नीतीश कुमार और अजीत सिंह. दोनों ने पुराने पहलवान मुलायम सिंह यादव के साथ दांव करदिया है. 5 नवंबर को लखनऊ में सपा का स्थापना दिवस समारोह है. 25वां. नेता जी गाजेबाजे के साथ मनाना चाहते हैं. मगर पहली चिरांध करी सपूत ने. बगावत का डंका बजादिया. बोले, हम तो विकास यात्रा निकालेंगे. अब बस इत्ते पर माने हैं कि उस दिन लखनऊमें रहेंगे. मुलायम को उम्मीद थी कि वो पुराने समाजवादी साथियों को जुटा अपनी ताकतदिखाएंगे. विरोधियों को कम, अपने बेटे को ज्यादा. इसी के लिए भइया शिवपाल को दिल्लीभेजा था. सबको न्योता दिया. अब आगे खबर आरएसवीपी की. नीतीश कुमार नहीं आ रहे हैं.मतलब जेडीयू से जो भी आएगा, नाम भर का होगा. केसी त्यागी का नाम लिख लीजिए. शरदयादव भी ले सकते हैं. मंच पर तीन यादव दिखेंगे. मुलायम, शरद और लालू. जी, लालू आरहे हैं. आएंगे ही. रिश्तेदारी जो है. नेता जी के भतीजे से बिटिया बियाही है. मगरफायदा बस बाइट भर का होगा. मतलब लालू आएंगे, एएनआई के माइक और मंच पर मोदी के खिलाफनया चुटकुला गढ़ेंगे. मगर इससे बैलेट बक्से में वोट नहीं बढ़ता. और जो यादव वोट है,उसका बैनामा करवाने का दावा तो मुलायम सिंह यादव का परिवार दो दशक से कर ही रहा है.नीतीश आते तो कुर्मी वोट लाते. अवध में न सही, पूर्वांचल में ही कुछ उन्नीस बीसकरते. मगर क्यों करते. जब नीतीश मोदी के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी लड़ाई में उतरे, तोनेता जी ने भी दांव कर दिया था. सब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद देने के लिएराजी थे. मगर फिर भी मुलायम महागठबंधन से बाहर आ गए. अपने कैंडिडेट लड़ाए. तोते काडर जो न कराए कम है. अजीत सिंह नहीं आ रहे हैं. कैसे आते. कुछ हफ्ते पहले तो बेटेजयंत चौधरी को सीएम बनवाने का ऐलान कर चुके हैं. बोले, राष्ट्रीय लोकदल का सीएमकैंडिडेट पूर्व सांसद जयंत होगा. अब जयंत के लिए तैयारी करें या मंच पर अखिलेश केबगलगीर हों. वैसे भी मुलायम और अजीत सिंह का पंगा 30 साल पुराना है. 1986 मेंशुरुआत हो गई थी. यूपी में मुलायम थे. चौधरी चरण सिंह के चेले. और फिर उनकी थालीखिसकाने आ गए थे अजीत सिंह. चौधरी चरण सिंह के विदेश में पढ़े बेटे. आते हीराज्यसभा सदस्य बन गए. चौधरी साब मरे तो पार्टी दो फाड़ हो गई. अजीत सिंह ने मुलायमको भगा दिया बाप की पार्टी से. ज्यादातर विधायक भी छोटे चौधरी संग हो गए. मुलायम केलिए बड़ी बेइज्जती थी. अभी कल तक नेता प्रतिपक्ष थे. अब सिर्फ विधायक भर. मगर वोखुंटे रहे. फिर बना जनता दल. सब साथ हो गए. मलाई की गिलौरी दिख रही थी सबको. मगर जबखाने का मौका आया, तो मुलायम फतेह रहे. जनता दल विधायक दल के नेता बन गए. अजीत सिंहको पटखनी दे दी. साल था 1989. मुलायम बन गए सीएम. अजीत बन पाए वीपी सिंह सरकार मेंकेंद्रीय मंत्री. और तब से मुलायम बारी बारी सीएम बनते रहे. अजीत सिंह केंद्र मेंमंत्री बनते रहे. मुलायम का कद बढ़ता रहा. अजीत का घटता रहा. मुलायम ने अपनी पार्टीबना ली. बरसों बाद अजीत ने भी बना ली. अब मुलायम चाहते हैं कि अजीत उनकी पार्टी मेंआएं. जैसे साल 2003 में आए थे. अनुराधा चौधरी को लाए थे. अनुराधा रालोद नेता थीं.