"बस रवि बस बहुत हो गया. इतना गुस्सा आ रहा है ना मुझे तुम पर, मन कर रहा है कि कुछऐसा करूं जिससे तुझे दिन में भी तारे नजर आ जाएं. बिल्कुल बेकार दोस्त हैं तू,सिर्फ और सिर्फ तेरे कारण अब हमें अपना यह नया साल यहीं इस बोरिंग हॉस्टल में मनानापड़ेगा. कितना बोला था तुझे, चल भाई कोई प्लान बनाते हैं. कहीं घूम कर आते हैं, परना जी ना तुम जैसे किताबी कीड़े को कुछ समझ में आए तब ना, अब कुछ बोल क्यों नहींरहा है. कुछ सुना भी तुमने या मैं बस दीवारों से बातें करे जा रहा हूं. " अमित कीइतनी लंबी-चौड़ी बात सुनकर रवि मुस्कुराता हुआ बोला."जस्ट चिल डियर यह देखो तुम्हारा ही काम कर रहा था.देखो ना कितनी खूबसूरत जगह है. हम ना अपना नया साल यहीं मनाएंगे. मैंने ना बुकिंगभी करा ली है.चल फिर जल्दी से, अपना बैग पैक कर लें. और फिर हम निकल चले लैंसडाउन की खूबसूरतवादियों में. "तभी रवि ने सामने से जाते एक और गांव वाले से होटल का रास्ता पूछा. और कमाल की बातयह कि वो गांव वाला उसी होटल में काम करता था. यह पता लगते ही अमित और रवि ने सुकूनकी सांस ली. आखिरकार उस गांव वाले के साथ दोनों होटल जा पहुंचे. होटल देखकर सहीमायने में दोनों बेहद निराश हो गए थे. जंगल होटल होटल के नाम पर कलंक निकला था. बसएक पुरानी हवेली जिसे देखकर लग रहा था कि बरसों से यहां कोई नहीं आया. पर अब मरताक्या न करता दोनों होटल के अन्दर चले गए. शाम के इस पहर वापस लौटना सम्भव भी तोनहीं था."मत घबराओ बहन अब वो जानवर चला गया है. मुझे अपना बड़ा भाई समझो. तुम कहांरहती हो. चलों हम तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देते हैं कहीं वो जानवर वापस ना आ जाये." रवि की बात सुनकर अपनी बड़ी-बड़ी आंखों में ढेर सारा आश्चर्य छुपा वो लड़कीआगे-आगे चल दी.उन्हें पानी में भिगा देखकर होटल वाला अचंभित होते हुए बोला. "बाबूसाहब आप लोग झरने की तरफ गये थे क्या? और आप लोग तो जिन्दा भी है यह तो करिश्मा हीहो गया कि कोई हादसा नहीं हुआ. वरना आज तक झरने से कोई जिन्दा नहीं आया. बाबू साहबएक बात तो बताओ जरा आपको क्या वहां कोई लड़की नहीं मिली." रवि की बात सुनकर अमित काचढ़ता हुआ पारा एकदम से नीचे आ गया. और फिर वो दोनों दोस्त निकल पड़े जिंदगी केबोरिंग लम्हों से कुछ वक्त को चुराकर कुछ हसीन यादों की तलाश में. लैंसडाउन पहुंचकर अमित की खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं था वरना उसे तो लग रहा था. इस साल वीरानहास्टल में ही नया साल आ जायेगा पर अब इस हसीन मौसम में अमित रवि को पूरी तरह सेमाफ कर चुका था. दोनों दोस्त एक दूसरे के हाथों में हाथ डालकर अपने होटल की तरफनिकल पड़े. थोड़ा रास्ता तो कार से निकल गया. पर एक जगह जाकर कार वाले ने कार रोकदी और बोला. "बाबू साहब बस अब कार आगे नहीं बढ़ सकती आगे का रास्ता आपको पैदल हीजाना पड़ेगा. आगे का रास्ता आप गांव वालों से पूछ लेना." बहुत