तो क्या फेसबुक को इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप बेचना पड़गा?
अमेरिका के लगभग सभी राज्यों ने FB के साथ ऐसा क्या कर दिया कि दुनिया भर में हंगामा हो गया?
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मार्क ज़करबर्ग (तस्वीर: PTI)
फेसबुक. मार्क ज़करबर्ग की कंपनी. फेसबुक का विवादों से वही नाता है जो चूइंग ग़म का सिर के बालों से. माने दोनों को अलग करना नामुमकिन लगता है. और क्या भारत, क्या जर्मनी, विवाद दुनिया में कहीं भी इसका पीछा नहीं छोड़ते. हालिया मामला अमेरिका से जुड़ा है. यानी वो देश जहां की ये कंपनी है और जहां इसके मालिक रहते हैं.
दरअसल अमेरिका के 'फ़ेडरल ट्रेड कमीशन' और वहां के लगभग सभी राज्यों ने फेसबुक के खिलाफ दो अलग-अलग लॉ सूट दायर कर दिए हैं. इनमें फेसबुक पर साधनों का दुरुपयोग करने और अपनी ‘बॉय एंड बरी स्ट्रैटेजी’ के दम पर बाकी छोटे-बड़े प्रतिद्वंदियों को अपने रास्ते से हटाने और फलने-फूलने से रोकने जैसे बड़े आरोप लगाए गए हैं.
पूरे केस को समझने से पहले ज़रूरी है कि पहले इन टेक्निकल टर्म्स का फटाफट मतलब जान लिया जाए-
# लॉ सूट-
जब एक या एक से ज़्यादा पक्ष अपने नुक़सान का हर्ज़ाना पाने के लिए दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ ‘सिविल कोर्ट’ जाते हैं तो इस प्रक्रिया को लॉ सूट कहा जाता है. अमेरिकी परिप्रेक्ष्य में किसी लॉ सूट और केस में ये अंतर है कि जहां लॉसूट सिविल कोर्ट में लड़ा जाता है, वहीं केस क्रिमिनल कोर्ट में.
# FTC-
FTC. फुल फ़ॉर्म, फ़ेडरल ट्रेड कमीशन. ये अमेरिका की एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है. US सिविल एंटीट्रस्ट लॉ का सही पालन किया जा रहा है या नहीं, इस पर पैनी नज़र रखना इसका काम है. साथ ही ये एजेंसी ग्राहकों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करती है. इस एजेंसी का मुख्यालय अमेरिका के वाशिंगटन DC में है. क्या इसकी तुलना भारत के कंज़्यूमर कोर्ट से की जा सकती हैय़ मूल बनावट और अधिकारों के आधार पर तो नहीं, लेकिन उद्देश्य के आधार पर हां.
वॉशिंटॉन डीसी स्थित FTC का मुख्यालय
# अटॉर्नी-जनरल-
अटॉर्नी जनरल, अमेरिकी फेडरल यानी संघीय सरकार का चीफ लॉयर और 'यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस' का प्रमुख होता है. इनकी नियुक्ति सीधा अमेरकी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. साथ ही अमेरिका के सभी 50 राज्यों के भी अपने-अपने स्टेट अटॉर्नी जनरल हैं जो उस राज्य के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाते हैं.
# एंटी ट्रस्ट लॉ-
एंटी ट्रस्ट का हिंदी अर्थ होता है अविश्वास. यूं एंटी ट्रस्ट लॉ अमेरिका के संदर्भ में देखें तो ये एक अम्ब्रेला कॉन्सेप्ट है. मतलब बहुत सारे राज्यों और केंद्र के विभिन्न नियम, कायदे-कानूनों का वन-स्टॉप-स्पॉट. इसके द्वारा व्यापार-वाणिज्य पर नियंत्रण और स्वस्थ कम्पटीशन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया जाता है जिससे अंततः ग्राहकों के हित में काम हो सके. अगर फ़ायदे में रहना कंपनियों का उद्देश्य है तो उन्हें क़ायदे में रखना एंटी ट्रस्ट लॉ का उद्देश्य है.
