फिल्मी बैडमैन को जो जान लेता है, गुडमैन कहने लगता है
गुलशन ग्रोवर के जन्मदिन पर पढ़ा जाए.
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फोटो - thelallantop
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पता नहीं हम कित्ती बार एक ही चीज को बताएंगे. लेकिन गुरू जो बात है सो बात है. चलो फिर बता देते हैं. सन 96 में हम जिंदगी में पहली बार थिएटर में पिच्चर देखे. नाम था दिलजले. हीरो थे अजय देवगन. विलेन थे शक्ति कपूर. महा पिसाच आदमी लगा था भाई. लेकिन विलेन की तरफ विलेन से ज्यादा दमदार एक आदमी लड़ता था. एक पुलिस वाले के रोल में थे गुलशन ग्रोवर. आज यानी 21 तारीख को गुलशन का बड्डे है. कल यानी 20 को दिलजले रिलीज हुई थी.
एक आंख में हरी वाली पट्टी. हाथ में पानी पूरी की पूरी प्लेट. और बार बार उसके साथ आता डायलॉग "जिंदगी का मजा तो खट्टे में है." भाईसाब तब तो लगता था कि ये मिल जाए तो हुर दें लाठी के हूरा से. लेकिन उसका डायलॉग हमेशा मुंह पर रहता था, कहो कसम खा ले.

चलो दिलजले का भूत छोड़ते हैं. बात गुलशन ग्रोवर की करते हैं. फिल्मी वाणी उनको बैड मैन कहती है. लेकिन दुनिया की फिल्म इंडस्ट्री, बॉलीवुड से हॉलीवुड तक वो गुड मैन हैं. एक्टिंग के लेवल पर तो गुड़ माने मिट्ठू हैं एकदम. अदाकारी के कायल उनके दुनिया भर में जानते हो क्यों हैं, उनकी डायलॉग डिलिवरी वर्ल्ड लेवल की है. और स्टाइल भी. इसलिए मित्थुन दा, सन्नी देवल और गोविंदा के जमाने में खूब जमे. खूब मार कुटैया करते रहे. हॉलीवुड में पहुंचे तो बवाल काट दिया.
खलनायकी के बारे में बहुत नहीं बतियाते हैं यार. बोर हो जाओगे. काहे कि 'हम पांच' उनकी पहली फिल्म थी. तब से वो गुंडा बनना शुरू किए, फिर बनते ही गए. हर पिच्चर के आखिर में गंदी मौत मरना पड़ता था. लेकिन फिर यार दिलवाले और शपथ की बात करनी जरूरी है. दिलवाले में "मामा, सपणा भी भाग गई" के टाइम जो हंसी आती है न कसम से कि क्या बताएं. और शपथ में जब दोनों हीरो को एक साथ धोता है तो मन करता है कि हीरो का साथ छोड़कर विलेन की साइड आ जाएं.

उसी जमाने की एक पिच्चर थी जिगर. उस फिल्म में ऐसा काम किया भाईसाब. कि सारे पुराने पाप धुल गए. उसमें कहिते थे "हम इनिस्पट्टर जरा दूजे किसिम के हैं." फिर अजय-करिश्मा की जोड़ी को मिलाने के लिए इत्ते प्रयास किए कि उतने में पत्थर से पानी निकल आता.
फंटूश में डबल रोल में जो जमाए थे कि क्या कहें. एक दुनिया में चिंदी चोर. दूसरी दुनिया में राजा साहेब. पुलिस जी पकड़ के जेल में डाल दिये तो बइठे रो रहे थे.


Image: starsunfolded
आज का दौर ये है कि इंडस्ट्री में जमा हर छोटा बड़ा आदमी किसी न किसी रास्ते से अपने बच्चों को धकेलने में लगा है. एक बार फेल हो जाए तो दो तीन बार और लॉन्च करते हैं. इस माहौल में तमाम बड़े बड़े बैनर्स का ऑफर ठुकरा दिया गुलशन ने. कि अभी इसको फिल्म नहीं करनी. गुलशन का कहना थे-
इतनी उठा पटक वाली पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ. स्ट्रगल भी कम नहीं किया. फिल्मों में आने से पहले थिएटर. फिर पहुंचे मुंबई. रोशन तनेजा एक्टिंग स्कूल में एडमिशन लिया. अनिल कपूर, संजय दत्त साथ थे पढ़ाई के वक्त. कोर्स पूरा करके उसी स्कूल में टीचर बन गए. सन 1980 में आई थी पिच्चर हम पांच. उससे करियर की शुरुआत हुई. आज उनके फेम का हाल ये है कि 400 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं. जाते जाते उनका एक्शन कम कॉमेडी सीन देखते जाओ.
https://www.youtube.com/watch?v=VJCARxpLy-8
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एक आंख में हरी वाली पट्टी. हाथ में पानी पूरी की पूरी प्लेट. और बार बार उसके साथ आता डायलॉग "जिंदगी का मजा तो खट्टे में है." भाईसाब तब तो लगता था कि ये मिल जाए तो हुर दें लाठी के हूरा से. लेकिन उसका डायलॉग हमेशा मुंह पर रहता था, कहो कसम खा ले.