कभी अजीत की नंबर टू. बेटा आया. अनुराधा को हटाया. और ये हाल है. अंदरखाने की खबरये भी है कि जयंत अखिलेश के साथ ज्यादा सहज हैं. उनके लिए भी शिवपाल मार्का पुरानीपॉलिटिक्स जमती नहीं. अब तीसरे इनकार की बारी. न सोनिया गांधी आ रही हैं. न लल्लाराहुल. सोनिया जी की तो सेहत खराब रहती है. सब कहते हैं. और राहुल तो अखिलेश कोअच्छा लड़का बताते हैं. शायद इंतजार भी कर रहे हैं. लड़का बाप से अलग हो तो चाय कान्योता दें. न्योते ये याद आया. एक न्योता. जो सोनिया गांधी चाहती थीं. राष्ट्रपतिके आर नारायणन से. अप्रैल 1999 में. कि हमें पीएम बनने के लिए इनवाइट करो.राष्ट्रपति बोले, नंबर हैं आपके पास बहुमत के. सोनिया ने कहा, हां जी. अभी कुछ दिनपहले ही तो सोनिया के नेतृत्व में विपक्ष ने अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने पुरानीसरकार गिराई थी. एक वोट से. वही कॉन्फिडेंस डेंस हो रहा था. मगर तभी नेता जी नेदांव कर दिया. मुलायम और आडवाणी के बीच मीटिंग हुई. सेटिंग हुई. और सोनिया के अरमांअधूरे रह गए. बड़ी राजनीतिक बेइज्जती हुई. कि बताइए सपोर्ट नहीं 273 का और कह रहीहैं शपथ दिलवा दीजिए. बीजेपी ने ऐहसान चुकाया. 2003 में. पहले तो अपने सपोर्ट से चलरही बीएसपी की मायावती सरकार गिरवाई. फिर नेता जी को खुलकर खेलने का मौका दिया.जोड़ तोड़ हुआ और मुलायम सिंह सीएम की शपथ ले गए. अब जब सिटिंग हो गए तो बीएसपी औरदूसरे दलों के विधायक भगे भगे चले आए. 2007 तक राज किया धरतीपुत्र ने. सोनिया ने भीबदला लिया. 2004 में. मुलायम की पार्टी के दो दर्जन से भी ज्यादा सांसद थे. मगरसोनिया की यूपीए को नए हालात में उनकी जरूरत नहीं थी. तो गठबंधन दलों की पार्टी मेंजब मुलायम के दत्तक भाई अमर सिंह पहुंचे, तो उन्हें लिटरली बाहर कर दिया गया. कहदिया, आपको तो न्योता ही नहीं. तो काहे आए. अब मुलायम न्योता दे रहे हैं. मगरसोनिया और राहुल नहीं आ रहे. सब दूर से ही तेल देखो, तेल की धार देखो का जाप कर रहेहैं. ज्यादा दूर तो नहीं,मगर पर्याप्त दूरी से अखिलेश भी देख रहे हैं. पापा के बगलवाले ही घर में रहते हैं टीपू. 5 विक्रमादित्य मार्ग पर सौतेली मम्मी संग पिता जी.और 4 में डिंपल और बच्चों संग अखिलेश. बीच में एक संतरी बैठता होगा. उसके पासरेडियो होगा. रेडियो पर सही समय पर जिंगल चलता होगा. भइया ये दीवार टूटती क्योंनहीं. भइया कौन. शिवपाल या अवध का चलन है जो, तो उस हिसाब से बड़े बेटे अखिलेश.ड्रामा अभी जारी है. कई अंक बाकी हैं. मूंगफली खरी भुनी, लेकर बैठे रहिए. बहुत चटखहोने वाला है सब.