अमीना जहां जाती, उसका बेटा टीपू दिखाई देता था. कभी दीवारों पर चलता मिलता, कभीरास्ते के पेड़ों पर बैठा. कभी कभी तो कसाई की दुकान पर कटे मीट में बैठा मिलता.टीपू पिछले साल ही मरा था. उसके फ्रिज से बीफ निकला था. उसने गलती की थी. इस बात कापछतावा मां को था. पर संतोष ये था कि मरने के बाद भी बेटे से दूरी नहीं हुई. ये बातअमीना ने टीपू के अब्बा को भी नहीं बताई थी. टीपू ने मना किया था. उसके अब्बा कभीकभी टीपू की फोटो निहारते तो अमीना दबी जुबान में हंसती. सोचती कि जिंदगी भर अमीनाको लल्लू समझते रहे, पर असल लल्लू तो यही निकले. मौलाना महाशय. टोपी लगा ली, दाढ़ीबढ़ा ली, सुरमा लगा लिया, हो गये ज्ञानी. बेटा बेवकूफ समझता है, तभी तो इनको नहींबताता कुछ.उस रात टीपू ने कहा था कि आज मीट अब्बा बनायेंगे. अम्मी को बनाने नहीं आता. तब तकमकरंद आ गया. मकरंद टीपू के साथ मीट खाता था. उसके घर में मीट की मनाही थी. टीपू नेकभी किसी को बताया नहीं था. अभी गैस जलाई ही थी कि मकरंद का फोन बज गया. वो बाहरचला गया. तब तक १५-२० लोग घर में घुस आये. शोर शराबा होने लगा. अमीना को लगा सांपनिकल आया है.ऐसा पहले भी हुआ था. तब पंडित रामचंद्र का बेटा नीरज बंदूक लेकर आया था. एक गोलीलगने पर सांप उछल पड़ा था. बड़ी मुश्किल से मारा गया था. नीरज उस दिन भी बंदूक लेकरआया था. अमीना उसके पीछे खड़ी हो गई. नीरज ने उसे पीछे से खींचकर सामनेवाले कमरेमें बंद कर दिया था. फिर कुछ धड़धड़ की आवाज हुई थी. लगा सामान उलटा पलटा जा रहाहै. फिर चीखने की आवाज आई. वो आवाज फिर दूर निकलती गई. अचानक लगा कि घर से सारे लोगचले गये हैं. अमीना ने बहुत देर बाद दरवाजा खोलने की कोशिश की. पर हतभाग्य, ये तोखुला ही था. नाहक लगा था कि सेफ्टी के लिए नीरज ने बंद कर दिया था. वो भागी बाहर गईथी. फिर उसे कुछ याद नहीं रहा. अब यही पता है कि फ्रिज में बीफ नहीं रखना चाहिए था.अल्लाह का शुक्र है कि मियां बच गये. वरना गुनाह तो बड़ा था ही. अमीना ने सबसे माफीमांगी थी. रोज वो घर के बाहर खड़ी हो जाती और हर आने जाने वाले से माफी मांगती. किजाने दो टीपू की गलती थी, अब्बा ने तो नहीं की थी. मुझे भी कहां पता था. शुरू मेंलोग सहम जाते थे. कुछ कुछ बोल देते थे. बाद में लोग हंसने लगे थे अमीना की बात पर.तब अमीना को लगने लगा था कि सबकुछ ठीक हो गया है अब. तभी तो लोग मुस्कुराने लगेहैं. मिल जुल के रहने में ही भलाई है. पर नीरज अभी भी सहम जाता था अमीना को देख के.एक उसी से माफी नहीं मिली थी. ऐसा अमीना को लगता था. लगने वाली बातें घूम-फिरकरसामने आ जाती हैं. अब दिन अचानक गेरुए होने लगे थे. सितंबर के महीने में धूल उड़ती,जैसे कोई रामरज से होली खेल रहा हो. पर दिन के बाद शाम नहीं होती थी. अचानक रात होजाती. रात के बाद भोर नहीं होती थी. अचानक सूरज नारंगी रंग का होकर चमकने लगता था.रातें हरी होती थीं. चांद की तरफ देखने में डर लगता था. ऐसा लगता हरे रंग की गायपत्थर की एक आंख लगवाकर घूर रही है. अमीना जब भी बोलती, उसे लगता खूब घंटे घड़ियालबज रहे हैं. घबराकर वो कुछ सोचने लगती थी आजकल. पर इस क्रम में मन में भी कोई बातबोलती तो लगता कि चार पांच लाउडस्पीकर लगातार बज रहे हैं. वो पसीने पसीने हो उठती.