एक वाक्य में ऊपर के चारों कॉन्सेप्ट का रिवीज़न किया जाए तो, ‘एंटीट्रस्ट लॉ’ के आधार पर किसी कंपनी पर ‘FTC’ या 'अटॉर्नी जनरल’, ‘लॉसूट’ दायर करे तो उसे ‘एंटीट्रस्ट ट्रायल’ कहा जाएगा.
# बाय ऑर बरी-
मोनॉपली. जिसका सरलतम अर्थ ये हुआ कि किसी क्षेत्र में खरीदने-बेचने व्यापार करने पर एकाधिकार. जैसे अगर किसी गांव में अगर 4-5 परचून की दुकानें हैं, दो तीन कपड़े की दुकानें हैं और सिर्फ़ एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान 'कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स’ है, तो कहेंगे कि उस गांव में 'कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स’ की मोनॉपली है.
यूं मोनॉपली और कुछ नहीं बल्कि एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें पूरे बाजार को केवल एक व्यक्ति या फर्म कंट्रोल करने की स्थिति में हो. यानी वो मनचाही कीमत पर, अपनी शर्तों पर माल बेचने की स्थिति में हो, और इसका कोई विरोध भी न कर सके. अब कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स को ही ले लो, अगर वो किसी एक तार की सोल्ज़रिंग के 100 रुपये भी ले-ले तो लोग ‘दुखी-दुखी’ देने को तैयार हो जाएंगे. वरना उन्हें शहर जाना पड़ेगा.
तो क्या अब वो दिन नज़दीक हैं जब वॉट्सऐप के 'अबाउट' सेक्शन में, 'फ़्रॉम फेसबुक' नहीं लिखा होगा. (सांकेतिक तस्वीर: PTI/मनीष शर्मा/12 साल की जोशना कुमारी, वॉट्सऐप के माध्यम से अपनी पढ़ाई ज़ारी रख रही है.)
अब कचरा हमेशा सुनिश्चित करना चाहेगा कि मोनॉपली बनी रहे. ताकि वो 10 के बदले 100 वसूल सके. सोचिए अगर वहां पर एक दो और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान खुल जाएं तो? तो कंपटीशन हो जाएगा. या तो कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स को अपने दाम सस्ते करने होंगे या फिर उसकी दुकान ठप पड़ जाएगी.
लेकिन कचरा इसमें से कुछ नहीं करता. कचरा पैसे और ताकत के दम पर गांव की दूसरी दुकानों को या तो खरीद लेता है या फिर खत्म कर देता है. इसी खरीदने (buy) और खत्म (bury, जिसका हिंदी मतलब किसी कंपनी को दफनाना या मिटाना होता है) करने के खेल को इकोनॉमिक्स की भाषा में कहते हैं ‘बाय ऑर बरी’ स्ट्रेटेजी.
‘बाय ऑर बरी’ स्ट्रेटेजी के चलते किसी कमज़ोर कंपनी के पास शक्तिशाली मार्किट जायंट के आगे समर्पण करने के अलावा कोई और विकल्प रहता नहीं है.
अब आते हैं फेसबुक वाले मामले पर.
# मुश्किलें कहां से बढ़ीं
इस विवाद की शुरुआत साल 2012 से हुई मानी जा सकती है. जब फेसबुक ने इंस्टाग्राम को एक बिलियन डॉलर में खरीद लिया. मतलब आज के हिसाब से क़रीब 73 अरब रुपए. इसके दो साल बाद इसने वॉट्सऐप को 19 बिलियन डॉलर यानी क़रीब 1,400 अरब रुपये में खरीद लिया. ये डील सोशल मीडिया की दुनिया की सबसे बड़े एक्विज़िशंस में से एक थी.
फ़ास्ट-फ़ॉरवर्ड 9 दिसंबर, 2020. इस दिन फेसबुक के खिलाफ दो लॉ सूट: एक FTC और एक 48 अन्य राज्यों द्वारा, फाइल किए गए. दोनों में एक से ही आरोप हैं- FTC और अन्य राज्यों का यही मानना है कि फेसबुक ने इस स्ट्रैटेजी के अनुसार चलते हुए इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को अनैतिक तरीके से और कानून का उल्लंघन करते हुए खरीदा.
अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने आरोप लगाया, लेटिटा जेम्स (तस्वीर: AP)
इन आरोपों को और हवा देता है फेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग द्वारा 2008 में किया गया एक ईमेल, जिसका आज कल बहुत उल्लेख किया जा रहा है. इसमें उन्होंने उन्होंने एक जगह लिखा था, अब इस लॉसू ट में यदि कोर्ट ने पाया कि वाक़ई फेसबुक ने एंटी ट्रस्ट लॉ का उल्लंघन किया है तो ऐसी स्थिति में फेसबुक पर इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को बेचने तक की नौबत आ सकती है.
इस लॉ सूट को दोनों ही प्रमुख अमेरिकी राजनैतिक पार्टियों (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन) का समर्थन मिल रहा है. रिपब्लिकन पार्टी से सीनेटर और एंटी ट्रस्ट से जुड़ी एक सब-कमिटी के मुखिया, माइक ली ने पिछली सरकारों पर तंज करते हुए कहा, साथ ही उन्होंने कहा कि FTC (फेडरल ट्रेड कमीशन) ने पूर्व में फेसबुक को इससे जुड़े मामले में बरी किया था. मैं FTC को अपनी भूल सुधारने पर बधाई देता हूं.
डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य और न्यू यॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटा जेम्स ने फेसबुक के खिलाफ इस लॉ सूट का ऐलान करते हुए कहा,
तस्वीर 27 सितंबर, 2015 की है. मोदी और मार्क ज़करबर्ग की. कैलिफ़ोर्निया में FB के हेड क्वार्टर में. (PTI/सुभव शुक्ला)
उन्होंने एक पुरानी डील पर आज के अड़ंगे को ग़लत बताते हुए कहा कि, ऐसे तो सरकार अमेरिकी बाजार में एक बहुत गलत सन्देश देने जा रही है कि कोई डील कभी फाइनल नहीं होती.
दरअसल अमेरिका के 'फ़ेडरल ट्रेड कमीशन' और वहां के लगभग सभी राज्यों ने फेसबुक के खिलाफ दो अलग-अलग लॉ सूट दायर कर दिए हैं. इनमें फेसबुक पर साधनों का दुरुपयोग करने और अपनी ‘बॉय एंड बरी स्ट्रैटेजी’ के दम पर बाकी छोटे-बड़े प्रतिद्वंदियों को अपने रास्ते से हटाने और फलने-फूलने से रोकने जैसे बड़े आरोप लगाए गए हैं.
पूरे केस को समझने से पहले ज़रूरी है कि पहले इन टेक्निकल टर्म्स का फटाफट मतलब जान लिया जाए-
# लॉ सूट-
जब एक या एक से ज़्यादा पक्ष अपने नुक़सान का हर्ज़ाना पाने के लिए दूसरे पक्ष के ख़िलाफ़ ‘सिविल कोर्ट’ जाते हैं तो इस प्रक्रिया को लॉ सूट कहा जाता है. अमेरिकी परिप्रेक्ष्य में किसी लॉ सूट और केस में ये अंतर है कि जहां लॉसूट सिविल कोर्ट में लड़ा जाता है, वहीं केस क्रिमिनल कोर्ट में.
# FTC-
FTC. फुल फ़ॉर्म, फ़ेडरल ट्रेड कमीशन. ये अमेरिका की एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है. US सिविल एंटीट्रस्ट लॉ का सही पालन किया जा रहा है या नहीं, इस पर पैनी नज़र रखना इसका काम है. साथ ही ये एजेंसी ग्राहकों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करती है. इस एजेंसी का मुख्यालय अमेरिका के वाशिंगटन DC में है. क्या इसकी तुलना भारत के कंज़्यूमर कोर्ट से की जा सकती हैय़ मूल बनावट और अधिकारों के आधार पर तो नहीं, लेकिन उद्देश्य के आधार पर हां.
