छत्तीसगढ़ के CM रमन सिंह के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर 11 लाख से ज्यादा लाइक हैं. औरवहीं की एक पुलिस कांस्टेबल के फेसबुक पर सवा सात लाख से ज्यादा फॉलोवर हैं. इसकांस्टेबल का नाम है स्मिता टांडी. हालांकि CM के साथ स्मिता की तुलना करना बिल्कुलसही नहीं है, फिर भी स्मिता की पॉपुलैरिटी इतनी है कि लोग इन्हें दिल्ली मेंभी जानते हैं, हरियाणा में भी और यूपी में भी. और ये भी तब जब टांडी को फेसबुकएकाउंट बनाए हुए अभी बस 20 महीने ही हुए हैं.ऐसा भी नहीं है कि स्मिता टांडी का फेसबुक एकाउंट कोई PR देखता हो. टांडी के हिसाबसे लोग उनके फेसबुक पर लिखे गए पोस्ट को पसंद करते हैं इसलिए वो उनसे जुड़ते हैं.टांडी अभी बस 24 साल की हैं और उन्होंने 2011 में पुलिस ज्वाइन की थी.स्मिता अपना सारा सोशल मीडिया अपने सैमसंग J7 मोबाइल से ही मैनेज करती हैं. स्मिताकहती हैं कि नौकरी करते हुए लैपटॉप और डेस्कटॉप के कंपेयर में मोबाइल पर फेसबुकचलाना आसान होता है.फोटो - फेसबुकस्मिता फेसबुक के जरिए जरूरतमंद लोगों की मदद करती हैं. पर इसमें वो बड़ी सावधानीभी बरतती हैं. स्मिता एक हालिया मामले का जिक्र करते हुए कहती हैं कि कई बार लोग येजान जाने पर, कि मैं इस तरह मदद करती हूं, मुझसे मदद मांगने चले आते हैं जबकिउन्हें मेरी मदद की जरूरत भी नहीं होती. वो खुद इस काबिल होते हैं कि अपना काम याइलाज करवा सकें. फिर भी पैसे बच जाएं इसलिए मैं हमेशा मदद करने के पहले उस इंसान काफैमिली बैकग्राउंड और वो क्या करता है, ये सब चेक कर लेती हूं. और उसके अकाउंट कीजांच के बाद ही किसी की कोई मदद करती हूं.मदद करने के लिए स्मिता फेसबुक पोस्ट के लिए जरूरतमंद की समस्या को सोशल मीडिया पररखती हैं. कई बार वो खुद भी उस जरूरतमंद की पैसों से और दूसरे तरीकों से मदद करतीहैं. स्मिता बताती हैं, जब 2013 में वो पुलिस की ट्रेनिंग कर रही थी. उसी वक्त उनकेपिता बीमार हो गए थे. इलाज के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे. जिससे उनकी मौतहो गई थी. इसके बाद से स्मिता ने तय कर लिया वो ये काम करेंगीं. स्मिता के पिता भीपुलिस में कांस्टेबल ही थे. 2007 में एक दुर्घटना के बाद उन्होंने रिटायरमेंट लेलिया था.स्मिता कहती हैं, मैंने अपने पिता की मौत के बाद सोचा था कि इस तरह पैसे न मिलने केचलते हजारों लोगों की मौत हो जाती होगी. इसलिए मैंने ये काम शुरू किया. मैंने लोगोंकी समस्याओं का पता लगा लगाकर उन्हें फेसबुक पर पोस्ट करने को कहा. शुरू में तो लोगमेरी पोस्ट पर रिस्पॉन्ड भी नहीं करते थे. पर एक महीने बाद लोगों ने मेरे पोस्ट केबाद पैसे देने शुरू कर दिए.शादी के प्रस्ताव भी उनको आते हैं. ये पूछे जाने पर कि क्या अभी शादी का कोई प्लानहै, स्मिता हिचकती हैं और कहती हैं कि अभी उनको शादी करने में कम से कम 3 साल कावक्त है. कई बार उन्होंने लोगों के लिए सरकारी मदद भी जुटाई है. 2014 में स्मिता नेअपने दोस्तों के साथ ही मिलकर एक फेसबुक ग्रुप भी बनाया था. स्मिता के ग्रुप का नामहै जीवन दीपक. उनका कहना है कि कई बार लोग जानते नहीं हैं सरकारी योजनाओं के बारेमें, जिसके चलते उनको उस योजना के पैसे मिल नहीं पाते हैं. मैं उनकी भी मदद करतीहूं.स्मिता को पॉपुलर होने का ये नुकसान भी होता हैं. कई बार लोग उनको ट्रोल करते हैंया पर्सनल चैट पर आकर परेशान करते हैं. स्मिता इस बारे में कहती हैं, ऐेसे लोगों सेनिपटने के लिए मैं पहले एक दफे उन्हें समझाती हूं और अगर वो फिर भी नहीं मानते तोफिर मैं उन्हें डांटती हूं. और इसके बाद भी वो नहीं मानते तो मैं फेसबुक पर उनकीबातों या कमेंट को स्क्रीनशॉट के जरिए डालकर उन्हें जवाब देती हूं.