शुरू करें भगवन! तो दरअसल किस्सा कुछ यूं है कि टुट्टू के 'हटेला' होने में अपनेज़माने की 'सत्या' का बड़ा रोल रहा. वही मुंबई का डॉन कौन? भीखू मात्रे वाली! ये वोदौर था जब एक बंदा छत पर उकडूं होकर एंटीना घुमाकर चिल्लाता था- 'आया क्या?' औरबदले में जवाब मिलता था- 'चिलमिल बहुत है...बस...बस अब रत्ती भर न हिलाना'. ये वोदौर था जब डीडी की धुन ही पहाड़ी पर अलमस्त गांवों में आधुनिकता का पैमाना थी और शटरवाला भूरा टीवी गांव के दो-चार घरों की शान बढ़ाता था. टीवी को घर की औरतों द्वाराक्रोशिया की कालाकारी से सजे सफ़ेद कपड़े से करीने से ढंका जाता था तब तक, जब तकरामानंद सागर की रामलीला के लिए डकार लेकर पूरा मोहल्ला देखने न बैठ जाए. उसीफैंटसी के दौर में एक शाम 'लौंडों की पंचायत' ने 'आड़े' फूंकते हुए टुट्टू के'हटेला' घोषित होने का फरमान सुनाया, वो भी पर्याप्त वजहों के साथ. फैसले की वजहबनी टुट्टू की 'बेलगाम' इच्छाएं. जब सिनेमा की भाषा ने मुंबई को- 'ए भीडू अपुन कोरानी मंगती' टाइप पहचान दिलवाई ठीक उसी दौर में टुट्टू का जिस्म बगावती हो रहा था.क्या औरतें क्या लड़कियां टुट्टू के लिए सब 'क्या फर्क पड़ता है' वाला मामला था और'रानी' उसे भी मंगती थी. इस दौरान 27 के हो चुके टुट्टू के मुंह पर कई बार जवानी केमुंहासे दस्तक देकर रुखसत भी हो गए, लेकिन उसका कभी 'स्वप्नसुंदरी' से सामना नहींहो पाया. उसकी सांसों की धड़कन कई दफा पहाड़ी चढ़ते-उतरते तो हांफी, मगर इश्क केस्पर्श से 'स्पर्म' ढीले हो जाएं, ऐसा मौका उसके हाथ अभी नहीं लगा था. इधर बंटू,फत्तू, रामभरोसे सब इश्क के रथ पर सवार हो चुके थे. उनके पास अपने किस्से थे.मंगलवार के, सोमवार के यहां तक कि रविवार तक के... बाज़ारों के मेलों के और वहां फड़पर कांपती उंगलियों से 'ब्रा' टटोलते हाथों को छू भर लेने किस्से. सबके पास अपना एककिस्सा था, बस टुट्टू महरूम था, लेकिन उम्मीद जिन्दा थी. फ्रस्टेशन में टुट्टू कईचक्कर बाजार के लगा आता. मंदिरों में टुट्टू की धमक सोमवार से अब सुबह-शाम तक पहुंचगई. कई अफवाहें उड़ी कि टुट्टू को फलां लड़की के पीछे जाते हुए देखा गया. इन्हींअफवाहों के बीच टुट्टू दो जोड़ी चौड़ी मोरी वाली पैंट और क्रीम कलर की शर्ट भी सिलवालाया. बालों को करीने से पीछे किए हुए अब टुट्टू हर वक़्त सजा-धजा नजर आता, लेकिन मनमें टीस बाकी थी. 'लड़की' छूने की हसरत जैसी बात भी तब तक चार भरोसे के यारों के बीचही हंसी-मजाक में ठेली जाती थी. जीवन में तकलुफ्फी की जगह कम थी ढंकने-लुकने की जगहपर्याप्त. चिट्ठियों में इश्क तैरता था और जीजा-साली के मजाक संता-बंता से ज्यादाबनते थे. टीवी पर अजय देवगन, काजोल की कमर की तरफ हाथ बढ़ाता था तो बुड्ढे खंखारनेलगते थे. लड़कियां झुण्ड में निकलती थी. स्कूल से लौटते हुए लड़कियों के पीछे लड़के एकनिश्चित फासले पर सरकते थे. कुल मिलाकार चिपटा-चिपटी का ज़माना नहीं था