वॉशिंटॉन डीसी स्थित FTC का मुख्यालय
# अटॉर्नी-जनरल-
अटॉर्नी जनरल, अमेरिकी फेडरल यानी संघीय सरकार का चीफ लॉयर और 'यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस' का प्रमुख होता है. इनकी नियुक्ति सीधा अमेरकी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. साथ ही अमेरिका के सभी 50 राज्यों के भी अपने-अपने स्टेट अटॉर्नी जनरल हैं जो उस राज्य के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाते हैं.
# एंटी ट्रस्ट लॉ-
एंटी ट्रस्ट का हिंदी अर्थ होता है अविश्वास. यूं एंटी ट्रस्ट लॉ अमेरिका के संदर्भ में देखें तो ये एक अम्ब्रेला कॉन्सेप्ट है. मतलब बहुत सारे राज्यों और केंद्र के विभिन्न नियम, कायदे-कानूनों का वन-स्टॉप-स्पॉट. इसके द्वारा व्यापार-वाणिज्य पर नियंत्रण और स्वस्थ कम्पटीशन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया जाता है जिससे अंततः ग्राहकों के हित में काम हो सके. अगर फ़ायदे में रहना कंपनियों का उद्देश्य है तो उन्हें क़ायदे में रखना एंटी ट्रस्ट लॉ का उद्देश्य है.
एक वाक्य में ऊपर के चारों कॉन्सेप्ट का रिवीज़न किया जाए तो, ‘एंटीट्रस्ट लॉ’ के आधार पर किसी कंपनी पर ‘FTC’ या 'अटॉर्नी जनरल’, ‘लॉसूट’ दायर करे तो उसे ‘एंटीट्रस्ट ट्रायल’ कहा जाएगा.
# बाय ऑर बरी-
मोनॉपली. जिसका सरलतम अर्थ ये हुआ कि किसी क्षेत्र में खरीदने-बेचने व्यापार करने पर एकाधिकार. जैसे अगर किसी गांव में अगर 4-5 परचून की दुकानें हैं, दो तीन कपड़े की दुकानें हैं और सिर्फ़ एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान 'कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स’ है, तो कहेंगे कि उस गांव में 'कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स’ की मोनॉपली है.
यूं मोनॉपली और कुछ नहीं बल्कि एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें पूरे बाजार को केवल एक व्यक्ति या फर्म कंट्रोल करने की स्थिति में हो. यानी वो मनचाही कीमत पर, अपनी शर्तों पर माल बेचने की स्थिति में हो, और इसका कोई विरोध भी न कर सके. अब कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स को ही ले लो, अगर वो किसी एक तार की सोल्ज़रिंग के 100 रुपये भी ले-ले तो लोग ‘दुखी-दुखी’ देने को तैयार हो जाएंगे. वरना उन्हें शहर जाना पड़ेगा.
तो क्या अब वो दिन नज़दीक हैं जब वॉट्सऐप के 'अबाउट' सेक्शन में, 'फ़्रॉम फेसबुक' नहीं लिखा होगा. (सांकेतिक तस्वीर: PTI/मनीष शर्मा/12 साल की जोशना कुमारी, वॉट्सऐप के माध्यम से अपनी पढ़ाई ज़ारी रख रही है.)
अब कचरा हमेशा सुनिश्चित करना चाहेगा कि मोनॉपली बनी रहे. ताकि वो 10 के बदले 100 वसूल सके. सोचिए अगर वहां पर एक दो और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान खुल जाएं तो? तो कंपटीशन हो जाएगा. या तो कचरा इलेक्ट्रॉनिक्स को अपने दाम सस्ते करने होंगे या फिर उसकी दुकान ठप पड़ जाएगी.
लेकिन कचरा इसमें से कुछ नहीं करता. कचरा पैसे और ताकत के दम पर गांव की दूसरी दुकानों को या तो खरीद लेता है या फिर खत्म कर देता है. इसी खरीदने (buy) और खत्म (bury, जिसका हिंदी मतलब किसी कंपनी को दफनाना या मिटाना होता है) करने के खेल को इकोनॉमिक्स की भाषा में कहते हैं ‘बाय ऑर बरी’ स्ट्रेटेजी.
