दर्द तो अपने आप में ही एक कहानी है. लेकिन जब दर्द भूख का होता है, तो इस धरती परउसकी बराबरी और कोई दर्द नहीं कर सकता. हम जिस दिन इस धरती पर जन्म लेते हैं और जिसदिन इस धरती को छोड़ जाते हैं. उस पहले दिन से आखिरी दिन तक हमारी लडा़ई भूख से हीहोती है. कभी जीत जाते हैं, तो कभी हार भी जाते हैं, और जब हारते हैं ना तो यहीदर्द हमें आंखें दिखाने आ जाता है. रात के करीब 3 बज रहे थे. सड़क के किनारे फुटपाथपर सो रही सुमन शायद यही सोच रही थी. नींद तो उसे पूरी रात नहीं लगी. लेकिन एकसुकून था उसे कि उसके बच्चे तो कम से कम सो गए. सुमन के 2 बच्चे थे. अच्छे थे,सच्चे थे, पर बच्चे ही तो थे. राजन और राजू. राजन 6 साल का था और राजू 5 साल का.सुबह होने को ही थी, और फुटपाथ की सुबह तो वैसे भी समय से पहले ही हो जाया करती है.धीरे-धीरे अंधेरा कहीं खोते जा रहा था, और साथ ही ये भी बताते जा रहा था कि सुमनमेरे अंधेरे में तो तुमने अपना दर्द छुपा लिया, अब इस बेहया सुबह में कैसे छुपाओगी?जब रात किसी बच्चे के बिन खाए गुजर जाए तो उस 2 दिन कि भूखी मां पर क्या गुजरती है.ये जिस पर बीतता है ना वही जानता है, सुमन के पेट में दर्द तो पिछली रात से होनेलगा था, पर दर्द अपना असल काम करना अब शुरु किया था. कल बारिश हो जाने के कारण भीखभी नहीं मिल पाई थी सुमन को, वो तो परसों एक भली महिला ने बिस्कुट का पैकेट दे दियाथा जिस कारण से राजन और राजू का पिछले दिन सुबह का तो काम निकल गया था, पर रात उनकीभी खोखली ही बीती थी, किसी तरह सुमन ने उन्हे झूठी तसल्ली देकर सुला दिया था, येकहकर कि तुम दोनों सो जाओ कुछ खाने को आते ही जगा देंगे, पर आज क्या कहेगी उनसे जबवो सो कर उठेंगे? यही सोचते-सोचते सुमन उठ बैठी, आंखों में उसके आंसू थे. शायद दर्दऔर डर दोनों एक हो गए थे.जानते हैं आप इस धरती पर सबसे छोटी जात कौन सी होती है ? सबसे नीच इंसान कौन होताहै ? सबसे बेशर्म? सबसे बदसूरत? कोढ़ होने से भी बड़ी बीमारी कौन सी होती है?गरीब और उसकी गरीबी. गरीबी से छोटी कोई जाति नहीं. गरीबी से बडी़ कोई बीमारी नहीं.आज कोचिंग सेंटर में सुबह से ही बहुत चहल-पहल थी, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिकमीडिया का जमावड़ा लगा था, आज उस सुमन का राजन सिविल सेवा कि परीक्षा निकाल लियाथा, आज एक भिखारिन का लड़का देश कि सबसे बड़ी नौकरी हासिल कर लिया था. आज एक लड़के नेजो कभी खुद भी इस नौकरी के पीछे दौड़ा करता था, दूसरों को नौकरी दिला दी थी. सुमनने रोना बंद किया और कहीं अतीत में खो गई. वो शुरु से तो ऐसी नहीं थी, और ना उसकेहालात ऐसे थे. पर समय कब किसका हुआ है? आज इसका तो कल उसका. सुमन कि शादी आज से ठीक8 बरस पहले हुई थी, उसके पति मोहन के तब अपने 3 रिक्शे थे. एक तो मोहन