टीपू उसकी किसी बात का जवाब नहीं देता था उस वक्त. खिड़की से बाहर देखता रहता. जबसुबह होती तो अचानक बोल उठता देख अम्मी वहां तालाब के कीचड़ में कमल खिल रहा है. एकभौंरा बैठा है उस पर. फिर उसके अब्बू आ जाते और टीपू आलमारी के पीछे छुप जाता. आजअमीना बहुत खुश थी. कल से नवरात्रि शुरू हो रही थी. रामलीला होती थी गांव में. टीपूबचपन में सीता बना करता था. इतना प्यारा था. मकरंद राम बनता था. अमीना ने तय कियाथा कि रात होने से पहले वो नीरज से पूछेगी. बोलेगी कि माफ कर दो. अब तो रामलीलाहोगी, तो चाची को नहीं दिखाओगे. चौराहे पर अमीना खड़ी हो गई. बड़ी देर हो गई परनीरज नहीं आया. अब अमीना को बहुत तेज प्यास लग रही थी. वहीं एक फूटा घड़ा पड़ा हुआथा. अमीना ने झांककर देखा तो उसमें पानी था. पर टीपू उसी में पांव डाले बैठा था.पता नहीं क्या सोच रहा था. अमीना ने टोका कि हट जा, पानी तो पी लेने दे. तो टीपू नेहाथ हिलाकर मना कर दिया. कड़वा सा चेहरा बना लिया. फिर अचानक उठकर चल पड़ा कि मैंजाता हूं. अमीना की प्यास मिट गई. तभी नीरज आता दिखा. मोटरसाइकिल पर. अमीना कोदेखते ही उसने गियर बदले, एक्सिलरेटर लिया, और मोटरलाइकिल हुर्र हुर्र करके रुक गई.वो उतरकर जल्दी जल्दी किक मारने लगा. तब तक हैंडिल छूट गया और मोटरसाइकिल गिर गई.उसका मिरर फूट गया. अमीना ने ध्यान से नीरज को देखा और जोर से हंस पड़ी. फूटे हुएशीशे में लग रहा था कि नीरज के दस सिर हैं. नीरज ने चिल्लाकर कहा- क्या हंस रही है.पागल है क्या तू? अमीना सामने आकर खड़ी हो गई. बोली- माफ कर दो. नीरज का गला फटगया- भागती है कि नहीं. अमीना ने कहा- टीपू भी यहीं कहीं होगा. वो क्या सोचेगा किमां से कैसे बात कर रहे हो. नीरज के हाथ से बाइक छूट गई. उसने खड़े होने की कोशिशकी, पर नहीं हो पाया. ऐसा लग रहा था कि फूटे हुए कांच के टुकड़ों ने बाउंड्री सीबना दी है. वो चाह कर भी उनके पार नहीं जा पा रहा था. अमीना ने फिर कहा- बेटे कीतरह हो, माफ कर दो. नीरज चिल्लाने लगा. लगातार. पर अब पता नहीं चल पा रहा था किक्या बोल रहा है. तभी वहां पर दो लोग प्रकट हुए. एक अमीना के बगल में. दूसरा नीरजके बगल में. अमीना के बगल में साड़ी पहने और सोलहों श्रृंगार किये हुए टीपू खड़ाथा. पर उसने अपनी मूंछें नहीं हटाई थीं. नीरज के बगल में मुकुट पहने और तीर धनुषलिए मकरंद खड़ा था. वो कुछ बेचैन सा लग रहा था. बार बार टीपू की तरफ देखता और नजरेंफेर लेता. नीरज को अचानक लगने लगा कि वो चारों तरफ देख सकता है. उसे सिर घुमाने कीजरूरत नहीं. अब उसे इतने रास्ते नजर आ रहे थे कि वो असहाय महसूस कर रहा था. भागनेकी बिल्कुल इच्छा नहीं हो रही थी. अचानक वो टीपू की तरफ सम्मोहित सा बढ़ने लगा.