जब सवाल पूछना देशद्रोह कहलाए, ये कविता याद आती है
पढ़िए मार्टिन नीमोलर की वो कविता, जो हर दौर में सच्ची लगती है.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
ऐसे समय में जब हिंदू, हिंदू के लिए बोलता हो, मुसलमान, मुसलमान के लिए; जब राजनैतिक विरोध हत्याओं के नाम पर सामने आता हो, जब आपके सवालों पर जब देशद्रोह का ठप्पा लगा दिया जाए, तब हमें याद आती है विश्व की सबसे जरूरी राजनैतिक कविताओं में से एक. जिसे लिखा है मार्टिन नीमोलर ने. उसका हिंदी अनुवाद हम आपको पढ़ा रहे हैं. और सुनवा रहे हैं कुलदीप 'सरदार' की आवाज में.
वीडियो देखते जाइए.
पहले वे कम्युनिस्टों के लिए आए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था
फिर वे आए ट्रेड यूनियन वालों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं ट्रेड यूनियन में नहीं था
फिर वे यहूदियों के लिए आए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं यहूदी नहीं था
फिर वे मेरे लिए आए और तब तक कोई नहीं बचा था जो मेरे लिए बोलता
वीडियो देखते जाइए.