देर हो चुकी थी दोनोंदोस्तों को चलते चलते पर होटल तो मिल ही नहीं रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी नेजादू से होटल को गायब कर दिया हो. एक बार फिर से अमित को रवि पर शिद्दत से गुस्साआने लगा था. "बस बहुत हो चुका मुझे एक बात सच सच बता तुमने कोई होटल बुक भी करा थाया बस मुझे बेवकूफ बनाया था आखिर कैसा होटल है यह जीपीएस तो छोड़ यहां किसी ने इसहोटल का नाम भी नहीं सुना है. क्या नाम बताया था तुमने हां जी याद आया. "जंगलहोटल." वाह जी वाह क्या नाम है, सच में यह तो हद ही हो गयी है आधे जंगल में आ गयेहैं हम और होटल है कि मिल ही नहीं रहा. फोन लगा कर पूछो ना होटल वालों से, कि हैकहां यह जंगल होटल. पर नहीं फोन भी कैसे कर सकते हो तुम, फोन करने के लिए भी तोनेटवर्क की जरूरत होती है ना, और इस घने जंगल में जब दिन में भी सूरज की किरणें नजरना आ रही हो वहां किसी और चीज की अपेक्षा भी कैसे की जा सकती है. " अमित इस बात कोपूरी तरह से मानता था कि साल का पहला दिन जैसा जाता है. फिर पूरा साल वैसा हीगुजरता है. वैसे रवि तो इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता पर वो भी नये साल का आगमनखुशी के साथ ही करना चाहता था. इसलिए इस बुरे हालात में भी दोनों ने फैसला किया किवो खुश रहने की पूरी कोशिश करेंगे. और तभी कुदरत ने भी उन्हें खुश रहने का एकबेहतरीन मौका दे दिया था. अचानक से बाहर बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली के कड़कने केसाथ ही झमाझम बारिश शुरू हो गई थी. लैंसडाउन की खूबसूरत वादियों में यह दिलफरेबबारिश किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी थी. दोनों दोस्त हवेली की छत परबारिश को पूरी तरह से महसूस कर रहे थे कि तभी होटल में काम करने वाला इकलौता गांववाला गरम गरम चाय के साथ टमाटर के पकौड़े लेकर आ गया. दोनों दोस्तों ने आज से पहलेकभी टमाटर के पकौड़े नहीं खाये थे. पर अब तो लग रहा था कि इन टमाटरों के पकौड़ों केलिए कम से कम पूरा महीना इस होटल में रूका जा सकता है. तीसरी बार टमाटर के पकौड़ेलाने के बाद वो गांव वाला भी अपना वक्त गुजारने के लिए उनके साथ बातें करने बैठगया. बहुत सी इधर-उधर की बातों के साथ ही गांव वाले ने हिदायत भी दे डाली. "बाबू जीपूरा जंगल घूम लेना पर झरने की तरफ ना जाना. वहां आज तक जो गया वो कभी लौट कर नहींआया. " बातों-बातों में रात आधी गुजर गयी थी. तो सबने एक दूसरे को नये साल की बधाईदी और अपने कमरे में सोने चले गए. सुबह बहुत चमकदार दी. बीती रात की बारिश ने जैसेपूरी कायनात को दुल्हन सा सजा दिया था. नाश्ता करने के बाद दोनों दोस्त उस पहाड़ीजंगल को अपने कैमरे में कैद करने के लिए निकल पड़े. जंगल में कदम-कदम पर जैसेखूबसूरती बिखरी पड़ी थी. दोनों दोस्त मदहोशी के आलम में चलते चलते झरने तक जापहुंचे थे. इतना नायाब नजारा देखकर दोनों के होश