फोटो - फेसबुकऐसा करने पर जो मेरे साथ जुड़े हुए हैं, वही लोग उन्हें सुधार देते हैं. कभी कोईलीगल एक्शन नहीं लेना पड़ा. वैसे भी मैं कमेंट बॉक्स को इग्नोर करती हूं. मैसेज औरकमेंट पर ज्यादा ध्यान नहीं देती. इसके अलावा शादी और वाट्सएप्प नंबर के लिए बहुतलोग परेशान करते हैं पर मैं ऐसे लोगों को इग्नोर करने की कोशिश करती हूं और इसकेअलावा अगर वो फिर भी नहीं मानते, तो कसके डांटती हूं और मेरे पुलिस में होने कामुझे फायदा मिलता है. लोग सुधर जाते हैं.स्मिता कहती हैं, मैं कुछ भी लिखूं, बहुत सोच-समझ कर लिखती हूं. फिल्में देखने कावक्त नहीं मिल पाता. न रुचि है फिल्मों में याद भी नहीं कि लास्ट कौन सी फिल्म देखीथी. वैसे 'हम साथ-साथ हैं' फेवरेट फिल्म है. सोशल इशू से जुड़ी हुई चीजें खूब पढ़तीहूं. इससे बहुत कुछ सीखने को मिलता है. बिना क्रॉसचेक किए कुछ नहीं लिखती. काफीसोच-समझकर वक्त देकर लिखती हूं.फोटो - फेसबुककहती हैं, वर्दी से इतर भी अच्छे कपड़े पहनने का मन करता है. स्मिता एक गार्ड काकिस्सा सुनाती हैं जिसकी बेटी प्रिया शुक्ला स्टोव फटने से जल गई थी. गार्ड के लिएट्रीटमेंट कराना पॉसिबल ही नहीं था. बहुत बुरे तरीके से जली हुई थी. जब उसे ले जायागया अस्पताल तब डॉक्टर ने बताया कि ये 75 परसेंट जल चुकी है. 8 लाख का खर्चा आनाथा.हमने पहचान के डॉक्टर्स से फ्री में दवा दिलवाई. करीब 2 लाख की मदद फेसबुक पर पोस्टडालने से आ गई थी. फिर हमने सरकारी मदद के लिए अर्जी दी. और बाकी की दवा फिर फ्रीमें हुई. उस लड़की के बचने के बाद बहुत खुशी हुई थी. हम केवल मदद करके रुक नहींजाते हैं. जब तक मरीज पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते, फॉलोअप लेते रहते हैं. उसकी मैंनेमदद की थी. कहती हैं उसे बचाकर बहुत खुशी मिली थी.हमारे ग्रुप जीवन दीपक के मेंबर अलग-अलग जगह जा जाकर भी मदद करते हैं. फेक लोगों सेबचने के लिए फेसबुक प्रोफाइल से लेकर बैंक अकाउंट तक हर बात जांच कर ही मदद करतेहैं. फैमिली बैकग्राउंड भी जांचते हैं.स्मिता कहती हैं कि पुलिस की नौकरी में कई प्रॉब्लम आती हैं, खासकर औरतों को. परकाम करना ही है. इस पर कभी भी किसी से बहस नहीं हुई. वैसे ही बात करके काम चल जाताहै. हाल ही में ये लॉन्च हुआ है. सोशल मीडिया अपियरेंस देखकर ही सलेक्शन हुआ है.हमारी हेल्पलाइन के वाट्सएप्प पर भी लड़कियां अपनी प्रॉब्लम्स शेयर करती हैं. हमारीटीम प्रॉब्लम्स सुलझाने में मदद करती है. चाहे जैसी भी हों. मेरे पर्सनल नंबर परशिकायत किसी ने नहीं की. हेल्पलाइन पर वॉट्सएप्प की कंप्लेन मैं ही देखती हूं. मेरापर्सनल नंबर ज्यादा लोगों के पास नहीं है.फोटो - फेसबुकपुलिस की नौकरी से इतर भी लोग मुझे जानते हैं किसी काम के लिए, इससे मुझे खुशी होतीहै. किसी को हमारे या हमारी टीम के जरिए मदद मिल रही है, ये जानकर खुशी होती है. एकबार किसी आपसी रंजिश में एक पड़ोसी ने एक परिवार का कत्ल कर दिया था. बच्ची बची थीबस. उसे चाकू लगा था. उसका भाई भी भाग गया. बच्ची एडमिट थी. मैं हमेशा उस बच्ची केसाथ थी, जब तक वो पूरी तरह ठीक नहीं हो गई. भाग गया था उसका भाई. जब तक पूरी तरहठीक नहीं हो गई, तब तक उसका हाल चाल लेती रही.मैं पूरी तरह से नॉर्मल रहती हूं. उनके साथ कोई सेलिब्रिटी वाला फील नहीं है. कोईमुझे ज्यादा दिन तक परेशान नहीं कर पाता. मैं इससे बहुत अच्छे से निपटना जानती हूं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -साइना नेहवाल का दिल तोड़ने वाला बयानस्टीव जॉब्स की जगह लेने के लिए टिम कुक बनना पड़ता हैगुरमीत राम रहीम सिंह इंसान ने बताया नारियल में पानी कौन भरता हैये लड़का एक्टर बनना चाहता है, मगर फिल्म में किस नहीं करेगाहास्य कवि शैल चतुर्वेदी : जिन्होंने दर्द अपने हिस्से रखा और हंसी सबको बांटी