आज एक कहानी रोज़ में 'लूजर कहीं का' और 'इश्कियापा' जैसे उपन्यासों के लिए पहचानेजाने वाले पंकज दुबे की कहानी... ‘‘हिट इट ऑर क्विट इट.’’ खाना खाते हुए वह लड़का जोर से चिल्लाया. बालों केस्पाइक्स बनाए वह बेवकूफ होने की हद तक अजीब लग रहा था. ‘‘अपनी बकवास बंद करो औरदफा हो जाओ यहां से.’’ किसी उजड़े और वीरान रंग में रंगी जींस पहने वह लड़की उससेदुगुनी आवाज में चिल्लाई. उसका सुर्ख लाल क्रॉप-टॉप जंगल की आग की तरह आंखेंचुंधिया रहा था. ‘थ्री वाइज मेन’ क्रिसमस के मौके पर भरा हुआ था. पूरे रेस्तरां मेंक्रिसमस की साज-सज्जा की गई थी. क्रिसमस ट्री सुंदर घंटियों, तोहफों और तारों सेलदा हुआ था. वेटर्ज सैंटा बने सर्व कर रहे थे. एक छोटा-सा सैंटा उन दोनों के बीचरखे एक ग्लास की किनारी पर भी लटक रहा था. लड़के ने सैंटा को वहां से उखाड़ करलड़की के ऊपर दे मारा, ‘‘तुम जैसी मिडल-क्लास लड़कियों को टिंडर पर नहीं शादी डॉटकॉम पर होना चाहिए.’’ उसका ग़ुस्सा उसके चेहरे पर नुमायां था. वह झटके से उठा औरचला गया. अचानक वह पलटा और एक वेटर की क्रिसमस कैप उतार कर खुद लगा ली. बूढ़े सैंटाकी तरह कमर झुकाकर और गले में खराश भरकर वह चिल्लाया,’ ‘हो हो हो.’’ सबकी नजरें उसपर आ टिकी थीं. ‘‘जाओ, अपनी रातें तुम सैंटा के साथ ही बिताओ.’’ लड़के की आवाज मेंछिपा व्यंग्य उसके दिल पर नश्तर की तरह आ लगा. वह सुपु थी, सुपर्णा. कैप उछालकर वोजा चुका था और पब के सारे जोड़ों के बीच सुपु अकेली रह गई थी. म्यूजिक और लाउड होगया था. ‘‘बैंग-बैंग माय बेबी शॉट मी डाउन...’’ डेविड ग्वेटा फुल वॉल्यूम में गारहा था. जिंदगी उसके लिए अभी तक राइट स्वाइप साबित नहीं हुई थी. सुपु बॉलीवुड के एकनामचीन कॉस्टयूम डिजाइनर बागची की असिस्टेंट थी. लेकिन फिलहाल बॉलीवुड की फिल्मोंसे ज्यादा नाटकीयता उसकी जिंदगी में थी. उसकी जिंदगी किसी फैंसी ड्रेस शो से कमनहीं थी. दरअसल, उसके दोस्तों ने उसे चुनौती दी थी कि नया साल शुरू होने से पहलेउसे अपने लिए कोई साथी खोजना होगा और आज 25 दिसंबर है. सिर्फ छह दिन बाकी हैं औरउसे अब तक कोई नहीं मिला है. इस आजमाइश को शुरू हुए लगभग चालीस दिन बीत चुके हैं.अंधेरी में उसके पास वन बेडरूम फ्लैट था. पर पिछले चालीस दिनों से वह फ्लैट सेज्यादा टिंडर पर मौजूद थी. उसकी जिंदगी लेफ्ट और राइट स्वाइप में उलझ कर रह गई थी.और जब कभी उसकी किस्मत उस पर मेहरबान होती तो वह उसे सिर्फ चार शब्दों में मापती‘इट वाज अ मैच.’ तो क्रिसमस पर मिला यह मैच उसके लिए सिर दर्द तब हो गया जब मिलतेही लड़के ने उसे बाहर खड़ी कार में ‘क्विकी’ के लिए ऑफर किया. सुपु ने उसे समझायाकि बिना भावनात्मक जुड़ाव हुए वह किसी के साथ हमबिस्तर नहीं हो सकती... वहडेमीसेक्सुअल है. यह सुनते ही वह आगबबूला हो गया और जहर उगलते हुए सुपु पर अपनाक्रिसमस बर्बाद करने का आरोप जड़ दिया. सुपु रोते हुए अपने घर लौट आई. उसकेसाफ-शफ्फाक चेहरे पर गहरी उदासी थी. रोते-रोते उसके चेहरे पर पिघलते हुए सूरज केसारे रंग चस्पां हो गए थे. उसकी मान्यताओं और मूल्यों को मिला मिडल क्लास का तमगाउसे काफी तकलीफदेह लग रहा था. वह एक अल्हड़-सी लड़की थी जो दुनिया की चिंताओं सेबेफिक्र थी. आजादख्याल सुपु रूमी की कविताओं और ओशो के सिद्धांतों का खूबसूरत मेलथी. सुपु ने अंदर जाकर सारी खिड़कियां खोल दीं और एक गहरी सांस ले जैसे ताजी हवाअपने भीतर भरने की कोशिश की. जब वह इसमें नाकामयाब रही तो उसने फोन उठाकर अपनीबेस्ट फ्रेंड राशि का नंबर मिलाया. ‘‘तुम मुझसे अभी मिल सकती हो?’’ सुपु ने पूछा.‘‘तुम ठीक तो हो न?’’ राशि की आवाज में चिंता घुली हुई थी. टूटी हुई आवाज में सुपुबोली, ‘‘मैं हार गई हूं.’’ ‘‘कैसी बातें कर रही हो? कहीं तुमने वो चैलेंज गंभीरतासे तो नहीं ले लिया? डोंट टेल मी! तुम इतनी बेवकूफ नहीं हो सकती सुपु.’’ राशि नेउसे प्यार से झिड़कते हुए कहा. ‘‘राघव को लगता है कि जबसे वो मुझे छोड़ गया है मैंअकेली हूं. वो सोचता है कि मुझमें किसी को दिलचस्पी नहीं है, न कभी होगी. राशि मैंउसे दिखा देना चाहती हूं कि मैं उससे बेहतर साथी कि हकदार हूं.’’ ‘‘ओहो सुपु, वेनशे में धुत्त होकर की गईं बेवकूफाना बातें थीं और तुम उन्हें संजीदगी से ले उन परअमल कर रही हो.’’. राशि समझाइश के स्वर में बोली थी. ‘‘हम बाद में बात करते हैं.’’सुपु ने कहा. ‘‘तुम मेरी पार्टी में तो आ रही हो न? याद है न 31 की रात को?’’ राशिने पूछा. ‘‘मुझे नहीं मालूम.’’ सुपु ने रूखाई से जवाब देते हुआ कहा. उसका मन किसीसे बात करने का नहीं था और पार्टी की बाबत तो कतई नहीं. उसने गहरी सांस ली और अपनेखोल से बाहर आने का निश्चय लिया. नया वर्ष आने में मात्र छह रोज बाकी थे और उससेपहले उसे अपने लिए ‘राइट मैच’ खोजना था. जब सब लोग अपने कामों में मशगूल थे वह अपनेअंदर भरे जहर से खुद को खाली करने की राह खोज रही थी. अगली सुबह ओस की बूंद-सी ताजाथी. समंदर किनारे जॉगिंग करते हुए उसने अपनी सारी चिंताएं समंदर की लहरों केसुपुर्द कर दीं. हाड़-तोड़ मेहनत के बाद वह सूप बनाने के लिए नजदीक के बाजार मेंसब्जी लेने चली गई. सब्जी वाला फोन पर व्यस्त था. सुपु को देखते ही फोन बगल में रखखींसे निपोरते हुए बोला, ‘‘बेबी जी, सूप बनाना है न? घिया रहने दीजिए, पालक के साथटमाटर ले लीजिए. उसमें कुछ आंवला भी मिला सकती हैं.’’ भाजी वाला अपने सुझाव दे रहाथा. ‘‘तुम चुप रहो और जो मैं कह रही हूं वही करो. मुझे घिया ही चाहिए. पाव भर टिंडेभी रखो... ताजा लग रहे हैं.’’ सुपु की आवाज रूखी थी. ‘‘मुझे टिंडर पर आपकी तस्वीरबहुत अच्छी लगी. नई है न... बेबी.’’ सब्जी वाला अधिक खुलने की कोशिश कर रहा था.