और 'किस्सी'मिलने पर सुख अमृत मिलने जैसा था. ऐसे तनाव भरे दौर में जब टुट्टू बीए कर नौकरी और'छोकरी' के लिए भटक रहा था, तब सुघड़ बदन वाली रेशमा रेगिस्तान में बारिश की बूंदोंसी बरसी. बेइंतिहा भाप उठी. बॉईल अण्डों की पार्टी का आयोजन टुट्टू की ओर से लौंडोंके लिए किया गया. दरबान लाला की दुकान पर बच्चे दौडाए गए और 2 प्लेट फुल 'भुटवे' कोपरोसते हुए टुट्टू ने विजयी अंदाज में घोषणा की- 'ए वो तुम्हारी भाभी है कमीनों!'ये सुनते ही अब तक दो लौंडों ने आधा खाया अंडा नीचे रख दिया. एक उठकर चल दिया,दूसरे ने सवाल उछाला. 'उसने हां कह दिया क्या?' टुट्टू ने सवाल अनसुना किया औरबोला- 'देखते जाओ लौंडों'! बात गुजर गई. दिल बैठ गए. रात गहराने लगी थी, आड़े अब ओससे मुकाबला करने में असमर्थ थे, लिहाज़ा सभा समाप्त हुई. अगली सुबह पहाड़ी उतरतेझुण्ड को देख टुट्टू ने दौड़ लगा दी. रेशमा का भी यही वक़्त था. रेशमा वही जो अभी-अभीगांव की स्कूल से निकलकर बाज़ार के इंटर कॉलेज में ग्यारहवीं में पहुंची थी.गोरी-चिट्टी रेशमा. गुलाबी गालों वाली रेशमा. अहा! कितना इश्क आज उडेला जाना था,कितनी बातें आज कही जानी थी, क्या-क्या ख्वाब सजाये जाने थे. लेकिन जैसे रेशमा कोतो टुट्टू कहीं नजर ही नहीं आया. आगे-आगे रेशमा तेज़ क़दमों से लगभग भागती सी चली जारही थी और पीछे-पीछे बैलबॉटम घसीट टुट्टू इश्क की अर्जी लेने की गुहार लगाए जा रहेथे. टुट्टू मनुहार करने लगा... इश्क के हवाले देने लगा. सोमवार वाले महादेव भी गुजरगए, पर टुट्टू का प्रस्ताव न पास हो सका. रेशमा पहाड़ी चढ़ते हुए तेज़ी से ओझल हो गई,टुट्टू बैठ गया! वहीं धंस सा गया था टुट्टू. बाज़ार में सबसे पहले ये बात पहुंची.जलेबी छानते सुन्नपट्ट लम्बू ने कुछ देखा था कुछ कहानी सुनाई थी. फिर धरमु लाला नेदो बातें हवा में उछाली और किस्सा फैलता चला गया. दिन सर तक आ पहुंचा, दोपहर हुई औरअब छुट्टी होने का वक़्त भी हो आया लेकिन टुट्टू डटा रहा. खीझता रहा, टाइमपास करतारहा और आखिरकार जहां रेशमा ओझल हुई थी वहीं प्रकट हुई. पहाड़ी उतरते हुए रेशमाटुट्टू की ओर बढ़ी आ रही थी. टुट्टू ने बालों के बीच उंगलियां घुमाई, बची हुईमूंगफली को जेब में ठेला और दीवार से सटकर करीब आती रेशमा को देखने लगा. टुट्टू कीबेसब्री का आलम लहरों का दरिया के किनारे तक सिमटकर आने जैसा था. उसके सूखे होंठोंपर थरथराहट हुई. टुट्टू खुद को संभाल पाता इतने में रेशमा उसके करीब आ गई. लड़कियोंने ठिठोली की, रेशमा ने चुनर उड़ा दी. टुट्टू कुछ देख न पाया सिवाय सुघड़ छाया के.उसने पुकारा रेशमा-रेशमा. घाटी में उतर चुकी रेशमा नहीं बोली लेकिन आवाज़ लौटकर आई.रेशमा-रेशमा. ये वो क्षण था जब चकोर झाड़ियों से निकल आई, बटेर दौड़ भागे और तीतर ने'तीन तौला छप' भी हौले से कहा. गुजरते साधुओं ने चिलम का कश खींचा, चिमटा ठोका औरबोले 'भोले लपक ले'! यकीन मानिए टुट्टू ने फिर दौड़ लगा दी. रेशमा के पास पहुंचा औरबोला- 'तेरे बिना मन नहीं लगता, तू मेरे साथ बैठेगी तो...