फाख्ता हो गये थे. ऐसा लग रहा थाजैसे धरती पर नहीं स्वर्ग में आ गए हों. मौसम की रूमानियत ने गांव वाले की बातों कोजहन से ऐसे निकाल दिया था जैसे कभी उन बातों का कोई वजूद ही ना रहा हों. रवि औरअमित झरने की शीतल जल से खेलने में लगे थे. तभी उन्होंने किसी के जोर से चिल्लानेकी आवाज सुनी. कोई बहुत तेजी से उनकी तरफ दौड़ कर आ रहा था. थोड़ी ही देर में रविऔर अमित के सामने एक लड़की खड़ी थी. जो किसी जंगली जानवर से डर कर रास्ता भूल गयीथी. उस लड़की को देखकर अमित मूर्खों सी हरकतें करने लगा. पर रवि बहुत हमदर्दी से उसलड़की से बोला. वहीं दूसरी तरफ अमित का मन कर रहा था. कि रवि को धुन कर रख दे. जबउससे नहीं रहा गया तो वो रवि के कान में फुसफुसा कर बोला. "मैंने आज तक तुम जैसाकोई पागल नहीं देखा. इसे तुम ऐसे ही हाथ से चले जाने दे रहे हो. देखो इस बियाबानजंगल को दूर-दूर तक किसी इंसान का नामोनिशान नहीं है बात मान जा दोस्त पूरा दिनरंगीन हो जाएगा और सबसे बड़ी बात कि किसी को कुछ पता भी नहीं लगेगा ". अमित की बातसुनकर रवि गुस्से से उबलने लगा और चिल्ला कर बोला. "शर्म आ रही है मुझे तुम्हेंअपना दोस्त कहते हुए. कोई देख नहीं रहा इसका यह मतलब तो नहीं है कि हम गुनाह करें.अगर तेरी अपनी बहन होती तब भी क्या तुम मुझे ऐसी ही सलाह देता." रवि की बात सुनकरअमित जैसे होश में आ गया और फिर शर्मिंदा होकर बोला. "माफ कर दो भाई जाने कैसे मैंबहक गया था. सच मैं मैंने आज तक किसी के लिए ऐसा कुछ नहीं सोचा आज ना जाने कैसेमेरे मन ने मुझे धोखा दे दिया. " अपनी बातों में व्यस्त दोनों दोस्त तभी अचानक सेहैरान और परेशान हो गए .उनके आगे आगे चल रही वो लड़की जाने कहां अचानक से गायब होगई. वो दोनों परेशान से इस पहेली को सुलझाने में लगे हुए थे.इस अजीब से हादसे केबारे में बात करते हुए दोनों होटल जा पहुंचे. "एक बहुत सुंदर लड़की मिली तो थी परफिर जाने कहां गायब भी हो गई." रवि ने गांव वाले को जवाब दिया. रवि की बात सुनकरगांव वाला सिर हिलाते हुए बोला. "बहुत किस्मत वाले हो बाबू साहब गांव के बड़ेबुजुर्ग बताते हैं. कि बहुत साल पहले शहर से कुछ लोग आए थे. और उनकी गंदी नजर एकलड़की पर पड़ गयी. इससे पहले कि वो उस लड़की को कुछ कर पाते. उस लड़की ने झरने सेकूद कर अपनी जान दे दी थी. उसके बाद वो सारे शहरी लोग मारे गए थे. और आज भी झरने कीतरफ जाने वाला कोई वापस लौट कर नहीं आता है. मैं समझ नहीं पा रहा कि आप लोगों कैसेसही सलामत है. " गांव वाला भले ही यह पहेली नहीं सुलझा पा रहा था पर अमित और रविजानते थे. कि उनकी रक्षा उनकी सही नीयत ने ही की थी.--------------------------------------------------------------------------------गिलोल के पिता से न भिड़ता तो आज शहर में मारा-मारा न फिर रहा होताआपकी भी कहानी है? क्या करेंगे? हम बताएं? हमको भेजंगे!भेजेंगे कहां? lallantopmail@gmail.com पर.