‘बाय ऑर बरी’ स्ट्रेटेजी के चलते किसी कमज़ोर कंपनी के पास शक्तिशाली मार्किट जायंट के आगे समर्पण करने के अलावा कोई और विकल्प रहता नहीं है.
अब आते हैं फेसबुक वाले मामले पर.
# मुश्किलें कहां से बढ़ीं
इस विवाद की शुरुआत साल 2012 से हुई मानी जा सकती है. जब फेसबुक ने इंस्टाग्राम को एक बिलियन डॉलर में खरीद लिया. मतलब आज के हिसाब से क़रीब 73 अरब रुपए. इसके दो साल बाद इसने वॉट्सऐप को 19 बिलियन डॉलर यानी क़रीब 1,400 अरब रुपये में खरीद लिया. ये डील सोशल मीडिया की दुनिया की सबसे बड़े एक्विज़िशंस में से एक थी.
फ़ास्ट-फ़ॉरवर्ड 9 दिसंबर, 2020. इस दिन फेसबुक के खिलाफ दो लॉ सूट: एक FTC और एक 48 अन्य राज्यों द्वारा, फाइल किए गए. दोनों में एक से ही आरोप हैं- FTC और अन्य राज्यों का यही मानना है कि फेसबुक ने इस स्ट्रैटेजी के अनुसार चलते हुए इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को अनैतिक तरीके से और कानून का उल्लंघन करते हुए खरीदा.
अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने आरोप लगाया, लेटिटा जेम्स (तस्वीर: AP)
इन आरोपों को और हवा देता है फेसबुक के सीईओ मार्क ज़करबर्ग द्वारा 2008 में किया गया एक ईमेल, जिसका आज कल बहुत उल्लेख किया जा रहा है. इसमें उन्होंने उन्होंने एक जगह लिखा था, अब इस लॉसू ट में यदि कोर्ट ने पाया कि वाक़ई फेसबुक ने एंटी ट्रस्ट लॉ का उल्लंघन किया है तो ऐसी स्थिति में फेसबुक पर इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को बेचने तक की नौबत आ सकती है.
इस लॉ सूट को दोनों ही प्रमुख अमेरिकी राजनैतिक पार्टियों (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन) का समर्थन मिल रहा है. रिपब्लिकन पार्टी से सीनेटर और एंटी ट्रस्ट से जुड़ी एक सब-कमिटी के मुखिया, माइक ली ने पिछली सरकारों पर तंज करते हुए कहा, साथ ही उन्होंने कहा कि FTC (फेडरल ट्रेड कमीशन) ने पूर्व में फेसबुक को इससे जुड़े मामले में बरी किया था. मैं FTC को अपनी भूल सुधारने पर बधाई देता हूं.
डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य और न्यू यॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटा जेम्स ने फेसबुक के खिलाफ इस लॉ सूट का ऐलान करते हुए कहा,
#इन सबमें फेसबुक का पक्ष भी जानते हैं:
फेसबुक की जनरल काउंसल जेनिफर नूस्टेड ने इस लॉ सूट को, 'Revisionist History’ यानी ऐतिहासिक घटनाओं का पुनः व्याख्याान बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि एंटीट्रस्ट कानून ‘सफल कंपनियों' को दंड देने के लिए नहीं बने हैं. इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की सफलता का श्रेय फेसबुक को देते हुए उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप तब सफल हुए जब उनपर फेसबुक का कई बिलियन डॉलर्स का इन्वेस्टमेंट लगा.तस्वीर 27 सितंबर, 2015 की है. मोदी और मार्क ज़करबर्ग की. कैलिफ़ोर्निया में FB के हेड क्वार्टर में. (PTI/सुभव शुक्ला)
उन्होंने एक पुरानी डील पर आज के अड़ंगे को ग़लत बताते हुए कहा कि, ऐसे तो सरकार अमेरिकी बाजार में एक बहुत गलत सन्देश देने जा रही है कि कोई डील कभी फाइनल नहीं होती.

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