आज सुबह अलार्म की शोर से जब आंख खुली तो पाया दिल की धड़कनें तेज़ हैं. गजब के जोशके साथ दिल जोर-जोर से धड़के जा रहा रहा है. भला माज़रा क्या है. न ही मेरी लॉटरी लगीहै, न ही सुबह-सुबह किसी नारी के दर्शन हुए हैं. तो फिर भला क्यों फड़क रहा? मैंनेखुद को तलब करते हुए वजह जानने की कोशिश की फिर ये सोच कर इग्नोर किया कि आखिर“नादां है बेचारा दिल ही तो है”. थोड़ी देर बाद इंटरनेट सर्फ करते हुए मालूम चला किआज World heart day है. अब भला Children’s day के दिन चिल्ड्रेन फुदकते हैं,Teacher’s day के दिन टीचर्स फुदकते हैं तो हार्ट डे के दिन हार्ट क्यों न फुदके?बकौल शायर "दिल तो बच्चा है जी." बहरहाल, इतना पता चलने की देर थी कि मेरे अंदर कारिपोर्टर जाग गया और सोचने लगा कि क्यों न आज दिल का एक साक्षात्कार ही ले लियाजाए. आनन-फानन में मैं एक माइक और कैमरामैन लिए पहुंच गया अपनी पड़ोस के शर्मा जी कीबेटी के पास. दरअसल, वो क्या है कि मेरा दिल कभी-कभी उसी के पास ही पाया जाता है अबक्या करूं? दिल है की मानता नहीं. अपने आने की वजह बताकर मैंने दिल को इंटरव्यू केलिए राजी कर लिया. फिर घंटो दिल ने अपनी आत्मकथा सुनाई और अपने दर्द-ओ-गम को हमसेसाझा किया. पूरी बातचीत यहां पेश करने में थोड़ी मुश्किल है इसीलिए हम पेश कर रहे‘दिल की कहानी, दिल ही की जुबानी’ के कुछ हिस्से. "मैं दिल हूं, जिसे इंग्लिश मेंहार्ट, हिंदी में ह्रदय और प्रेम की भाषा में दिल कहा जाता है. हां ,वही दिल जोआपके सीने में धड़कता है और जिसके रुक जाने पर आपके स्वर्ग सिधार जाने की संभावना100% हो जाती है. मेरे बारे में मानव समाज में कई मिथक और अवधारणायें हैं. मेरेचरित्र को कलंकित करने के लिए कई अफवाहें उड़ाई गई हैं. खासकर कि फ़िल्म इंडस्ट्री नेतो मेरा बेड़ा गर्क कर रखा है. मैं मानव शरीर के कई विवादित अंगो में एक हूं. मेरेरंग, रूप एवं आकार को लेकर बुद्धिजीवियों में काफी मतभेद है. मनुष्य ने अपने सुविधाके अनुसार मेरे कम्प्लेक्स स्ट्रक्चर, जिसमें वाल्व, चैम्बर, आर्टरी, वेंस होतेहैं, को सरल करके एक अजीब सा आकार दे दिया है. जिसे देखकर लगता मानों किसी नौसिखिएने टेढ़ी-मेढ़ी रोटी पकाई हो. भारतीय समाज में किसी मानव शरीर में मेरे आकार का बड़ाहोना जहां एक तरफ उदारता का प्रतीक है वहीं दूसरी तरफ युवक-युवतियों के बीच मेराआदान प्रदान एक अक्षम्य अपराध माना जाता है. फिर भी हर दूसरे दिन इश्क़-मुहब्बत केमसले में मेरे लेन-देन की ख़बरें टीवी चैनल्स पर सुर्ख़ियां बनाती रहती है. मगर आजमैं ये साफ़ कर देना चाहता हूं कि मेरा काम सिर्फ और सिर्फ पूरे शरीर में रक्तसंचारण का है. और हां ! साथ ही साथ अशुद्ध रक्त को शुद्ध भी करता हूं किन्तु, मेराप्रेम संबंधो में कोई हस्तक्षेप नहीं है. न ही मेरा प्रेम के दौरान किसी नारी/पुरुषसे आदान-प्रदान किया जा सकता है. और न ही प्रेम समाप्ति पर मैं टूट कर चूर होताहूं. ये मानव का भरम मात्र है कि “शीशा हो या दिल हो आखिर टूट जाता है". मैं मांसका बना एक अंग हूं न कि