चलो दिलजले का भूत छोड़ते हैं. बात गुलशन ग्रोवर की करते हैं. फिल्मी वाणी उनको बैड मैन कहती है. लेकिन दुनिया की फिल्म इंडस्ट्री, बॉलीवुड से हॉलीवुड तक वो गुड मैन हैं. एक्टिंग के लेवल पर तो गुड़ माने मिट्ठू हैं एकदम. अदाकारी के कायल उनके दुनिया भर में जानते हो क्यों हैं, उनकी डायलॉग डिलिवरी वर्ल्ड लेवल की है. और स्टाइल भी. इसलिए मित्थुन दा, सन्नी देवल और गोविंदा के जमाने में खूब जमे. खूब मार कुटैया करते रहे. हॉलीवुड में पहुंचे तो बवाल काट दिया.
खलनायकी के बारे में बहुत नहीं बतियाते हैं यार. बोर हो जाओगे. काहे कि 'हम पांच' उनकी पहली फिल्म थी. तब से वो गुंडा बनना शुरू किए, फिर बनते ही गए. हर पिच्चर के आखिर में गंदी मौत मरना पड़ता था. लेकिन फिर यार दिलवाले और शपथ की बात करनी जरूरी है. दिलवाले में "मामा, सपणा भी भाग गई" के टाइम जो हंसी आती है न कसम से कि क्या बताएं. और शपथ में जब दोनों हीरो को एक साथ धोता है तो मन करता है कि हीरो का साथ छोड़कर विलेन की साइड आ जाएं.

उसी जमाने की एक पिच्चर थी जिगर. उस फिल्म में ऐसा काम किया भाईसाब. कि सारे पुराने पाप धुल गए. उसमें कहिते थे "हम इनिस्पट्टर जरा दूजे किसिम के हैं." फिर अजय-करिश्मा की जोड़ी को मिलाने के लिए इत्ते प्रयास किए कि उतने में पत्थर से पानी निकल आता.
फंटूश में डबल रोल में जो जमाए थे कि क्या कहें. एक दुनिया में चिंदी चोर. दूसरी दुनिया में राजा साहेब. पुलिस जी पकड़ के जेल में डाल दिये तो बइठे रो रहे थे.

टफ डैड हैं गुलशन ग्रोवर
ये तो हुई फिल्मों की बात. अब थोड़ी पर्सनल लाइफ के बारे में जान लो. गुलशन सिंगल फादर हैं. अपने बेटे संजय के. उनकी शादी टूट गई थी. कुछ दिन के बड़े खराब रिश्तों के बाद. उसके बाद संजय को खुद पाला. लेकिन एक चीज बड़ी स्ट्रिक्टली फॉलो की. संजय को पढ़ाई से समझौता कर फिल्मों की तरफ नहीं जाने दिया.
Image: starsunfolded
आज का दौर ये है कि इंडस्ट्री में जमा हर छोटा बड़ा आदमी किसी न किसी रास्ते से अपने बच्चों को धकेलने में लगा है. एक बार फेल हो जाए तो दो तीन बार और लॉन्च करते हैं. इस माहौल में तमाम बड़े बड़े बैनर्स का ऑफर ठुकरा दिया गुलशन ने. कि अभी इसको फिल्म नहीं करनी. गुलशन का कहना थे-
मैंने एक विलेन के तौर पर पहचान बनाई. फिल्मों के लिए बैड मैन हूं. लेकिन असल जिंदगी में पूरी तरह शांत. मैं चाहता हूं कि मेरा बेटा भी मेरी इन क्वालिटीज को फॉलो करे. लेकिन फिल्मों से दूर रहे. मैं उसे एक्टर नहीं बनाना चाहता. उसे एक स्टेबल करियर देना चाहता हूं.लेकिन ये बयान साल दो साल पहले का है. अब खेला बदल गया है. संजय हॉलीवुड के एमजीएम स्टूडियो में काम कर रहे हैं. गुलशन ने हाल ही में कहा कि वे चाहते हैं बेटा बॉलीवुड में आकर उनके साथ काम करे. वो एक्टर नहीं है लेकिन फिल्मों के पेशे में ही है.
इतनी उठा पटक वाली पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ. स्ट्रगल भी कम नहीं किया. फिल्मों में आने से पहले थिएटर. फिर पहुंचे मुंबई. रोशन तनेजा एक्टिंग स्कूल में एडमिशन लिया. अनिल कपूर, संजय दत्त साथ थे पढ़ाई के वक्त. कोर्स पूरा करके उसी स्कूल में टीचर बन गए. सन 1980 में आई थी पिच्चर हम पांच. उससे करियर की शुरुआत हुई. आज उनके फेम का हाल ये है कि 400 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं. जाते जाते उनका एक्शन कम कॉमेडी सीन देखते जाओ.
https://www.youtube.com/watch?v=VJCARxpLy-8
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