खुद चलाताथा, बाकी के 2 भाड़े पे दे रखे थे, जीवन सुखमय था, तब सुमन केवल घर गृहस्थी हीदेखती थी, तीनों पहर का भोजन आराम से हो जाता था, कभी-कभी तो दोपहर के भोजन मेंअरहर की दाल भी बन जाया करती थी. पर्व त्यौहारों में दूध-दही का भी जुगाड़ हो जायाकरता था. राजन और राजू के जन्म के बाद खर्च थोड़ा बढ़ गया था, पर भूखे रहने कि नौबतकभी नहीं आई थी. आज से ठीक 3 साल पहले एक कार की टक्कर में मोहन को काफी चोट आई थी,माथा फट गया था, खून से मोहन के कपड़े सन चुके थे, किसी राह चलते राहगीर को तरस आगई और उसने पास के ही एक सरकारी अस्पताल में भरती करवा दिया. खबर किसी तरह सुमन तकपहुंची, खबर सुन वो अस्पताल की तरफ दौड़ चली. छोटे वाले बच्चे को गोद में लिए, औरबड़े वाले का हाथ पकड़े, काफी हाथ जोड़ने के बाद तो डॉक्टर ने मोहन को देखना शुरुकिया, माथे पर काफी चोट आई थी, जिस कारण ऑपरेशन करना जरुरी था, डॉक्टर ने सुमन से80,000 की डिमांड कर दी, था तो सरकारी अस्पताल जहां गरीबों का मुफ़्त इलाज होता है,पर उनसे ज्यादा गरीब तो ये सरकारी डॉक्टर होते हैं, जो बिना पैसे लिये पादते भीनहीं है. सुमन के आगे-पीछे कोई नहीं था, मां-बाप तो उसके कानपुर में रहते थे. अबतार लिखवा कर भिजवाने में टाइम लग जाता. अब जो करना था उसे ही करना था, पर वो करतीभी क्या? बेचारी रोते-रोते अपने बच्चे को गोद में उठा चल पड़ी घर की तरफ, घर पहुंचकर अपने बचाए पैसों को निकाला और गिनना शुरु किया. कुल 14,600 हुए थे जो उसके औरमोहन के 5 साल के बचाए हुए पैसे थे. आखिर इंसान बचाता भी तो इसी दिन के लिए है.पैसे तो कम थे. उसने अपने पडो़स के जीतन से पैसे मांगने उसके घर पहुंच गई. जीतनपेशे से मालाकार था, फूल की उसकी एक छोटी सी दुकान थी, मोहन और जीतन में काफी अच्छेसबंध थे, इसलिये उसने बिना टालमटोल किये 10,000 सुमन के हाथों में लाकर रख दिए, परइतने में क्या होना था, तभी उसकी नजर अपने जेवरों पर पडी़. एक सोने की अंगूठी छोड़बाकी सब चांदी के ही थे, आनन-फानन में उसने उसे ले सुनार के पास पहुंची, कुल जेवरको देखने के बाद सुनार ने उसकी कीमत 21,000 लगाई. सुमन की सहमति के बाद उसने उसनेरकम देकर जेवर रख लिए. अब भी रुपए काफी कम पड़ रहे थे, उसने निश्चय कर लिया कि वोरिक्शों को बेच देगी. पर अब इतनी जल्दी उसे खरीदेगा कौन? कम से कम 1-2 दिन तो लग हीजाएंगे, यही सोच कर वो अस्पताल की तरफ निकल पडी़, वहां जाकर उसने डॉक्टरों कोसमझाया कि ऑपरेशन शुरु कर दें बाकी पैसे उन्हे कल मिल जाएंगे, और जो पैसे उसके पासथे उसे उसने डॉक्टरों के हाथ में सौंप दिया, डॉक्टर मान गए थे, और उन सब ने ऑपरेशनकी तैयारी शुरू कर दी. सुमन ने किसी तरह से अगले दिन रिक्शों को बेच दिया, जिससेकुल 25000 आ गए, पैसे लेकर वो अस्पताल पहुंची और डॉक्टरों को दे दिया. 