कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता - बशीर बद्रगांव में किस्से बहुत सुने. आशिकी के. रुसवा होने के. लोगों की जुबानी. 'हमने तोऐसा सुना है' के इर्द गिर्द अफसाने ऐसे रच दिए जाते हैं कि उनके सामने फॉरेंसिकरिपोर्ट भी फेल हो जाए. कहा जाता है कि 'फलां की बेटी का फलां के लड़के से चक्कर चलरहा है'. और फिर जितने लोग उस किस्से को सुनाते, उसमें सबूत नए होते. बस कॉमन यहीहोता 'हमने सुना है.' इसके साथ ही एक टैग लाइन और जुड़ी रहती है. 'सुना है, मगर किसीसे कहना मत.' और जो बात किसी से नहीं कहने की हिदायत होती थी वही बात सबको पता होतीथी. जैसे गांव में कथा कराकर सुनाई गई हो. 'सोनम गुप्ता बेवफा है' का किस्सा भी उसी'किसी से कहना मत' से निकला है. जिसका ओर-छोर किसी को नहीं पता. बस नोट पर लिखा. औरसोशल मीडिया पर चढ़ गया. तीन ही शब्द चर्चा-ए-आम हो गए. मोदी, नोटबंदी, और सोनमगुप्ता. कई फेसबुक पेज बने. आईडी बनी. और संसद चलो इवेंट भी तैयार कर दिया गया.तो संसद बाद में जाना. पहले ये जान लीजिए कि सोनम गुप्ता क्या सोचती हैं इस बारेमें. हम उनका एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लेकर आए हैं. सोनम गुप्ता से हमने फेसबुक चैट परबात की. सोनम गुप्ता बेवफा है इसका सच क्या है? सच ये है कि राजू ने जो मेरे साथ किया, वोइस दुनिया के सामने आया नहीं अब तक, और हर बार की तरह दुनिया ने एक औरत को दोषीठहरा दिया. वो सच क्या है जो सामने नहीं आया? राजू शालू से मिलने जाता था मेरी पीठपीछे... मैंने सवाल किया तो. मुझे ही बदनाम कर दिया. मैं राजू से अब भी बहुत प्यारकरती हूं. इल्जाम ये है कि आप किसी मुसलमान लड़के से मिलती थीं? मैं बस मिलती थी.उसे ये दिखने के लिए कि जो मैं महसूस कर रही थी. वो भी करे. पर उसने इस बारे मेंकुछ बात नहीं की. बस नोट पर लिख कर फरमान जारी कर दिया. सौकत के और मेरे बीच ऐसाकुछ नहीं था. और उसकी अम्मा ने भी शालू के बारे में कहा, उस सबका क्या? उसके बारेमें तो कुछ नहीं कहा गया. मुझे रुसवा कर डाला. अम्मा ने क्या कहा? अम्मा ने कहा किवो नहीं चाहती कि शालू उनके घर आए! अम्मा मुझे ही चाहती थी. मैं तो हर चीज़ के लिएतैयार थी, फिर जब चीजें बढ़ गईं तो मैंने सब खत्म कर दिया. पर कुछ दिनों के लिए, परराजू ने मेरे साथ ये सब कर दिया. अभी आपने कहा कि सौकत और आपके बीच कुछ नहीं था?हां कुछ नहीं था. पर जब राजू मुझे छोड़ चुका था, तो मुझे तो आगे बढ़ना ही था. मुझेधर्म परिवर्तन के लिए कहा गया. तो आप सौकत के साथ रहना चाहती थीं, मगर धर्म बीच मेंआ गया? जी, पर ये फैसला मैंने शालू के आने के बाद किया और जब मैं आगे बढ़ने लगी मुझेबेवफा करार दे दिया. अब ना तो मेरे पास राजू है और सौकत भी मुझे छोड़ चुका है. मैंअब क्या करूं, बताइए? लेकिन सौकत के साथ ही क्यों? वहां तो और भी मुश्किल हो सकतीथी, क्योंकि तीन बार तलाक का मामला वैसे ही चर्चा में है. उससे डर नहीं था आपकोजहां मोहब्बत होती है वहां कोई डर नहीं होता सर. बहुत सी फर्जी सोनम गुप्ता सोशलमीडिया में आ गई हैं, इससे असली सोनम गुप्ताओं पर क्या असर पड़ेगा. जी, ये आप सही कहरहे हैं. यहां हमें अपना अस्तित्व साबित करना पड़ता है! ये गलत है. ऐसा क्यों मानलिया जाता है कि लड़कियां ही बेवफा होती हैं? क्योंकि ये आज से नहीं सदियों से चला आरहा है, आपने बस कहीं पढ़ा कि