उसने उसकी साड़ी खींच दी. मकरंद चिल्ला पड़ा. जमीन पर देखते हुए. नीच, उसको हाथ मतलगा. पहले तू मुझसे निपटेगा. नीरज ने अमीना की ओर देखा. अमीना ने दोनों हाथ जोड़लिए. नीरज ने अपना माथा पकड़ लिया. लग रहा था कि फट जाएगा. अचानक उसका चेहरा तमतमाउठा और वो मकरंद पर टूट पड़ा. उसने उसके सिर पर पत्थर दे मारा. सिर फूट गया. खूनबहने लगा. मकरंद लोट गया. और फिर नीरज ने डिक्की से बंदूक निकाल ली. उधर टीपू दोनोंहाथों में चाकू लिए जमीन खोदने लगा था. पता नहीं उसके हाथ में कितनी ताकत आ गई थीकि एक एक बार में दो दो फीट गड्ढे कर दे रहा था. अमीना आश्चर्य और प्रशंसा से उसेदेख रही थी. मकरंद ने गिरे-गिरे पानी मांगा. अमीना तुरंत फूटे हुए घड़े को लेकरदौड़ पड़ी. तभी नीरज की आवाज गूंजी- पानी नहीं मिलेगा. जहां खड़ी हो, वहीं रहो. परअमीना ने अनसुना कर दिया. बोली कि शैतान हो क्या, मेरे बेटा जैसा है वो. प्यासा है,पानी तो पिला लेने दो. फिर लड़ना. पर जितना वो चलती, रास्ता खत्म ही नहीं हो रहाथा. ऐसा लग रहा था कि रेगिस्तान में चल रही है. और फिर तब तक दिन जाने लगा. रात होगई. हरे आसमान के नीचे गेरुए रंग की मिट्टी उड़ने लगी. ये मिट्टी अमीना के पैरोंमें जल रही थी. मकरंद ने फिर पानी मांगा. इस बार नीरज ने बंदूक चला दी. गोली मकरंदके कंधे पर लगी. खून रिसने लगा. मकरंद इतना प्यासा था कि अपना खून चाटने लगा. अमीनाहंसने लगी. बोली कि अब तो माफ कर दो. उधर टीपू ६ फीट गहरे गड्ढे में उतर चुका था.और बहुत तेजी से मिट्टी अपनी तरफ खींच रहा था. एक बार में पता नहीं कितना खींच लेरहा था. अमीना ने उसकी तरफ देखा. फिर नीरज ने देखा. फिर मकरंद ने. इतनी देर में वोगले तक मिट्टी में धंस चुका था. अब वो मुस्कुराया एक बार. और फिर जोर से सांस ली.बाकी की मिट्टी भी उड़ते हुए उसके ऊपर आ गिरी. अब वहां कुछ नहीं था. सबकुछ पहलेजैसा हो गया था. समतल जमीन. मकरंद के शरीर में हलचल होने लगी. वो खड़ा हो गया. बिनाकिसी की तरफ देखे चल पड़ा. चलता गया. फिर वो आंखों से ओझल हो गया. अगले दिन तालाबमें उसकी लाश तैरती हुई मिली थी. नीरज अमीना को मोटरसाइकल पर बैठाकर घर छोड़ आयाथा. टीपू के अब्बू नाराज थे. अमीना बिना कुछ बताये गायब हो गई थी. वो घबरा रहे थे.अमीना ने रहस्यमयी मुस्कान से टीपू के अब्बू को देखा. फिर हंसने लगी. खाना बनाकर,खिलाकर वो अपने कमरे में गई. आलमारी के पीछे झांका. पर टीपू वहां नहीं था. उसने फिरदेखा. नहीं था. अमीना ने लाइट जला ली. टीपू नहीं था. वो बदहवास सी भागने लगी. खोजनेलगी. रातभर इंतजार किया. पर टीपू नहीं आया. उस दिन सुबह पहली बार लोगों ने अमीना कोटीपू टीपू कहकर रोते सुना था. इसके पहले अमीना कभी नहीं रोई थी. उसी दिन सुबह सुबहखूब गाजे बाजे बजने लगे थे. लोग कह रहे थे कि चुनाव प्रचार हो रहा है. पंडितरामचंद्र ने सुबह सुबह ही जनेऊ की कसम खाई थी कि इस मुल्क को पाकिस्तान नहीं बननेदूंगा. तभी उनके कान में किसी ने आकर कुछ कहा. वो गश खाकर गिर पड़े. नीरज को हरथाली में मीट नजर आ रहा था. रात से ही. वो पचासों बार उल्टियां कर चुका था.--------------------------------------------------------------------------------दी लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी ऋषभ ने लिखी है.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें:ये भी पढ़ें: गाय की वजह से एक महिला पर हमला हुआ है, लेकिन हमलावर गोरक्षक नहींहैं मणिपुर के मुख्यमंत्री ने भी बिना जांचे-परखे ये वीडियो शेयर कर दिया शिवानी केजन्मदिन पर पढ़िए उनकी कहानी ‘लाल हवेली’