3 दिन इलाजचलने के बाद मोहन की तबियत और बिगड़ गई और वो इस मतलबी दुनिया को छोड़ कर चला गया.मोहन के जाने के बाद सुमन किसी के यहां झाडू- पोंछा करने लगी, समय बीतता चला गया.और एक दिन वो भी आया जब सुमन को उस घर में चोरी करनी पड़ी. जिसका अंजाम ये हुआ कीउसे वहां से निकाल दिया गया. चोरी करना उसकी मजबूरी थी, छोटे वाले बच्चे कि तबियतज्यादा खराब हो जाने के कारण उसे ऐसा करना पडा़, अब तो ना पैसे थे और ना ही नौकरीथी. गरीब के बच्चे ना कभी-कभी बिना दवा के ही ठीक हो जाते हैं. एक वो दिन था और एकआज का दिन है, तबसे अब तक सुमन भीख मांग कर ही गुजारा करती है, समय के साथ उसकीझोपड़ी भी अब उसकी न थी, फुटपाथ ही सहारा था. अब तो उसे बस पेट की ही चिंता रहतीथी. सुमन वर्तमान में लौट आई. और साथ में अपने दर्द को भी ले आई, अब पूरी तरह सेसुबह हो चुकी थी. लेकिन उसके जीवन में तो कितने सालों से अंधेरा ही था. लोग घरों सेनिकलने लगे, पास के ही कूड़ादान में कूड़ा फेंक चले जाते, सुमन ये देख रही थी, उससेरहा न गया और वो कूड़ादान के पास पहुंच उसे देखने लगी, बारी-बारी से कूड़ा खंगालती किशायद कुछ खाने को मिल जाए. तभी वहां एक लड़का कूड़ा फेकने वहां पहुंचा, उसे देखकरसुमन ने कूड़ेदान से हाथ बाहर कर लिए, लड़के ने उसे ऐसा करते देख लिया था, उसने सुमनसे पूछ दिया कि आप इस कूड़ेदान में क्या ढूंढ रही हैं वो भी इतनी सुबह-सुबह? सुमनक्या जवाब देती? रोने लगी. ये देख लड़के को समझने में देर न लगी कि ये भूखी है,उसने उसे वहां रुकने के लिए कहा, और अपने होस्टल कि तरफ दौड़ लगा दी, कुछ ही मिनटबाद वो वापस आया, साथ में उसके एक पैकेट थी, जिसमें उसने अपने रुम से खाने के लिएकुछ लेते आया था, उसने पैकेट सुमन कि तरफ बढ़ा दी, साथ में उसने एक सौ का नोट भीदिया. सुमन क्या करती? उसने हाथ बढ़ा कर पैकेट ले लिया और उस लड़के के पैर छूकररोने लगी. लड़के ने उसे उठाया और कहा अरे कोई बात नहीं है, आप इसे खा लीजिए आपकोभूख लगी है. सुमन उठ खडी़ हुई और हाथ जोड़ कर कहने लगी -बाबू कोई काम है तो बता दोमैं कर दूंगी बदले में मुझे खाने को कुछ दे देना, दो छोटे बच्चे हैं मेरे, कल सेकुछ खाया नहीं है. कहते-कहते सुमन की आंखों से आंसू बहने लगे, लड़के को उस पर दया आगई, उसने कहा ठीक है, मैं देखता हूं, कुछ होगा तो मैं बताउंगा, यह कह कर लड़का वहांसे चला गया. सुमन खुश थी की अब वो अपने बच्चों को उठते ही खाना खिला सकती थी. अगलेदिन सुबह फिर वो लड़का कूड़ा फेकने वहां पहुंचा, उसने आस-पास नजर दौडा़ई तो देखा बगलमें ही सुमन और उसके बच्चे सो रहे थे, उसने उन्हे उस समय टोकना उचित न समझा और वहांसे लौट गया.