विवेक आसरीयूरोप. दूर. ठंडा. पराया. अतीत को खुरचें तो हम पर कब्जा करने वाला. और पीछे लौटेंतो हमें मसालों की कीमत चुका अमीर करने वाला. मगर सांस्कृतिक रूप से हमेशा दूर-दूररहा.लेकिन ये सब का सब पास्ट है, जो टेंस रहा. प्रेजेंट मजेदार है. आपको पूरे यूरोप मेंदेसी मिल जाएंगे. हमें भी मिल गए. हमारे देसी. नाम विवेक आसरी. जर्मनी में रहते हैंऔर उन्होंने वादा किया है कि यूरोप के किस्से-कहानियां, सियासत और समाज के खूबनजारे दिखाएंगे. हमें. आपको.वादे के मुताबिक वो लाए हैं 'डाक यूरोप' की नई किस्त, जो डॉनल्ड ट्रंप के दादा केबारे में है. दादा के बिजनेस वाले दिनों से लेकर डॉनल्ड के राष्ट्रपति चुने जानेतक, ट्रंप परिवार अमीर तो हमेशा रहा, लेकिन इज्जत कभी नहीं कमा पाया.--------------------------------------------------------------------------------यूरोप तो डॉनल्ड ट्रंप से बहुत ही डरा हुआ है. ऐसा लग रहा है कि ट्रंप के आते हीव्हाइट हाउस के दरवाजे यूरोपीय संघ और नाटो के रास्ते बंद हो जाएंगे. जर्मनी मेंडॉनल्ड ट्रंप की जीत पर सबसे तीखा रिऐक्शन हुआ है. प्रतिक्रिया इतनी जबरदस्त है कियहां की चांसलर अंगेला मैर्केल को राजनीतिक जीवनदान दे गई है. तीन बार से लगातारचांसलरी जीत रहीं मैर्केल की पारी को इस बार खत्म समझा जा रहा था. उनकी रेटिंग्सनिम्नतम स्तर पर पहुंच चुकी थीं और जर्मनी में चर्चा इस बात की चल रही थी कि अबकौन. लेकिन, डॉनल्ड ट्रंप की जीत ने मैर्केल के लिए पासा पलट दिया.अब लोगों को लगने लगा है कि एक मैर्केल ही हैं, जो ट्रंप का मुकाबला कर पाएंगी. येदोनों नेता मेज के एक ही ओर बैठे एकदम उलट सोच के नेता हैं. ट्रंप के आलोचक उनकीशरणार्थी-विरोधी नीतियों के लिए आलोचना करते हैं और मैर्केल के आलोचक उनके शरणार्थीप्रेम के लिए. इस बीच एक और किस्सा मिला है, जो जर्मन अखबारों में छप रहा है किट्रंप के दादा कभी जर्मनी से भागकर अमेरिका गए थे.अंगेला मैर्केलजर्मन अखबार बिल्ड ने एक दस्तावेज छापा है, जो दिखाता है कि डॉनल्ड ट्रंप के दादाको जर्मनी से करीब-करीब धक्के देकर निकाला गया था. हुआ यूं कि 1885 में जर्मनी केवेस्टर्न प्लैटिनेट इलाके में रहने वाला 16 साल का फ्रीडरिष ट्रंप न्यू यॉर्क गयाथा. वहां जाकर उसने एक नाई की दुकान में काम किया. कुछ साल बाद उसने सिएटल में एकरेस्तरां खोला और वहां से धनकुबेर बनने का सफर शुरू हुआ. इसके बारे में ट्रंप केबायोग्राफर ग्वेंडा ब्लेयर ने पोलिटिको मैग्जीन में लिखा है.ब्लेयर लिखते हैं कि 1892 में फ्रीडरिष ट्रंप अमेरिकी नागरिक बन गया था. 1901 तकसेक्स और खाने के व्यापार के जरिए उसने अच्छा-खासा पैसा कमा लिया और 32 साल की उम्रमें एक अमीर अमेरिकी बनकर अपने मुल्क जर्मनी लौटा. यहां उसने अपने पड़ोसी की बेटीएलिजाबेथ से शादी की और वापस न्यू यॉर्क चला गया. लेकिन, एलिजाबेथ का न्यू यॉर्कमें मन नहीं लगा, तो दोनों 1904 में जर्मनी लौट आए.बिल्ड में छपा लेटर और फ्रीडरिष ट्रंपफ्रीडरिष ट्रंप ने कालश्टाट शहर को अपना ठिकाना बनाया. इंस्टिट्यूट ऑफ पलैटटिनेटहिस्ट्री के पूर्व निदेशक रॉलैंड पॉल के मुताबिक फ्रीडरिष ट्रंप ने कालश्टाट मेंरहते हुए फिर से जर्मन नागरिक बनने के लिए अर्जी दी. पॉल ने स्टेट आर्काइव्स में एकपत्र खोज निकाला है. ये पत्र 27 फरवरी, 1905 को जर्मन अधिकारियों ने कालश्टाट केमेयर को लिखा था. बिल्ड में छपे इस पत्र में कहा गया, "अमेरिकी नागरिक और पेंशनधारीफ्रीडरिष ट्रंप, जो इस वक्त कालश्टाट में है, को बताया जाए कि पहली मई से पहलेबावेरिया छोड़ दें, नहीं तो उन्हें प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा."फ्रीडरिष ट्रंप के साथ उनका परिवारजर्मन अधिकारियों की नाराजगी ये थी कि फ्रीडरिष ट्रंप जब 16 साल की उम्र मेंअमेरिका गया था, तो उसने अपने जाने की कोई सूचना नहीं दी थी. इस तरह समझा गया कि वहअनिवार्य सैन्य सेवा से बचकर भागा था. फ्रीडरिष ट्रंप ने तब बावेरिया के शाहीपरिवार से इल्तिजा की कि उनका प्रत्यर्पण रोका जाए, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहींकी. पहली जुलाई, 1905 को एलिजाबेथ और फ्रीडरिष ट्रंप ने हैम्बर्ग से न्यू यॉर्क केलिए पेन्सिल्वेनिया नाम का स्टीमर पकड़ लिया. इस यात्रा के वक्त एलिजाबेथप्रेग्नेंट थीं. तीन महीने बाद न्यू यॉर्क में फ्रीडरिष ट्रंप जूनियर का जन्म हुआ.उसी का बेटा डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका का राष्ट्रपति बनने वाला है.--------------------------------------------------------------------------------पढ़िए डाक यूरोप की पिछली किश्तें:इंसानों की इतनी बड़ी आदत, जो हमने अमेरिका को दी है!काम किए बिना सैलरी मिलने लगे तो?हजारों को बचाने के लिए कुछ सौ का कत्ल सही है?बेवफाइयों का जश्न मनातीं औरतों का उत्सव देखिएयूरोप में रोज कुछ नया बन रहा है, क्यों न हो भारत की उससे तुलना