‘‘जितना कहा है उतना करो.’’ सुपु धमकी भरे लहजे में बोली. ‘‘नया फोन है न बेबीजी...मैंने आपको टिंडर पर देखा था.’’ भाजीवाले ने मुस्कुराते हुए कहा. सुपु विरक्ति सेभर उठी. टिंडे भेजने वाला भी टिंडर पर मौजूद था. भाजी वाले ने सब्जियों से भरा थैलाउसे पकड़ाया. वह भारी थैले और उससे भी भारी दिल के साथ घर लौट चली. आभासी संसारशतरंज के खेल की मानिंद उसके साथ दिमागी खेलों में मुब्तिला था. घर पहुंचकर उसनेशॉवर लिया और कपड़े पहन एक बार फिर रोने लगी. पूरी मुंबई ने रोशनी और खुशियों कालिहाफ ओढ़ा हुआ था, पर अकेलेपन की पीड़ा ने सुपु को भावनात्मक जड़ता की ओर धकेलदिया था. यकायक वह अपने दोस्तों और परिवार से छिपने लगी थी. वह उनसे तभी मिलनाचाहती थी, जब उसके जीवन से अकेलेपन की मनहूसियत छंट जाए. उसने टिंडर खोला और अपनीप्रोफाइल पर सौ से ऊपर नए स्वाइप देख खुश हो गई. उसने अधिकतर को लेफ्ट स्वाइप कियाऔर कुछ को राइट स्वाइप किया. इट वाज अ मैच! अचानक सुपु उछल पड़ी. अंततः उसे एक मैचमिल गया था. वह आरव था. दोनों ने खूब सारी बातें की. अपने शौक से लेकर अपने जुनूनतक सब एक दूसरे को बताया. आरव एक फोटोग्राफर था. उसकी बातों का विस्तार खाने सेलेकर कपड़ों तक, प्रेम से लेकर कविताओं तक समान रूप से फैला हुआ था. वह न सिर्फअच्छी तस्वीरें खींचता था बल्कि बातें भी जबरदस्त करता था. सुपु को वह बहुत पसंदआया. उससे बातें करते हुए वह ख्वाबों की दुनिया में थी. उसने बाकी प्रोफाइल्स कोनजरंदाज कर दिया. ‘‘तुम जितनी नाजुक दिखती हो, क्या उतनी ही नाजुकी से बातें भीकरती हो?’’ आरव ने पूछा. ‘‘इसके लिए तुम्हें मुझसे बात करनी होगी.’’ सुपु ने हंसतेहुए जवाब दिया. ‘‘क्या हम आवाज का जादू हमारी पहली डेट के लिए बचा कर रखें?’’ आरवने कहा. ‘‘और वो डेट कब होगी?’’ सुपु ने पूछा. ‘‘जरा शाम का आसमान कुछ और रंगों कोपी ले... सूरज कुछ और आसमान के आगोश में समा जाए... उसके बाद हम मिलेंगे.’’ आरव नेजैसे उसके कान में सरगोशी की. ‘‘मुझे पहली बार तुम जैसा कोई मिला है.’’ सुपु नेलिखा. ‘‘मेरे घर पर मेहमान आए हुए हैं. मैं जरा उनसे फ्री हो जाऊं फिर हम मिलतेहैं. क्यों न हम नए साल के पहले दिन मिलें? आरव ने कहा. सुपु को महसूस हो रहा था किकम-अज-कम इस दफा उसकी जिंदगी को राइट स्वाइप मिलेगा. 31 दिसंबर आ पहुंचा था. उसनेआरव को मैसेज किया, ‘‘हमारा मिलना अब एक सूर्यास्त दूर रह गया है.’’ मैसेज करने केबाद उसने मुतमइन होकर बालों का ढीला जूड़ा बांधा और कॉफी के घूंट भरते हुए अखबार केपन्ने पलटने लगी. इतनी खुशनुमा सुबह अरसे बाद उसकी जिंदगी में आई थी. तभी उसके फोनपर राशि का नाम चमका. ‘‘तुम आज रात आ रही हो न?’’ उधर से राशि की घबराई हुई आवाजआई. ‘‘हां बाबा, आ रही हूं.’’ सुपु की आवाज में ठहराव था. ‘‘नहीं, बात दरअसल ये हैकि राघव भी आ रहा है तो मुझे लगा कहीं तुम्हें बुरा न लगे.’’ राशि की आवाज मेंपरेशानी थी. ‘‘वो मेरा अतीत है. मेरा उससे या उसकी दी हुई वाहियात चुनौतियों से कोईलेना-देना नहीं है. मेरी जिंदगी में इन सबके अलावा भी बहुत बातें हैं.’’ सुपु किसीसंत-सी दार्शनिकता से कह रही थी. राशि ने रहस्य भरे स्वर में पूछा, ‘‘तुमने सेक्सकिया है?’’ ‘‘नहीं.’’ सुपु ने हंसते हुए जवाब दिया. ‘‘फिर तुम इतनी सुलझी हुई क्योंलग रही हो?’’ राशि हैरान थी. ‘‘सूर्यास्त.’’ सुपु ने मुस्कुराते हुए कहा. ‘‘तुम नबिल्कुल पागल हो. आज मैं तुम्हें अपने नए दोस्त से मिलवाऊंगी. वो मनोचिकित्सक है,’’राशि की आवाज में अधीरता थी. ‘‘तुम जेट विमान से भी तेज गति से डेट करती हो. हमजैसे लोगों को देखो. आज रात को मिलती हूं.’’ सुपु ने उसे चिढ़ाते हुए फोन रख दिया.आज का सूर्यास्त बेहद खास होने वाला था. काले रंग की छोटी-सी लेदर ड्रेस में वहबहुत खूबसूरत लग रही थी. जब वह राशि के स्टूडियो अपार्टमेंट पहुंची तब पार्टी अपनेपूरे शबाब पर थी. राघव किसी नई लड़की के साथ था जो मशहूर पॉप स्टार रिहाना का भद्दासंस्करण लग रही थी. राघव ने उसे अकेला देख उसका मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘मुझे लगा थाकि आज रात के लिए तो तुम्हें कोई न कोई मिल ही जाएगा.’’ ‘‘मुझे अपनी जिंदगी मेंइससे बेहतर चुनौतियों का सामना करना है.’’ सुपु का आत्मविश्वास बेजोड़ था. वोदका केशॉट्स और पानी-पूरी के साथ शाम नशीली हो रही थी. सुपु लगातार आरव के साथ मैसेज परबनी हुई थी. तभी राशि अपने नए बॉयफ्रेंड को सबसे मिलवाने ले आई. ‘‘यह वरुण है’’उसने उसका परिचय देते हुए कहा. वरुण ने सारे दोस्तों से हाथ मिलाया. जब सुपु कीबारी आई तब दोनों की धड़कनें वहीं थम गईं. ‘‘जैसे ‘डियर जिंदगी’ में आलिया कोशाहरुख खान की जरूरत थी वैसे ही इसे तुम्हारी मदद चाहिए होगी.’’ राशि ने शरारत सेकहा. सुपु अपनी बड़ी-बड़ी आंखों में पत्थर-सी कठोरता लिए वरुण को खामोशी से देख रहीथी. सुपु के लिए सैकड़ों सूरज एक साथ डूब गए. वरुण ही टिंडर पर आरव था... वहीतस्वीर. उसने अपना बैग उठाया और पार्टी छोड़ कर बाहर निकल आई. सूरज डूब चुका था औरइसके साथ ही मिस्टर राइट से मिलने की उसकी उम्मीदें भी दम तोड़ चुकी थीं. वहचलते-चलते समंदर किनारे आ पहुंची. भीगी रेत उसके तलवों को सुकून पहुंचा रही थी औरउसकी रूह को सहला रही थी. बीच पर पसरे अंधेरे में वह अपनी जिंदगी के अंधेरों का हलढूंढ़ रही थी. रात यूं ही बीत गई. सुबह के उजाले में वह राइट स्वाइप तक पहुंचने कासही तरीका देख पा रही थी. वह उठी और मन में दृढ़ निश्चय कर फोन समंदर में फेंकदिया. अब खुद से दोस्ती करने का समय था. उसने नए साल का पहला सूर्योदय देखा और उगताहुआ सूरज देखने से ज्यादा दिलकश और कुछ भी नहीं था.