शाम को फिर वही लड़का अपने 3 और दोस्तों के साथ वहां पहुंचा. सुमन उसलड़के को पहचान गई थी, उसने हाथ जोड़कर उस लड़के का अभिवादन किया. लड़के ने भीमुस्कुराते हुए अभिवादन स्वीकार कर लिया, और साथ में लाए पैकेट को उसने सुमन केहाथों में दे दिया. जेब से टॉफी निकाल कर दोनों बच्चों को दी. सुमन ने फिर से विनतीकिया कि बाबूजी कोई काम हो तो.. लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा. हम पास के ही होस्टलमें रहते हैं, यहां पर पढाई करने आये हैं, हम चारों मजबूरी में होटल में खाते हैं,अगर खाना बना लेंगी तो इसमें आपका भी भला हो जायेगा और हमारा भी. सुमन के चेहरे परखुशी साफ दिख रही थी, दर्द, दुख, खुशी सब आपस में मिल गए थे, सुमन चाह कर भी कुछबोल न पाई, बस मुंह हिला दिया, और फिर रोने लगी. लड़के जो सिविल परीक्षा कि तैयारीकरने के लिए वहां रहते थे, उन्होंने आपस में तय किया कि 2000 महीने के और साथ मेंजो भी खाना बनेगा उसमें से सुमन और उसके बच्चों के लिए भी बन जायेंगे. लड़के नेसुमन को 2000 उसी वक़्त दे दिए ताकि वो अपने रहने की और बाकी चीजों की व्यवस्था करसके. वो कहते है ना समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता, सुमन का समय बदल चुका था, और शायदउसके बच्चों का भी. 6 महीने बीत गए थे सुमन को लड़कों के यहां काम करते-करते, सुमनने पास में ही एक कमरा ले लिया था 500 महीना पर, रात में जब सुमन खाना बनाने जातीतो राजन और राजू भी साथ हो लेते. जब तक सुमन खाना बनाने और साफ-सफ़ाई में लगी रहतीतब तक राजू और राजन को वो लड़के पढ़ाने लगते. समय बीतता चला गया और 6 महीने और बीतगये, उन लड़कों ने अब ये निर्णय लिया कि अब हम सिविल सेवा कि परीक्षा की तैयारियांनहीं करेंगे, अब हम तैयारी करवायेंगे. उन सब ने मिलकर अपना एक कोचिंग सेंटर खोललिया, और इधर राजन और राजू अब स्कूल जाने लगे, सुमन रोज सुबह उठकर पहले भगवान कोधन्यवाद देती फिर उन लड़कों को, जीवन यूंही चलता रहा 20 साल बीत गए. राजन दिल्ली सेसीधे कोचिंग सेंटर पहुंचा, उसके आंखों में आंसू थे, आंसू जो खुशी के थे, जो अपनीमां से कह रहे थे, कि अब दर्द नहीं होगा मां, अब रात खाली नहीं जाएगी, अब हर दिनसुबह होगा. राजन मां के पैर छूने के लिए आगे बढ़ा, सुमन ने उसे वही रोक दिया, औरलड़कों कि तरफ इशारा किया, राजन ने मुस्कुराते हुए पहले उन चारों लड़कों के पैरछुए, फिर अपनी मां का, ये देख राजू भी भीगी आंखों से मुस्कुरा रहा था. आज इंसानियतजीत गई थी, जिसके सामने भगवान को भी मजबूर होना पडा़ था, जब जुनून कि आंधी बहती है,तो हर दर्द उससे डरता है, फिर तो न दर्द होता है ना उसका एहसास होता है, बस जुनूनहोता है.--------------------------------------------------------------------------------'उसके चेहरे पर पालक की कोमलता, हरी मिर्चों की खुशबू पुती थी'