सोनम गुप्ता बेवफा है और आपने मान लिया, किसी ने उसकाकारण जानने की कोशिश नहीं की. क्योंकि मैं लड़की हूं. सब लोगों ने ऐसी सोच बना रखीहै. अगर मैं नोट पर लिख दूं कि राजू बेवफा है. मान लेंगे. बल्कि ये ही कहेंगे किदेखो बेवकूफ लड़की ने लिखके नोट गंदा कर दिया. लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दियाऔर नोटों को गंदा करते चले गए. फिर इतने दिन तक आप चुप क्यों रहीं. एक्शन क्योंनहीं लिया? मैं साहस नहीं जुटा पाई मैं बहुत डरी हुई थी इन सबसे. लोग कह रहे हैंकि आपको UNESCO ने इंटरनेशनल बेवफा घोषित कर दिया है. जी अब आप बताइए, मैं क्याकरूं? सीता माता के साथ भी इस समाज ने ऐसा किया था, देखा जाए तो एक तरह से उन्हेंभी बेवफा ही कहा गया था. वो चुप रही थीं, मैं चुप नहीं रहूंगी, फिर आप क्या करेंगी,आगे की प्लानिंग क्या है? मैं अपना स्टैंड लूंगी, सोशल मीडिया पर अपने लिए लड़ाईलड़ूंगी और इंसाफ पाकर रहूंगी. ज़्यादा हुआ तो मैं नेताओं के पास भी जाऊंगी. आम आदमीपार्टी से मेरे अच्छे संबंध हैं. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सोनम गुप्ताबीजेपी सरकार की एजेंट है, जो नोट बंदी से लोगों का ध्यान भटका रही है. जबकि लोगमुश्किल में हैं और कतारों में खड़े हैं? ये बिल्कुल गलत है. बीजेपी तो हमेशा से हीलोगों को मुद्दे से भटकाती आई है. उन्हें ये समझना होगा. सोनम गुप्ता बेवफा है,उसके खिलाफ संसद चलो नाम से इवेंट भी चला दिया है, इसपर आपका क्या कहना है? संसद जाकर कितनी ही समस्याओ का हल हुआ है, जो मेरी समस्या का होगा. मैं गुज़ारिश करती हूंकि इन सब चीजों से आप लोग मेरा मज़ाक ना उड़ाएं. बस ये जोक्स और फ़ोटो शेयर करना बंदकर दें, क्योंकि ना जाने कितनी ही और सोनम गुप्ता इसका शिकार हो रही हैं. अगर इसबदनामी की वजह से खुदा न करे किसी सोनम ने अपनी जिंदगी को ख़त्म कर लिया तो उसकाजिम्मेदार कौन होगा? ये समाज होगा. आप होंगे. मैं होउंगी. हम सब लोग होंगे. सोनमबेवफा नहीं है यूं ही बदनाम हो गई. कहा जा रहा है कि खुद को मशहूर करने के लिए सोनमने ये ड्रामा रचा है? मशहूर होना और बदनाम होना, फ़र्क़ है सर. मैं एक आम लड़की की तरहआम ज़िन्दगी जीना चाहती हूं. मुझे और कुछ नहीं चाहिए. जिस तरह से नोटों पर लिखा जारहा है, मांग हो रही है कि सरकार को नोटों पर ही लिख देना चाहिए कि 'मैं सोनमगुप्ता को बेवफा होने का वचन देता हूं.' ये बहुत गलत है, आप लोग बार-बार मुझे बेवफासाबित करने पर तुले हुए हैं. और मेरे मरने तक मेरी आखरी सांस भी यही कहेगी कि मैंनेकोई बेवफ़ाई नही की है. राजू को कोई सबक देना चाहेंगी? उसे कुछ समय बाद खुद ही समझआएगा कि उसने क्या खोया है. आखिरी सवाल, देश की तमाम सोनम गुप्ताओं के नाम कोईमैसेज देना चाहेंगी. कि वो क्या करें ? मैं कहना चाहूंगी कि आप बिल्कुल ना डरें. येबस हमें दबा कर रखने की कोशिश है. और आप डटकर खड़ी रहिए और बता दीजिए लोगों को कि"मैं सोनम गुप्ता हूं और मैं बेवफा नही हूं" और लोगों को मानना पड़ेगा ये.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंइंटरनेट पर पहली बार सोनम गुप्ता की बेवफाई का सचइंटरनेट पर पहली बार सोनम गुप्ता की बेवफाई का सच: पार्ट 2समोसे वाले को सोनम गुप्ता से प्यार क्यों हुआसोनम गुप्ता से पहले ये बन चुके हैं ‘नोट लेखकों’ का निशानाबेवफाई पर सोनम गुप्ता का जवाब आया है