बम पहुंचाकर. अमेरिकी अधिकारियों ने इस शंख की डिजाइन बेहद खूबसूरत बनाई थी ताकि कास्त्रो इसकी ओर खींचे चले आएं.
वैज्ञानिकों की धरती अमेरिका की एजेंसियों ने एक बार पेन में ज़हर भरकर पकड़ा दिया. पेन चुभने भर की देर थी कि कास्त्रो मर जाते.
मारने के प्लान फेल होने के बाद अमेरिका ने एक बार फिदेल कास्त्रो को पागल घोषित करवाने की भी कोशिश की. इस कोशिश में होना ये था कि फिदेल एक रेडियो स्टूडियो में इंटरव्यू देने जा रहे थे. स्टूडियो में कास्त्रो को एलएसडी – लेसर्जिक एसिड डाइथाईलमाईड से भरे सिगार मिलते. एलएसडी जैसे पदार्थ के प्रभाव में आकर कास्त्रो पागलों जैसी हरकतें करते और जनता कास्त्रो को पागल मान बैठेती. और तो और ऐसे-एेसे कैमिकल्स कास्त्रो तक पहुंचाए गए जिससे कास्त्रो की दाढ़ी के बाल उड़ जाएं और वो शारीरिक तौर पर कमज़ोर नज़र आने लगें !
लेकिन मारने की कोशिशों में जब तक दुश्मन प्रेमिकाओं को शामिल न करे तब तक उसको पूरा दुश्मन नहीं माना जाता. मारिता लोरेंज़, कास्त्रो की सहायिका और प्रेमिका थीं. गर्भवती होने के बाद मारिता बीमार पड़ गईं और अमेरिका चली गई. अमेरिका आने पर सीआईए ने मारिता को फुसला लिया और समझाया कि कास्त्रो तुम्हारा गर्भपात कराने वाला है. क्यों न तुम अमेरिका की भलाई के अपने दग़ाबाज़ प्रेमी को मौत की नींद सुला दो. बस तुम्हें ये करना है कि सीआईए के दिए हुए ज़हर की एक नन्हीं सी बूंद को कास्त्रो की दारू मिला देना है और भाग आना है. मारिया ने ज़हर की नन्हीं गोलियों को अपनी आईसक्रीम में छिपाकर रखा. लेकिन कास्त्रो को इसका भी पता चल गया. कहा जाता है कि कास्त्रो ने उस वक्त अपनी प्रेमिका के हाथ में बंदूक पकड़ा दी और कहा कि तुम मुझे मारने आई हो, मार दो ! मारिता लोरेंज़ ने बाद में एक साक्षात्कार में आगे की कहानी बताई. ‘कास्त्रो ने सिगार सुलगाया और अपनी आंखें बंद कर लीं. कास्त्रो को पता था कि मैं उसे नहीं मार सकती. हम दोनों एक-दूसरे को प्यार करते थे.’ मारिता ने गोलियां बाहर फेंक दी और कास्त्रो की बांहों में गिर गई.

मारिता लोरेंज़
एक बार सीताराम येचुरी क्यूबा यात्रा पर फिदेल के सामने झोला लेकर चले गए. तब फिदेल ने बताया कि मेरे सामने कोई झोला लेकर नहीं आता है. पता नहीं झोले में क्या हो. फिदेल के बचने में कई बार किस्मत ने भी साथ दिया. 1963 में फिदेल हवाना लिब्र में ठहरे हुए थे. सीआईए ने उन मिल्कशेक्स के अंदर तक ज़हर की गोलियां पहुंचा दी थी जिसे फिदेल कास्त्रो पीने वाले थे. लेकिन ज़हर की गोलियां फ्रीज़र से ही चिपकी रहीं और जब वेटरेस ज़हर सर्व करने वाली थीं गोलियां बिखर गईं.
कास्त्रो अमेरिका की इन कोशिशों को माकियावेल्ली की किताबों में पढ़ी हुई कोशिशें बताते थे. निक्कोला माकियावेल्ली इटली का अधिकारी था, उसकी किताब ‘राजा’ को कूटनीति की शानदार किताब माना जाता है. माकियावेल्ली को यूरोप का चाणक्य भी कहा जाता है.
ब्रिटेन में ‘638 वे'ज़ टू किल कास्त्रो’ नाम से डॉक्यूमेंट्री भी बनी है. जाको राखे साइयां मार सके ना CIA की कहावत चरितार्थ करते-करते खुद कास्त्रो को भी अचंभा होता था. अपने 90वें जन्मदिन पर इतनी बार दुनिया की सबसे शक्तिशाली एजेंसी से बचने पर कास्त्रो ने कहा था,’ये सब कोशिशों का नतीजा नहीं बस किस्मत की मर्ज़ी है.’
लेकिन किस्मत भी कुदरती चीज़ है और आखिरकार आंतों की समस्या से जूझते हुए फिदेल कास्त्रो कुदरती ढंग से दुनिया को अलविदा कह गए. 90 साल की उम्र में ठीक सीआईए की नाक के नीचे और सीआईए के देश से 90 किमी दूर छोटे से देश क्यूबा में...

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