शीशे का बना कोई पात्र. मैं तो कहता हूं मेरा मुंह ही नखुलवाओ. सारी भसड़ फ़िल्म वालो ने मचा रखी है. मुझ अकेले को 100 सालों से घसीटे जारहें हैं. अरे भाई साहब! और भी अंग हैं, जैसे लिवर, किडनी छोटी आंत, बड़ी आंत,अमाशय, इन पर गाने लिखो, इन पर फिल्में बनाओ. ताकि कोई नायक अपनी नायिका से कह सकेकि “मैं तुमसे गुर्दा-ओ-जान (दिल-ओ-जान पढ़ें!) से प्यार करता हूं और तुम्हे सारीउम्र अपनी अमाशय में छिपा कर रखना चाहता हूं. मियां! प्यार तुम करो और इल्जाम मुझपर कि “दिल है कि मानता नहीं”. ये बार-बार अपनी प्रेमिका को कहना बंद करो कि“तुम्हें दिल में बसा लूंगा”, यहां पहले से ही जगह की किल्लत है. लेफ्ट वेसल औरराईट वेसल आपस के सीमा विवाद में अक्सर गोलीबारी करते रहते हैं और थोड़ा दिमाग लगायाकरो कि आखिर, कैसे 5 फुट की नारी एक दिल में रह पाएगी. दम घुट जायेगा बेचारी का.मुझे बदनाम करने में फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा हाथ हैं. इनकी वजह से एक सामान्यमनुष्य दिन भर में बीसियों बार मुझे कोसता है. मेरे ऊपर ऐसे-ऐसे गाने बनाने लगे हैंजिसे सुनकर शरीर के बाकी अंग मेरा मज़ाक उड़ाते रहते हैं. कल ही टीवी पर देख रहा थाकि रेखा नाम की अभिनेत्री गा रही थी “दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान...” अब भला मैंक्या बताऊं कि क्या चीज़ हूं मैं? कभी कोई कहता है कि “दिल तो पागल है" कभी "दिलबदतमीज है" और कभी "दिल तो बच्चा है जी!" भला मेरी कोई इज्जत है कि नहीं इस दुनियामें? कभी गाना गाते हैं “गिला गिला गिला दिल गिला गिला” और कभी गाते हैं “दिल मेंलगी है आग" कन्फ्यूज्ड स्पीशीज! अरे गीला तो होना ही है आखिर शरीर के तीन चौथाईहिस्से में पानी भरा है. कभी अपने प्रेमिका से पूछते कि “दिल मेरा चुराया क्यों?भला मैं क्या कोहिनूर हूं जो चुरा लेगा कोई? कभी गाते हो “और इस दिल में क्या रखाहै तेरा ही दर्द छिपा रखा है". मैं क्या स्विस बैंक हूं जो मुझमे छिपा रखे हो? इसकेइलावा मेरा इस्तेमाल अवैध रूप से मुहावरों में भी करते रहते हैं जैसे “दिल्ली दिलवालों की तो उस हिसाब से कानपुर कान वालों की हो जाएगी? और नागपुर नाग वालों की? औरमोहाली मुंह वालों की? अमां हद करते हो मियां. तुम्हारी इन्ही बातों से ये हार्ट,हर्ट हो गया तो “दिल मेरा मुफ्त का" गाने के बावजूद सौदा महंगा पड़ जाएगा. वैसे, कईऔर शिकायतें भी हैं मगर मेरे पास टाइम नही है, अभी बॉडी को ब्लड पंप करने का टाइमहो रहा है. आखिर में, मानव जाति को मेरी ये सलाह है कि वक़्त रहते मेरे बारे मेंअफवाह फैलाना बंद करे और मुझे रक्त संचार के कार्य को सुचारू रूप से करने देंअन्यथा बेड़ा उनका ही गर्क होना है." तो ये थी दिल से लम्बी बातचीत का छोटा साहिस्सा . संवाददाता: अमन सिन्हा 'अभि' कैमरामैन: अमन सिन्हा 'अभि' (Front Camera, 8मेगा पिक्सल )--------------------------------------------------------------------------------गडांसे की धार से उस प्यार की आखिरी बूंद तक बाथरुम के सिंक में बह जाती है