तेरा क्या जाएगा? आई लब यूलोली.' वो दिलफरेब टुट्टू के मुंह पर चिल्लाई और मां कसम क्या चिल्लाई, पढ़िए- 'कमरतोड़ दूंगी बुड्ढे. बन्दर अपनी सक्कल देख.'. टुट्टू का दिल भर आया. वो लौट आया. उतनीही तेजी...उतनी ही खीझ से जितनी शिद्दत से वो रेशमा के पास पहुंचा था. उसने बाज़ारका रुख किया. सिगरेट फूंकी. लाला सुन्नपट्ट के छेड़ते ही बेहिसाब गालियां बकी और लौटआया ढलती शाम में पीले पड़ते पहाड़ की चोटी पर. उसने आवाज लगाईं पास बैठे लौंडोंको.... संगे-संगे बड़े होते बच्चे भी पास आ गए. इश्क में टूटा कहिए, हार्मोन काडिसआर्डर कहिए या फिर हारा हुआ, टुट्टू ने बच्चों को दौड़ा दिया. जो उसके हाथ लगाउसके टुट्टू ने लात मारी गाली दी और खदेड़ दिया. लौंडों से बोला टुट्टू- 'तुम्हारेभाई को ना बोली, साली हरामी होगी'. कुछ को टुट्टू की इस बात से एतराज था. उन्होंनेबात नजरअंदाज कर दी. कुछ को इस पर कोई एतराज मालूम नहीं पड़ता था, उन्होंने टुट्टूको कुरेदना चाहा. टुट्टू चल दिया इतना कहकर- 'रोकड़ा हो तो सब दौड़ती हैं पीछे-पीछे'.रेशमा के गांवों में लाइट जलने लगी थी. वो एक दिलचस्प उदास शाम थी. चर्चाएं रातगहराने के साथ रहस्य बन गई. टुट्टू अब सुबह-सुबह रनिंग करने लगा. गढ़वाल राइफल की कईरैलियों में हो आया. दिल्ली-देरादूण भी आना-जाना लगा रहा. और फिर गुजरते सर्द दिनोंमें एक खबर बम की तरह फूटी. 'रेशमा लुट गई और टुट्टू सिलेक्ट हो गया'. दोनों ख़बरोंका सोर्स टुट्टू ही था.खबर आग की तरह बाज़ार में फिर फैली. जंगल के शार्टकट रास्तेसे लौटती रेशमा ने निगाहें झुका लीं. बाज़ार घूर रहा था. टुट्टू उत्साहित था, लेकिनकहानी यहां खत्म नहीं होती. थोड़ा आगे बढ़ जाती है. खबर आती है रेशमा की शादी हो रहीहै. एक अधेड़ शख्स के साथ. न उस लड़के के साथ जिसके साथ रेशमा उस रोज बैठी हुई थी नअधेड़ टुट्टू के साथ. रेशमा के गुलाबी गालों पर आंसू टपक रहे थे. वो लड़का भी टूटाहुआ था और टुट्टू भी. वो भी एक उदास शाम ही थी. लौंडों ने टुट्टू को हटेला घोषितकिया. छोटे बच्चे चुहलबाजी करती 'ए हटेला' और पहाड़ स्तब्ध खड़ा था. एंटीना अब भीघूमता है. शक्तिमान पॉपुलर हो रहा था और. पिंक लिपस्टिक वाली पिंकी और हिना के लिएपहाड़ का मौसम खुशनुमा होने लगा था. जो पल्ले न पड़े वो ईंहा देखे. आड़े: खेत में बचेफसल के ठूंठ को जलाने की प्रक्रिया. सर्दियों में ये किसी उत्सव सरीखा था. भुटवे:बकरी के गोश्त से बनी डिश. लोली: जस्ट लाइक प्यारी. तीन तौला छप: गढ़वाल के एकहिस्से में लोगों को लगता है कि 'तीतर तीन तौला छप' पुकारता है. तौला मतलब जानवरोंको पानी-खाना परोसने वाला बर्तन.--------------------------------------------------------------------------------चिंटू जी सिर्फ वॉकमैन में कुमार सानू सुनने की लालच से शादी में आए थे